Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
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2.1 ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम
अवधारणा2.1 ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम
ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम यह बताता है कि ऊर्जा का रूपांतरण केवल एक दिशा में ही होता है और सभी स्वतःस्फूर्त प्रक्रियाएँ एक निश्चित दिशा में ही घटित होती हैं। यह नियम बताता है कि ऊष्मा हमेशा उच्च तापमान से निम्न तापमान की ओर स्वतः प्रवाहित होती है, न कि इसके विपरीत। यह नियम ऊर्जा के संरक्षण के नियम से भिन्न है, क्योंकि यह ऊर्जा के रूपांतरण की दिशा को निर्धारित करता है। द्वितीय नियम के कई रूप हैं, जैसे कि क्लॉसियस कथन और केल्विन-प्लांक कथन। क्लॉसियस कथन के अनुसार, "किसी भी स्वतःस्फूर्त प्रक्रिया में ऊष्मा कभी भी स्वयं निम्न तापमान से उच्च तापमान की ओर स्थानांतरित नहीं होती।" केल्विन-प्लांक कथन के अनुसार, "किसी भी इंजन द्वारा सम्पूर्ण ऊष्मा को कार्य में परिवर्तित करना असंभव है।" यह नियम बताता है कि कोई भी ऊष्मा इंजन 100% दक्षता के साथ कार्य नहीं कर सकता।
- ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम ऊर्जा के रूपांतरण की दिशा निर्धारित करता है।
- ऊष्मा स्वतः उच्च तापमान से निम्न तापमान की ओर प्रवाहित होती है।
- कोई भी इंजन सम्पूर्ण ऊष्मा को कार्य में परिवर्तित नहीं कर सकता।
- द्वितीय नियम के दो प्रमुख कथन हैं: क्लॉसियस और केल्विन-प्लांक।
- यह नियम स्वतःस्फूर्त प्रक्रियाओं की दिशा को समझने में सहायक है।
- ऊर्जा का रूपांतरण पूर्णतः दक्ष नहीं हो सकता।
- 📌 ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम: ऊर्जा के रूपांतरण की दिशा को निर्धारित करने वाला नियम।
- 📌 स्वतःस्फूर्त प्रक्रिया: वह प्रक्रिया जो बिना बाह्य ऊर्जा के स्वयं घटित होती है।
- 📌 क्लॉसियस कथन: ऊष्मा स्वयं निम्न तापमान से उच्च तापमान की ओर नहीं जाती।
2.2 एंट्रॉपी
परिभाषा2.2 एंट्रॉपी
एंट्रॉपी ऊष्मागतिकी का एक महत्वपूर्ण राज्य फलन है, जो किसी प्रणाली की अव्यवस्था या अनिश्चितता का मात्रात्मक माप है। द्वितीय नियम के अनुसार, किसी भी स्वतःस्फूर्त प्रक्रिया में सम्पूर्ण ब्रह्मांड की एंट्रॉपी बढ़ती है। एंट्रॉपी का चिन्ह S है। यदि किसी प्रणाली में ऊष्मा (q) को तापमान (T) पर रिवर्सिबल रूप से जोड़ा जाता है, तो एंट्रॉपी में परिवर्तन (ΔS) = q_rev/T होता है। एंट्रॉपी का SI मात्रक जूल प्रति केल्विन (J K⁻¹) है। यह अवधारणा बताती है कि प्रकृति में प्रक्रियाएँ उस दिशा में होती हैं जिसमें एंट्रॉपी बढ़ती है।
- एंट्रॉपी अव्यवस्था का मात्रात्मक माप है।
- एंट्रॉपी का चिन्ह S है और SI मात्रक J K⁻¹ है।
- ΔS = q_rev/T, जहाँ q_rev रिवर्सिबल ऊष्मा है।
- स्वतःस्फूर्त प्रक्रियाओं में सम्पूर्ण एंट्रॉपी बढ़ती है।
- एंट्रॉपी एक राज्य फलन है, यह केवल प्रारंभिक और अंतिम अवस्था पर निर्भर करती है।
- एंट्रॉपी की अवधारणा द्वितीय नियम की मात्रात्मक व्याख्या करती है।
- 📌 एंट्रॉपी (S): किसी प्रणाली की अव्यवस्था का मात्रात्मक माप।
- 📌 राज्य फलन: वह राशि जो केवल प्रारंभिक और अंतिम अवस्था पर निर्भर करती है।
2.3 एंट्रॉपी परिवर्तन की गणना
सूत्र2.3 एंट्रॉपी परिवर्तन की गणना
एंट्रॉपी परिवर्तन (ΔS) की गणना विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए की जाती है। यदि कोई प्रक्रिया रिवर्सिबल है, तो ΔS = q_rev/T का उपयोग किया जाता है। यदि तापमान परिवर्तित होता है, तो ΔS = ∫(dq_rev/T) का समाकलन किया जाता है। किसी आदर्श गैस के विस्तार या संपीड़
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Physical Chemistry · Vardhman Mahaveer Open University