Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
इस खंड में वाणिज्यवाद (Mercantilism) और औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) के विषय में संक्षिप्त परिचय दिया गया है। वाणिज्यवाद यूरोप में 16वीं से 18वीं शताब्दी के मध्य प्रचलित आर्थिक विचारधारा थी, जिसमें राष्ट्रीय समृद्धि के लिए सोने-चाँदी के भंडार को बढ़ाना, निर्यात को प्रोत्साहित करना और उपनिवेशों की स्थापना करना मुख्य था। औद्योगिक क्रांति 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इंग्लैंड में प्रारंभ हुई, जिसने उत्पादन के साधनों, तकनीकी नवाचारों और सामाजिक-आर्थिक संरचना में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। इस खंड में इन दोनों अवधारणाओं का ऐतिहासिक महत्व, उनके कारण और प्रभावों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
- वाणिज्यवाद यूरोप की आर्थिक नीति थी, जिसमें राष्ट्रीय धन बढ़ाने पर बल था।
- औद्योगिक क्रांति ने उत्पादन के साधनों में यांत्रिक परिवर्तन लाया।
- दोनों अवधारणाएँ आधुनिक विश्व के आर्थिक विकास से जुड़ी हैं।
- इन परिवर्तनों ने उपनिवेशवाद और पूँजीवाद को जन्म दिया।
- औद्योगिक क्रांति का प्रभाव समाज, राजनीति और संस्कृति पर पड़ा।
- 📌 वाणिज्यवाद: ऐसी आर्थिक नीति जिसमें निर्यात बढ़ाने और सोना-चाँदी एकत्र करने पर बल होता है।
- 📌 औद्योगिक क्रांति: उत्पादन के साधनों में यांत्रिक और तकनीकी परिवर्तन की प्रक्रिया।
वाणिज्यवाद की विशेषताएँ
अवधारणावाणिज्यवाद की विशेषताएँ
वाणिज्यवाद 16वीं से 18वीं शताब्दी के मध्य यूरोप की प्रमुख आर्थिक नीति थी। इसमें राज्य की समृद्धि का आधार सोना-चाँदी के भंडार को माना जाता था। वाणिज्यवाद के अनुसार, निर्यात को बढ़ावा देना और आयात को नियंत्रित करना चाहिए। उपनिवेशों की स्थापना, व्यापारिक कंपनियों को विशेषाधिकार, और सरकार का आर्थिक गतिविधियों में हस्तक्षेप वाणिज्यवाद की मुख्य विशेषताएँ थीं। इस नीति ने यूरोप के देशों के बीच व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया और उपनिवेशवाद को जन्म दिया।
- राष्ट्रीय धन का आधार सोना-चाँदी का भंडार था।
- निर्यात को प्रोत्साहित किया जाता था, आयात पर नियंत्रण था।
- सरकार का आर्थिक गतिविधियों में हस्तक्षेप आवश्यक था।
- उपनिवेशों की स्थापना और व्यापारिक कंपनियों को विशेषाधिकार दिए जाते थे।
- व्यापारिक युद्ध और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला।
- 📌 निर्यात: देश से वस्तुओं का बाहर जाना।
- 📌 आयात: देश में वस्तुओं का बाहर से आना।
- 📌 उपनिवेश: किसी देश द्वारा अन्य क्षेत्र पर अधिकार कर उसे अपने आर्थिक हित में प्रयोग करना।
वाणिज्यवाद के प्रभाव
व्याख्यावाणिज्यवाद के प्रभाव
वाणिज्यवाद ने यूरोप के देशों की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक संरचना पर गहरा प्रभाव डाला। इस नीति के कारण उपनिवेशवाद को बढ़ावा मिला, जिससे यूरोपीय देशों ने एशिया, अफ्रीका और अमेरिका में उपनिवेश स्थापित किए। इससे व्यापारिक पूँजी का संचय हुआ और औद्योगिक
SLM - History of Modern World (1453-1950 AD) (Hindi) के सभी 20 अध्याय
History of Modern World (1453-1950 AD) · Vardhman Mahaveer Open University
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