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Chapter 6

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Business Environment (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 17Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

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परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में भारत में आर्थिक नियोजन की पृष्ठभूमि, आवश्यकता, और विकास की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। स्वतंत्रता के बाद भारत को अनेक आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। देश में गरीबी, बेरोजगारी, कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, औद्योगीकरण की कमी, और असमानता जैसी समस्याएँ थीं। इन समस्याओं के समाधान के लिए नियोजित आर्थिक विकास की आवश्यकता महसूस की गई। आर्थिक नियोजन का मुख्य उद्देश्य संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग, आर्थिक विकास की गति को तेज करना, और सामाजिक न्याय की स्थापना करना था। भारत में नियोजन की शुरुआत 1951 में प्रथम पंचवर्षीय योजना के साथ हुई। नियोजन के माध्यम से सरकार ने देश की प्राथमिकताओं का निर्धारण किया और संसाधनों का वितरण किया।

  • आर्थिक नियोजन का उद्देश्य संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करना है।
  • स्वतंत्रता के बाद भारत में गरीबी, बेरोजगारी, और असमानता जैसी समस्याएँ थीं।
  • 1951 में प्रथम पंचवर्षीय योजना लागू की गई।
  • नियोजन के माध्यम से आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिला।
  • नियोजन ने औद्योगीकरण, कृषि विकास, और बुनियादी ढांचे के निर्माण में योगदान दिया।
  • 📌 आर्थिक नियोजन: संसाधनों के कुशल और संतुलित उपयोग के लिए पूर्व निर्धारित योजनाओं के अनुसार विकास की प्रक्रिया।
  • 📌 पंचवर्षीय योजना: पाँच वर्षों के लिए बनाई गई आर्थिक विकास की योजना।

आर्थिक नियोजन की अवधारणा

अवधारणा

आर्थिक नियोजन की अवधारणा

आर्थिक नियोजन का तात्पर्य है - देश के उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम और कुशल उपयोग सुनिश्चित करने के लिए पूर्व निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार योजनाएँ बनाना और उन्हें क्रियान्वित करना। भारत जैसे विकासशील देश में नियोजन का महत्व इसलिए है क्योंकि यहाँ संसाधन सीमित हैं और आवश्यकताएँ असीमित। नियोजन के माध्यम से सरकार आर्थिक विकास की दिशा, प्राथमिकताएँ, और संसाधनों का वितरण निर्धारित करती है। नियोजन का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय संतुलन, और रोजगार सृजन भी है। भारत में नियोजन का स्वरूप मिश्रित अर्थव्यवस्था के आधार पर है, जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों की भूमिका होती है।

  • आर्थिक नियोजन पूर्व निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार संसाधनों का उपयोग है।
  • नियोजन से आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय, और क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित होता है।
  • भारत में नियोजन मिश्रित अर्थव्यवस्था पर आधारित है।
  • नियोजन के माध्यम से प्राथमिकताओं का निर्धारण किया जाता है।
  • नियोजन में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों की भागीदारी होती है।
  • 📌 मिश्रित अर्थव्यवस्था: ऐसी अर्थव्यवस्था जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों की भूमिका होती है।
  • 📌 सामाजिक न्याय: समाज के सभी वर्गों को समान अवसर और संसाधनों का वितरण।

आर्थिक नियोजन के उद्देश्य

व्याख्या

आर्थिक नियोजन के उद्देश्य

आर्थिक नियोजन के मुख्य उद्देश्य हैं: (1) आर्थिक विकास की गति को तेज करना, (2) गरीबी और बेरोजगारी को कम करना, (3) सामाजिक और आर्थिक असमानता को घटाना, (4) क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना, (5) आत्मनिर्भरता प्राप्त करना, (6) मानव संसाधन का विकास करना, (7)