Chapter 9
Chapter 9 — अध्ययन नोट्स
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9.1 अंतरराष्ट्रीय व्यापार का अर्थ
परिभाषा9.1 अंतरराष्ट्रीय व्यापार का अर्थ
अंतरराष्ट्रीय व्यापार वह व्यापार है जिसमें दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी एवं प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान होता है। यह व्यापार राष्ट्रीय सीमाओं को पार करता है और विभिन्न देशों की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के माध्यम से कोई देश अपनी अधिशेष वस्तुओं का निर्यात कर सकता है और जिन वस्तुओं की उसे आवश्यकता है, उनका आयात कर सकता है। यह व्यापार देशों के बीच आर्थिक सहयोग, प्रतिस्पर्धा और परस्पर निर्भरता को बढ़ाता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बिना कोई भी देश आत्मनिर्भर नहीं रह सकता, क्योंकि प्रत्येक देश के पास सभी संसाधन या तकनीक उपलब्ध नहीं होती।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार दो या दो से अधिक देशों के बीच होता है।
- यह वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को सम्मिलित करता है।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार से देशों की आर्थिक आवश्यकताएँ पूरी होती हैं।
- यह व्यापार देशों के बीच आर्थिक सहयोग और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाता है।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बिना पूर्ण आत्मनिर्भरता असंभव है।
- 📌 अंतरराष्ट्रीय व्यापार: दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी एवं प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान।
- 📌 निर्यात: किसी देश द्वारा अन्य देशों को वस्तुएँ या सेवाएँ बेचना।
- 📌 आयात: किसी देश द्वारा अन्य देशों से वस्तुएँ या सेवाएँ खरीदना।
9.2 अंतरराष्ट्रीय व्यापार की विशेषताएँ
अवधारणा9.2 अंतरराष्ट्रीय व्यापार की विशेषताएँ
अंतरराष्ट्रीय व्यापार की कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं: (1) राष्ट्रीय सीमाओं का अतिक्रमण: इसमें व्यापारिक लेन-देन राष्ट्रीय सीमाओं के पार होते हैं। (2) मुद्रा का विनिमय: इसमें विभिन्न देशों की मुद्राओं का आदान-प्रदान होता है। (3) विविधता: इसमें विभिन्न देशों की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक विविधताएँ होती हैं। (4) सरकारी नियंत्रण: अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर विभिन्न देशों की सरकारें नियंत्रण रखती हैं, जैसे- शुल्क, कोटा, लाइसेंस आदि। (5) परिवहन और संचार की भूमिका: व्यापार के लिए उन्नत परिवहन और संचार साधनों की आवश्यकता होती है। (6) जोखिम और अनिश्चितता: इसमें राजनीतिक, आर्थिक एवं प्राकृतिक जोखिम अधिक होते हैं।
- राष्ट्रीय सीमाओं के पार वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान।
- मुद्रा विनिमय की आवश्यकता।
- सरकारी नियंत्रण और नियमों का पालन।
- परिवहन और संचार की महत्वपूर्ण भूमिका।
- जोखिम और अनिश्चितता की अधिकता।
- विविधता के कारण जटिलताएँ।
- 📌 मुद्रा विनिमय: एक देश की मुद्रा को दूसरे देश की मुद्रा में बदलना।
- 📌 शुल्क: सरकार द्वारा आयात या निर्यात पर लगाया गया कर।
- 📌 कोटा: किसी वस्तु के आयात या निर्यात की अधिकतम सीमा।
9.3 अंतरराष्ट्रीय व्यापार का महत्व
व्याख्या9.3 अंतरराष्ट्रीय व्यापार का महत्व
अंतरराष्ट्रीय व्यापार का महत्व अनेक दृष्टियों से है: (1) संसाधनों का कुशल उपयोग: प्रत्येक देश अपनी विशेषज्ञता के अनुसार उत्पादन करता है और अन्य देशों से आवश्यक वस्तुएँ प्राप्त करता है। (2) आर्थिक विकास: निर्यात से विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है, ज
SLM - Money, Banking & Public Finance (Hindi) के सभी 16 अध्याय
Money, Banking & Public Finance · Vardhman Mahaveer Open University
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