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Chapter 13

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Physical Chemistry (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 12अध्याय 13 / 15Chapter 14

Chapter 13अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

13.1 विद्युत रसायन का परिचय

व्याख्या

13.1 विद्युत रसायन का परिचय

इस अनुभाग में विद्युत रसायन के मूल सिद्धांतों का परिचय दिया गया है। विद्युत रसायन वह शाखा है जिसमें रासायनिक अभिक्रियाओं और विद्युत ऊर्जा के बीच संबंध का अध्ययन किया जाता है। इसमें यह समझाया गया है कि कैसे रासायनिक अभिक्रियाएँ विद्युत ऊर्जा उत्पन्न कर सकती हैं या विद्युत ऊर्जा के द्वारा रासायनिक परिवर्तन किए जा सकते हैं। विद्युत रसायन का अध्ययन मुख्य रूप से दो प्रकार की कोशिकाओं पर आधारित है: गैल्वैनिक कोशिका (जिसमें रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है) और इलेक्ट्रोलाइटिक कोशिका (जिसमें विद्युत ऊर्जा के द्वारा रासायनिक परिवर्तन होते हैं)। इस अनुभाग में यह भी बताया गया है कि विद्युत रसायन का महत्व उद्योग, बैटरी, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, और जैविक प्रक्रियाओं में है।

  • विद्युत रसायन में रासायनिक अभिक्रियाएँ और विद्युत ऊर्जा का संबंध होता है।
  • गैल्वैनिक और इलेक्ट्रोलाइटिक कोशिकाएँ विद्युत रसायन के मुख्य प्रकार हैं।
  • गैल्वैनिक कोशिका में स्वतःस्फूर्त रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है।
  • इलेक्ट्रोलाइटिक कोशिका में विद्युत ऊर्जा द्वारा रासायनिक परिवर्तन होते हैं।
  • विद्युत रसायन का उपयोग बैटरी, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, और जैविक प्रक्रियाओं में होता है।
  • विद्युत रसायन का अध्ययन ऊर्जा रूपांतरण की समझ के लिए आवश्यक है।
  • 📌 विद्युत रसायन: रासायनिक अभिक्रियाओं और विद्युत ऊर्जा के बीच संबंध का अध्ययन।
  • 📌 गैल्वैनिक कोशिका: वह कोशिका जिसमें रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है।
  • 📌 इलेक्ट्रोलाइटिक कोशिका: वह कोशिका जिसमें विद्युत ऊर्जा के द्वारा रासायनिक परिवर्तन होते हैं।

13.2 गैल्वैनिक (वोल्टाइक) कोशिकाएँ

अवधारणा

13.2 गैल्वैनिक (वोल्टाइक) कोशिकाएँ

इस अनुभाग में गैल्वैनिक कोशिकाओं की संरचना, कार्य और सिद्धांत का विस्तार से वर्णन किया गया है। गैल्वैनिक कोशिका वह विद्युत रासायनिक कोशिका है जिसमें स्वतःस्फूर्त रासायनिक अभिक्रिया के द्वारा विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है। इसमें दो भिन्न धातुओं को उनके संबंधित आयन घोल में डुबोया जाता है और दोनों को नमक पुल (salt bridge) द्वारा जोड़ा जाता है। अभिक्रिया के दौरान एक इलेक्ट्रोड पर ऑक्सीकरण और दूसरे पर अपचयन होता है। उदाहरण के लिए, डैनियल कोशिका (Daniel Cell) में जिंक और तांबा का उपयोग होता है। जिंक इलेक्ट्रोड पर ऑक्सीकरण (Zn → Zn²⁺ + 2e⁻) और तांबा इलेक्ट्रोड पर अपचयन (Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu) होता है।

  • गैल्वैनिक कोशिका में स्वतःस्फूर्त रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है।
  • कोशिका में दो इलेक्ट्रोड होते हैं: एनोड (ऑक्सीकरण) और कैथोड (अपचयन)।
  • नमक पुल आयनों के प्रवाह को संतुलित करता है।
  • डैनियल कोशिका गैल्वैनिक कोशिका का प्रमुख उदाहरण है।
  • ऑक्सीकरण और अपचयन की अभिक्रियाएँ इलेक्ट्रोड पर होती हैं।
  • कोशिका का विद्युत वाहक बल (EMF) अभिक्रिया की ऊर्जा को दर्शाता है।
  • 📌 एनोड: वह इलेक्ट्रोड जहाँ ऑक्सीकरण होता है।
  • 📌 कैथोड: वह इलेक्ट्रोड जहाँ अपचयन होता है।
  • 📌 नमक पुल: आयनों के प्रवाह को संतुलित करने वाला माध्यम।

13.3 कोशिका अभिक्रिया और विद्युत वाहक बल (EMF)

सूत्र

13.3 कोशिका अभिक्रिया और विद्युत वाहक बल (EMF)

इस अनुभाग में गैल्वैनिक कोशिका में होने वाली अभिक्रिया और विद्युत वाहक बल (EMF) की गणना का विस्तार से वर्णन किया गया है। कोशिका अभिक्रिया में ऑक्सीकरण और अपचयन की आधी अभिक्रियाएँ होती हैं। EMF वह ऊर्जा है जो कोशिका द्वारा उत्पन्न की जाती है। EMF की ग