Chapter 16
Chapter 16 — अध्ययन नोट्स
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16.1 विदेशी व्यापार का अर्थ
परिभाषा16.1 विदेशी व्यापार का अर्थ
विदेशी व्यापार वह व्यापार है जिसमें एक देश के निवासी अन्य देशों के निवासियों के साथ वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय-विक्रय करते हैं। यह व्यापार दो देशों या एक से अधिक देशों के बीच होता है। विदेशी व्यापार को तीन भागों में बाँटा जा सकता है: आयात (Import), निर्यात (Export), और पुनः निर्यात (Re-export)। आयात का अर्थ है किसी देश में अन्य देशों से वस्तुएँ या सेवाएँ मँगवाना। निर्यात का अर्थ है किसी देश से वस्तुएँ या सेवाएँ अन्य देशों को भेजना। पुनः निर्यात का अर्थ है किसी देश द्वारा आयातित वस्तुओं को बिना या न्यूनतम प्रक्रिया के अन्य देशों को निर्यात करना। विदेशी व्यापार का मुख्य उद्देश्य देश की आवश्यकताओं की पूर्ति, विदेशी मुद्रा अर्जन, औद्योगिक विकास, और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है।
- विदेशी व्यापार में दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का आदान-प्रदान होता है।
- आयात, निर्यात और पुनः निर्यात विदेशी व्यापार के मुख्य प्रकार हैं।
- विदेशी व्यापार से देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
- यह व्यापार देश की आर्थिक वृद्धि में सहायक होता है।
- विदेशी व्यापार से विभिन्न देशों के बीच संबंध मजबूत होते हैं।
- 📌 विदेशी व्यापार: दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय-विक्रय।
- 📌 आयात: अन्य देशों से वस्तुएँ या सेवाएँ मँगवाना।
- 📌 निर्यात: अन्य देशों को वस्तुएँ या सेवाएँ भेजना।
16.2 भारत के विदेशी व्यापार का स्वरूप
व्याख्या16.2 भारत के विदेशी व्यापार का स्वरूप
भारत के विदेशी व्यापार का स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है। स्वतंत्रता के पूर्व भारत मुख्यतः कच्चे माल का निर्यातक और तैयार वस्तुओं का आयातक था। स्वतंत्रता के पश्चात् भारत ने औद्योगिकीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए, जिससे निर्यात वस्तुओं की संरचना में बदलाव आया। अब भारत से तैयार वस्तुएँ, इंजीनियरिंग वस्तुएँ, रसायन, वस्त्र, रत्न एवं आभूषण आदि का निर्यात बढ़ा है। आयात में भी बदलाव आया है, अब भारत मशीनरी, कच्चा तेल, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि का आयात करता है। भारत का विदेशी व्यापार विश्व के अनेक देशों के साथ है, जिसमें अमेरिका, चीन, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, जर्मनी, जापान आदि प्रमुख हैं।
- स्वतंत्रता के पूर्व भारत कच्चा माल निर्यात करता था।
- अब भारत तैयार वस्तुएँ और सेवाएँ भी निर्यात करता है।
- आयात में कच्चा तेल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि का हिस्सा बढ़ा है।
- भारत के व्यापारिक साझेदार देशों की संख्या बढ़ी है।
- विदेशी व्यापार में विविधता आई है।
- 📌 विदेशी व्यापार का स्वरूप: समय के साथ व्यापार की वस्तुओं एवं सेवाओं में आने वाले बदलाव।
- 📌 औद्योगिकीकरण: उद्योगों की स्थापना एवं विकास की प्रक्रिया।
16.3 भारत के विदेशी व्यापार की संरचना
अवधारणा16.3 भारत के विदेशी व्यापार की संरचना
विदेशी व्यापार की संरचना से तात्पर्य है कि भारत किन-किन वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात और आयात करता है, तथा इनका अनुपात क्या है। स्वतंत्रता के बाद भारत के निर्यात में कृषि उत्पादों की जगह औद्योगिक वस्तुओं का हिस्सा बढ़ा है। रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग
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Business Environment · Vardhman Mahaveer Open University
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