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Chapter 15

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Physical Chemistry (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट
Chapter 14अध्याय 15 / 15

Chapter 15अध्ययन नोट्स

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15.1 वैद्युत रसायन का परिचय

व्याख्या

15.1 वैद्युत रसायन का परिचय

वैद्युत रसायन वह रसायन विज्ञान की शाखा है, जिसमें रासायनिक अभिक्रियाओं और विद्युत ऊर्जा के बीच संबंध का अध्ययन किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से दो प्रकार की प्रक्रियाएँ सम्मिलित होती हैं: (1) वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें विद्युत ऊर्जा का उत्पादन होता है (जैसे, गैल्वैनिक सेल), और (2) वे अभिक्रियाएँ जिनमें विद्युत ऊर्जा का उपयोग करके रासायनिक परिवर्तन कराए जाते हैं (जैसे, विद्युत अपघटन)। वैद्युत रसायन का महत्व आधुनिक विज्ञान, उद्योग, चिकित्सा, ऊर्जा उत्पादन, धातु निष्कर्षण, बैटरियों, ईंधन कोशिकाओं, विद्युत अपघटन, और इलेक्ट्रोप्लेटिंग जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक है। इस अध्याय में हम विद्युत रसायन के मूल सिद्धांतों, विद्युत कोशिकाओं के प्रकार, इलेक्ट्रोड विभव, नर्न्स्ट समीकरण, विद्युत अपघटन, और उनके अनुप्रयोगों का अध्ययन करेंगे।

  • वैद्युत रसायन विद्युत ऊर्जा और रासायनिक अभिक्रियाओं के बीच संबंध का अध्ययन करता है।
  • गैल्वैनिक सेल में रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है।
  • विद्युत अपघटन में विद्युत ऊर्जा का उपयोग कर रासायनिक परिवर्तन कराए जाते हैं।
  • वैद्युत रसायन का उपयोग बैटरियों, ईंधन कोशिकाओं, धातु निष्कर्षण आदि में होता है।
  • इस शाखा में इलेक्ट्रोड विभव, नर्न्स्ट समीकरण, और विद्युत अपघटन का अध्ययन किया जाता है।
  • 📌 वैद्युत रसायन: विद्युत ऊर्जा और रासायनिक अभिक्रियाओं के संबंध का अध्ययन।
  • 📌 गैल्वैनिक सेल: वह यंत्र जिसमें रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है।

15.2 विद्युत रासायनिक कोशिकाएँ

अवधारणा

15.2 विद्युत रासायनिक कोशिकाएँ

विद्युत रासायनिक कोशिकाएँ वे यंत्र हैं जिनमें रासायनिक अभिक्रियाओं के द्वारा विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है या विद्युत ऊर्जा का उपयोग कर रासायनिक परिवर्तन कराए जाते हैं। ये दो प्रकार की होती हैं: (1) गैल्वैनिक (वाल्टाइक) कोशिका, जिसमें स्वतःस्फूर्त रासायनिक अभिक्रिया के कारण विद्युत धारा उत्पन्न होती है; (2) इलेक्ट्रोलाइटिक कोशिका, जिसमें बाह्य विद्युत स्रोत के द्वारा रासायनिक अभिक्रिया कराई जाती है। गैल्वैनिक सेल में दो भिन्न धातुओं के इलेक्ट्रोड उनके आयनों के विलयन में डूबे होते हैं और उन्हें नमक सेतु द्वारा जोड़ा जाता है। इलेक्ट्रोलाइटिक सेल में एक इलेक्ट्रोलाइट के विलयन में दो इलेक्ट्रोड डूबे होते हैं और बाह्य विद्युत स्रोत से जुड़े होते हैं।

  • विद्युत रासायनिक कोशिकाएँ दो प्रकार की होती हैं: गैल्वैनिक और इलेक्ट्रोलाइटिक।
  • गैल्वैनिक सेल में स्वतःस्फूर्त अभिक्रिया से विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
  • इलेक्ट्रोलाइटिक सेल में बाह्य विद्युत स्रोत से रासायनिक परिवर्तन कराए जाते हैं।
  • दोनों कोशिकाओं में इलेक्ट्रोड और इलेक्ट्रोलाइट का महत्त्वपूर्ण स्थान है।
  • नमक सेतु आयनों के आवागमन को संतुलित करता है।
  • 📌 गैल्वैनिक सेल: स्वतःस्फूर्त रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत धारा उत्पन्न करने वाली कोशिका।
  • 📌 इलेक्ट्रोलाइटिक सेल: बाह्य विद्युत स्रोत से रासायनिक परिवर्तन कराने वाली कोशिका।
  • 📌 नमक सेतु: दो अर्ध-कोशिकाओं को जोड़ने वाला यंत्र, जो आयनों का संतुलन बनाए रखता है।

15.3 इलेक्ट्रोड विभव

परिभाषा

15.3 इलेक्ट्रोड विभव

इलेक्ट्रोड विभव (Electrode Potential) वह विभव है, जो किसी इलेक्ट्रोड और उसके आयन के विलयन के बीच स्थापित होता है, जब इलेक्ट्रोड को 1 मोलर सांद्रता के आयन के विलयन में डुबोया जाता है। यह विभव इलेक्ट्रोड की प्रवृत्ति को दर्शाता है कि वह इलेक्ट्रॉन ग्रह