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Chapter 5

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of Modern World (1453-1950 AD) (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 4अध्याय 5 / 20Chapter 6

Chapter 5अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

फ्रांस की क्रांति (1789) आधुनिक विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है। इस क्रांति ने न केवल फ्रांस, बल्कि पूरे यूरोप और विश्व के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक ढांचे को गहराई से प्रभावित किया। इस अध्याय के परिचय में, हम क्रांति से पहले के फ्रांस की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति, तत्कालीन समाज की संरचना, और क्रांति के कारणों की संक्षिप्त चर्चा करेंगे। 18वीं सदी के अंत में फ्रांस एक सामंती समाज था, जहाँ राजा लुई सोलहवें का निरंकुश शासन था। समाज तीन वर्गों में बँटा था: पहला वर्ग (पादरी), दूसरा वर्ग (कुलीन), और तीसरा वर्ग (सामान्य जनता)। तीसरे वर्ग को सबसे अधिक कर देना पड़ता था, जबकि पहले और दूसरे वर्ग को कई विशेषाधिकार प्राप्त थे। आर्थिक संकट, सामाजिक असमानता, और बौद्धिक विचारों के प्रसार ने क्रांति के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया।

  • फ्रांस की क्रांति 1789 में हुई थी।
  • क्रांति से पहले फ्रांस में सामंती व्यवस्था थी।
  • समाज तीन वर्गों में विभाजित था: पादरी, कुलीन और सामान्य जनता।
  • तीसरे वर्ग को सबसे अधिक कर देना पड़ता था।
  • राजा लुई सोलहवें का निरंकुश शासन था।
  • आर्थिक संकट और बौद्धिक विचारों ने क्रांति को जन्म दिया।
  • 📌 सामंती व्यवस्था: वह सामाजिक व्यवस्था जिसमें भूमि पर अधिकार कुलीनों के पास होता है।
  • 📌 निरंकुश शासन: वह शासन जिसमें राजा के पास सभी शक्तियाँ होती हैं।

फ्रांसीसी समाज: 18वीं सदी के अंत में

व्याख्या

फ्रांसीसी समाज: 18वीं सदी के अंत में

18वीं सदी के अंत में फ्रांसीसी समाज तीन मुख्य वर्गों में विभाजित था: पहला वर्ग (पादरी), दूसरा वर्ग (कुलीन) और तीसरा वर्ग (सामान्य जनता)। पहला वर्ग चर्च से जुड़ा था और धार्मिक कार्य करता था, इन्हें करों से छूट थी। दूसरा वर्ग कुलीन था, जिनके पास विशाल भूमि और विशेषाधिकार थे। तीसरा वर्ग सबसे बड़ा था, जिसमें किसान, मजदूर, व्यापारी, दस्तकार आदि शामिल थे। इन्हें भारी कर देना पड़ता था, जबकि पहले दो वर्गों को कई छूटें थीं। तीसरे वर्ग में ही बौद्धिक वर्ग (बुर्जुआ वर्ग) भी था, जिसने क्रांति के विचारों को आगे बढ़ाया। सामाजिक असमानता, आर्थिक शोषण और राजनीतिक अधिकारों की कमी ने तीसरे वर्ग में असंतोष को जन्म दिया।

  • फ्रांसीसी समाज तीन वर्गों में विभाजित था।
  • पहला वर्ग पादरी (क्लर्जी) था, जिन्हें करों से छूट थी।
  • दूसरा वर्ग कुलीन (नोबिलिटी) था, जिनके पास भूमि और विशेषाधिकार थे।
  • तीसरा वर्ग सबसे बड़ा था, जिसमें किसान, मजदूर, व्यापारी आदि थे।
  • तीसरे वर्ग को सबसे अधिक कर देना पड़ता था।
  • तीसरे वर्ग में ही बुर्जुआ वर्ग ने क्रांति के विचारों को जन्म दिया।
  • 📌 बुर्जुआ वर्ग: शिक्षित और संपन्न व्यापारी, वकील, डॉक्टर आदि का वर्ग।
  • 📌 विशेषाधिकार: वे अधिकार जो केवल कुछ वर्गों को प्राप्त होते हैं।

आर्थिक संकट और कर व्यवस्था

व्याख्या

आर्थिक संकट और कर व्यवस्था

18वीं सदी के उत्तरार्ध में फ्रांस गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था। सरकारी खर्चे अत्यधिक बढ़ गए थे, विशेषकर राजा के दरबार, युद्धों और विलासिता पर। अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम में फ्रांस की भागीदारी ने भी आर्थिक बोझ बढ़ाया। राजकोष खाली हो गया था। सरक