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Chapter 17

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Business Environment (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 16अध्याय 17 / 17

Chapter 17अध्ययन नोट्स

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17.1 प्रस्तावना

व्याख्या

17.1 प्रस्तावना

इस अनुभाग में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के महत्व और भूमिका की प्रस्तावना दी गई है। इसमें बताया गया है कि वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण के युग में FDI किस प्रकार से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक आवश्यक घटक बन गया है। भारत जैसे विकासशील देश में पूंजी, तकनीकी ज्ञान, प्रबंधन कौशल और रोजगार के अवसरों की आवश्यकता होती है, जिसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पूरा करता है। यह अनुभाग बताता है कि FDI के माध्यम से विदेशी कंपनियाँ भारतीय कंपनियों में निवेश करती हैं, जिससे देश की आर्थिक संरचना में बदलाव आता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि FDI केवल पूंजी निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीकी हस्तांतरण, उत्पादन क्षमता में वृद्धि, और वैश्विक व्यापार में प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ाता है।

  • FDI का अर्थ है विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में प्रत्यक्ष निवेश।
  • FDI से पूंजी, तकनीकी ज्ञान और प्रबंधन कौशल का प्रवाह होता है।
  • FDI भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में सहायक है।
  • FDI से रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होते हैं।
  • FDI वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाता है।
  • 📌 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI): विदेशी कंपनियों द्वारा किसी देश की कंपनियों में किया गया प्रत्यक्ष निवेश।
  • 📌 वैश्वीकरण: विश्व के देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों का विस्तार।

17.2 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की परिभाषा एवं विशेषताएँ

परिभाषा

17.2 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की परिभाषा एवं विशेषताएँ

इस अनुभाग में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की स्पष्ट परिभाषा और इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन किया गया है। FDI वह प्रक्रिया है जिसमें विदेशी कंपनी या व्यक्ति किसी देश की कंपनी में दीर्घकालिक निवेश करता है, जिससे उसे प्रबंधन एवं नियंत्रण में भागीदारी मिलती है। यह निवेश या तो नई कंपनी स्थापित कर या मौजूदा कंपनी में हिस्सेदारी खरीदकर किया जाता है। FDI की प्रमुख विशेषताएँ हैं: दीर्घकालिक निवेश, प्रबंधन में भागीदारी, तकनीकी और प्रबंधकीय ज्ञान का हस्तांतरण, और घरेलू अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव।

  • FDI में निवेशक को प्रबंधन में भागीदारी मिलती है।
  • यह निवेश दीर्घकालिक होता है।
  • FDI से तकनीकी और प्रबंधकीय ज्ञान का हस्तांतरण होता है।
  • FDI घरेलू अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है।
  • FDI से उत्पादन क्षमता का विस्तार होता है।
  • 📌 निवेश: पूंजी, संसाधन या संपत्ति का किसी व्यापार में लगाना।
  • 📌 प्रबंधन में भागीदारी: कंपनी के निर्णय लेने की प्रक्रिया में हिस्सेदारी।

17.3 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रकार

अवधारणा

17.3 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रकार

इस अनुभाग में FDI के विभिन्न प्रकारों का विस्तार से वर्णन किया गया है। मुख्य रूप से FDI के दो प्रकार होते हैं: ग्रीनफील्ड निवेश और ब्राउनफील्ड निवेश। ग्रीनफील्ड निवेश में विदेशी कंपनी नए संयंत्र, मशीनरी और आधारभूत संरचना स्थापित करती है। ब्राउनफील्ड