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Chapter 15

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Business Environment (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 14अध्याय 15 / 17Chapter 16

Chapter 15अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

भूमिका

व्याख्या

भूमिका

इस अनुभाग में निजीकरण एवं विदेशी निवेश के महत्व और आवश्यकता की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की गई है। भारत में 1991 के आर्थिक सुधारों के दौरान निजीकरण और विदेशी निवेश को अपनाया गया, जिससे देश की अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन आए। निजीकरण का तात्पर्य है, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की संपत्ति, प्रबंधन या नियंत्रण को निजी क्षेत्र को सौंपना। वहीं, विदेशी निवेश का अर्थ है, विदेशी कंपनियों या व्यक्तियों द्वारा भारतीय उद्यमों में पूंजी निवेश करना। इन दोनों प्रक्रियाओं का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना, प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, और सरकारी बोझ को कम करना है। इस अनुभाग में यह भी बताया गया है कि किस प्रकार 1991 से पहले भारत में सार्वजनिक क्षेत्र का वर्चस्व था और निजी क्षेत्र को सीमित भूमिका दी गई थी। लेकिन समय के साथ, सार्वजनिक क्षेत्र की अक्षमताएँ सामने आईं, जैसे - घाटे में चलना, कम उत्पादकता, और नवाचार की कमी। इन समस्याओं के समाधान के लिए निजीकरण और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया गया।

  • निजीकरण का अर्थ है सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्ति का निजी क्षेत्र को हस्तांतरण।
  • विदेशी निवेश से देश में पूंजी, तकनीक और प्रबंधन कौशल का आगमन होता है।
  • 1991 के आर्थिक सुधारों में निजीकरण और विदेशी निवेश को प्रमुख स्थान मिला।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की अक्षमताओं के कारण इन नीतियों की आवश्यकता महसूस हुई।
  • निजीकरण और विदेशी निवेश से अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा और दक्षता बढ़ती है।
  • 📌 निजीकरण: सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्ति का निजी क्षेत्र को हस्तांतरण।
  • 📌 विदेशी निवेश: विदेशी कंपनियों या व्यक्तियों द्वारा भारतीय उद्यमों में पूंजी निवेश।

निजीकरण की अवधारणा

अवधारणा

निजीकरण की अवधारणा

निजीकरण का तात्पर्य है, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण को आंशिक या पूर्ण रूप से निजी क्षेत्र को सौंपना। इसका उद्देश्य सरकारी नियंत्रण को कम करना, दक्षता बढ़ाना, और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना है। निजीकरण के तहत सरकार अपनी हिस्सेदारी घटाकर निजी कंपनियों को बेचती है, जिससे पूंजी का प्रवाह बढ़ता है। निजीकरण के तीन प्रमुख रूप होते हैं: (1) स्वामित्व का हस्तांतरण, (2) प्रबंधन का हस्तांतरण, (3) परिसंपत्तियों की बिक्री। भारत में निजीकरण की प्रक्रिया 1991 के बाद तेज हुई, जब सरकार ने आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाई। निजीकरण से सरकारी बोझ कम होता है, और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है।

  • निजीकरण सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्ति का निजी क्षेत्र को सौंपना है।
  • इसका उद्देश्य दक्षता, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।
  • स्वामित्व, प्रबंधन और परिसंपत्तियों का हस्तांतरण इसके मुख्य रूप हैं।
  • भारत में 1991 के बाद निजीकरण की प्रक्रिया तेज हुई।
  • निजीकरण से सरकारी घाटा और बोझ कम होता है।
  • 📌 स्वामित्व हस्तांतरण: सरकारी हिस्सेदारी को निजी क्षेत्र को बेचना।
  • 📌 प्रबंधन हस्तांतरण: प्रबंधन अधिकार निजी कंपनियों को देना।

निजीकरण के प्रकार

व्याख्या

निजीकरण के प्रकार

निजीकरण के कई प्रकार होते हैं, जिन्हें मुख्यतः तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है: (1) स्वामित्व का निजीकरण, (2) प्रबंधन का निजीकरण, और (3) परिसंपत्तियों का निजीकरण। स्वामित्व का निजीकरण तब होता है जब सरकार अपनी हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेच देती है