Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
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6.1 ऊष्मागतिकी का परिचय
व्याख्या6.1 ऊष्मागतिकी का परिचय
ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) भौतिक रसायन का एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें ऊर्जा के रूपांतरण तथा उसके रासायनिक अभिक्रियाओं में उपयोग का अध्ययन किया जाता है। ऊष्मागतिकी के सिद्धांतों के अनुसार, किसी भी रासायनिक या भौतिक परिवर्तन के दौरान ऊर्जा का संरक्षण होता है और ऊर्जा का एक रूप दूसरे रूप में बदल सकता है। ऊष्मागतिकी का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि किसी प्रक्रिया में कितनी ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है, वह प्रक्रिया किस दिशा में स्वतः होगी, तथा वह प्रक्रिया किस सीमा तक जा सकती है। इसमें हम तंत्र (system), परिवेश (surroundings), तथा उनके बीच ऊर्जा के स्थानांतरण का अध्ययन करते हैं। ऊष्मागतिकी के नियम, जैसे ऊर्जा संरक्षण का नियम, एंट्रॉपी का नियम, आदि, रासायनिक अभिक्रियाओं की दिशा और सीमा निर्धारित करने में सहायक होते हैं।
- ऊष्मागतिकी ऊर्जा के रूपांतरण का अध्ययन है।
- तंत्र और परिवेश के बीच ऊर्जा का स्थानांतरण ऊष्मागतिकी का मुख्य विषय है।
- ऊष्मागतिकी के नियम रासायनिक अभिक्रियाओं की दिशा और सीमा निर्धारित करते हैं।
- ऊष्मागतिकी में तंत्र, परिवेश, कार्य, ऊष्मा, आदि की स्पष्ट परिभाषाएँ होती हैं।
- ऊष्मागतिकी के सिद्धांत ऊर्जा संरक्षण और एंट्रॉपी पर आधारित हैं।
- 📌 ऊष्मागतिकी: ऊर्जा के रूपांतरण का अध्ययन।
- 📌 तंत्र: वह भाग जिस पर अध्ययन किया जाता है।
- 📌 परिवेश: तंत्र के बाहर का भाग।
6.2 तंत्र, परिवेश और प्रकार
अवधारणा6.2 तंत्र, परिवेश और प्रकार
ऊष्मागतिकी में तंत्र (System) वह भाग है, जिस पर अध्ययन केंद्रित किया जाता है। तंत्र के बाहर का भाग परिवेश (Surroundings) कहलाता है। तंत्र और परिवेश के बीच एक काल्पनिक सीमा होती है, जिसे ऊष्मागतिकी सीमा (Thermodynamic boundary) कहते हैं। तंत्र के प्रकार मुख्यतः तीन होते हैं: (1) खुला तंत्र (Open System): जिसमें द्रव्य और ऊर्जा दोनों का आदान-प्रदान संभव है, जैसे उबलता पानी। (2) बंद तंत्र (Closed System): जिसमें केवल ऊर्जा का आदान-प्रदान संभव है, द्रव्य का नहीं, जैसे बंद बर्तन में पानी। (3) निषिद्ध तंत्र (Isolated System): जिसमें न तो द्रव्य और न ही ऊर्जा का आदान-प्रदान संभव है, जैसे थर्मस फ्लास्क। तंत्र की अवस्था (State) को मापनीय गुणों जैसे दाब, ताप, आयतन आदि द्वारा व्यक्त किया जाता है।
- तंत्र वह भाग है जिस पर अध्ययन किया जाता है।
- परिवेश तंत्र के बाहर का भाग है।
- खुला तंत्र, बंद तंत्र, निषिद्ध तंत्र – तीन प्रकार के तंत्र होते हैं।
- ऊष्मागतिकी सीमा तंत्र और परिवेश को अलग करती है।
- तंत्र की अवस्था दाब, ताप, आयतन आदि से व्यक्त होती है।
- 📌 खुला तंत्र: जिसमें द्रव्य और ऊर्जा दोनों का आदान-प्रदान होता है।
- 📌 बंद तंत्र: जिसमें केवल ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है।
- 📌 निषिद्ध तंत्र: जिसमें न द्रव्य और न ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है।
6.3 तंत्र की अवस्था एवं अवस्था फलन
परिभाषा6.3 तंत्र की अवस्था एवं अवस्था फलन
तंत्र की अवस्था (State of System) वह स्थिति है जिसमें तंत्र के सभी मापनीय गुण जैसे दाब (P), ताप (T), आयतन (V), द्रव्यमान (m), संरचना आदि निश्चित मान रखते हैं। जब तंत्र की कोई अवस्था बदलती है, तो इन गुणों में परिवर्तन होता है। अवस्था फलन (State Functi
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Physical Chemistry · Vardhman Mahaveer Open University