Ch 5निःशुल्क

Chapter 5

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Business Environment (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 4अध्याय 5 / 17Chapter 6

Chapter 5अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

5.1 प्रस्तावना

व्याख्या

5.1 प्रस्तावना

इस अनुभाग में भारत की निर्यात-आयात नीति की आवश्यकता, महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का परिचय दिया गया है। भारत एक विकासशील देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था में निर्यात और आयात का महत्वपूर्ण स्थान है। स्वतंत्रता के पश्चात् भारत ने आत्मनिर्भरता की नीति अपनाई, लेकिन वैश्विक व्यापार में भागीदारी के लिए निर्यात-आयात नीति का निर्माण आवश्यक था। इस नीति के माध्यम से सरकार ने देश के आर्थिक विकास, विदेशी मुद्रा अर्जन, औद्योगीकरण, और रोजगार सृजन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया। नीति के तहत निर्यात को प्रोत्साहन देने, आयात को नियंत्रित करने और संतुलित व्यापार सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न उपाय किए गए। प्रस्तावना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में निर्यात-आयात नीति में समय-समय पर संशोधन आवश्यक है ताकि भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहे।

  • निर्यात-आयात नीति भारत की आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है।
  • इस नीति से विदेशी मुद्रा की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
  • आर्थिक विकास, औद्योगीकरण और रोजगार सृजन में योगदान।
  • नीति में समय-समय पर संशोधन आवश्यक है।
  • वैश्विक व्यापार में भारत की भागीदारी को बढ़ावा।
  • 📌 निर्यात: देश से बाहर वस्तुओं/सेवाओं की बिक्री।
  • 📌 आयात: विदेश से वस्तुओं/सेवाओं की खरीद।
  • 📌 विदेशी मुद्रा: अन्य देशों की मुद्रा, जैसे डॉलर, यूरो।

5.2 निर्यात-आयात नीति के उद्देश्य

अवधारणा

5.2 निर्यात-आयात नीति के उद्देश्य

इस अनुभाग में भारत की निर्यात-आयात नीति के प्रमुख उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन किया गया है। नीति का मुख्य उद्देश्य देश के आर्थिक विकास को गति देना है। इसके अंतर्गत विदेशी मुद्रा अर्जन, औद्योगीकरण को प्रोत्साहन, रोजगार के अवसर सृजित करना, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भागीदारी, आयात प्रतिस्थापन, और संतुलित व्यापार को सुनिश्चित करना शामिल है। नीति के माध्यम से सरकार देश के संसाधनों का अधिकतम उपयोग, तकनीकी उन्नयन, और निर्यातोन्मुखी उद्योगों को बढ़ावा देती है। इसके अतिरिक्त, नीति का उद्देश्य घरेलू उद्योगों की रक्षा करना और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराना भी है।

  • विदेशी मुद्रा अर्जन और उसका संरक्षण।
  • औद्योगीकरण और तकनीकी विकास को प्रोत्साहन।
  • रोजगार के नए अवसरों का सृजन।
  • आयात प्रतिस्थापन द्वारा घरेलू उद्योगों की रक्षा।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भागीदारी।
  • 📌 आयात प्रतिस्थापन: विदेशी वस्तुओं के स्थान पर देशी वस्तुओं का उपयोग।
  • 📌 निर्यात संवर्धन: निर्यात को बढ़ाने के लिए किए गए प्रयास।

5.3 निर्यात-आयात नीति की विशेषताएँ

व्याख्या

5.3 निर्यात-आयात नीति की विशेषताएँ

इस अनुभाग में भारत की निर्यात-आयात नीति की मुख्य विशेषताओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। नीति में लचीलापन, पारदर्शिता, और समय-समय पर संशोधन की व्यवस्था है। इसमें निर्यात संवर्धन के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएँ, लाइसेंसिंग प्रणाली, आयात नियंत्रण,