Chapter 14
Chapter 14 — अध्ययन नोट्स
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14.1 प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति और पेरिस शांति सम्मेलन की पृष्ठभूमि
व्याख्या14.1 प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति और पेरिस शांति सम्मेलन की पृष्ठभूमि
प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के बाद यूरोप में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भारी बदलाव आए। युद्ध के अंत में मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका, इटली आदि) ने विजयी होकर जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, तुर्की और बुल्गारिया को पराजित किया। युद्ध के विनाशकारी परिणामों के कारण शांति स्थापना हेतु एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की आवश्यकता महसूस हुई। पेरिस शांति सम्मेलन का आयोजन 18 जनवरी 1919 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुआ। इसमें 32 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य युद्ध के बाद स्थायी शांति स्थापित करना, विजयी और पराजित देशों के बीच नई सीमाओं का निर्धारण करना, तथा भविष्य में युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की स्थापना करना था। सम्मेलन की पृष्ठभूमि में अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के '14 सूत्र' (Fourteen Points) अत्यंत महत्वपूर्ण थे, जिनमें आत्मनिर्णय का अधिकार, खुले समझौते, समुद्री स्वतंत्रता, तथा लीग ऑफ नेशंस की स्थापना जैसे प्रस्ताव शामिल थे।
- प्रथम विश्व युद्ध के बाद शांति स्थापना हेतु पेरिस शांति सम्मेलन का आयोजन हुआ।
- 32 देशों के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लिया।
- सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य स्थायी शांति और नई सीमाओं का निर्धारण था।
- अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के '14 सूत्र' सम्मेलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहे।
- युद्ध के विनाशकारी परिणामों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को उजागर किया।
- 📌 प्रथम विश्व युद्ध: 1914-1918 के बीच लड़ा गया वैश्विक युद्ध।
- 📌 पेरिस शांति सम्मेलन: 1919 में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन।
- 📌 वुडरो विल्सन: अमेरिकी राष्ट्रपति, जिन्होंने '14 सूत्र' प्रस्तुत किए।
14.2 पेरिस शांति सम्मेलन की कार्यवाही
व्याख्या14.2 पेरिस शांति सम्मेलन की कार्यवाही
पेरिस शांति सम्मेलन की कार्यवाही जनवरी 1919 से जून 1919 तक चली। सम्मेलन में मुख्य रूप से 'बिग फोर' (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली) के नेताओं ने निर्णायक भूमिका निभाई। इनमें वुडरो विल्सन (अमेरिका), डेविड लॉयड जॉर्ज (ब्रिटेन), जॉर्ज क्लेमन्सो (फ्रांस) और विटोरियो ओरलैंडो (इटली) शामिल थे। सम्मेलन में विभिन्न समितियों का गठन किया गया, जिन्होंने युद्ध के कारणों, क्षतिपूर्ति, सीमाओं के पुनर्निर्धारण, तथा लीग ऑफ नेशंस की स्थापना जैसे विषयों पर विचार किया। सम्मेलन में पराजित देशों को आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे निर्णयों में एकतरफा दृष्टिकोण अपनाया गया। सम्मेलन की कार्यवाही में जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, तुर्की और बुल्गारिया के साथ अलग-अलग संधियों का मसौदा तैयार किया गया।
- सम्मेलन की कार्यवाही 6 माह तक चली।
- 'बिग फोर' नेताओं ने मुख्य भूमिका निभाई।
- पराजित देशों को आमंत्रित नहीं किया गया।
- विभिन्न समितियों का गठन किया गया।
- संधियों के मसौदे तैयार किए गए।
- 📌 बिग फोर: अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली के प्रमुख नेता।
- 📌 संधि: दो या अधिक देशों के बीच समझौता।
14.3 वर्साय संधि (जर्मनी के साथ)
व्याख्या14.3 वर्साय संधि (जर्मनी के साथ)
वर्साय संधि 28 जून 1919 को जर्मनी और मित्र राष्ट्रों के बीच हस्ताक्षरित हुई। यह संधि जर्मनी के लिए अत्यंत कठोर मानी जाती है। संधि के अनुसार जर्मनी को युद्ध का दोषी ठहराया गया (धारा 231), उसे भारी क्षतिपूर्ति (6,600 मिलियन पौंड) देने का आदेश दिया गया,
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History of Modern World (1453-1950 AD) · Vardhman Mahaveer Open University
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