Ch 1निःशुल्क

Chapter 1

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Money, Banking & Public Finance (Hindi)📖 12 नोट्स⏱️ ~18 मिनट
अध्याय 1 / 16Chapter 2

Chapter 1अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 12 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

1.1 मुद्रा का अर्थ

परिभाषा

1.1 मुद्रा का अर्थ

मुद्रा का अर्थ आर्थिक दृष्टि से वह वस्तु है जिसे समाज में सामान्य रूप से विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार किया जाता है। मुद्रा का मुख्य उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान को सरल बनाना है। प्राचीन काल में वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System) प्रचलित थी, जिसमें वस्तुओं का वस्तुओं के साथ आदान-प्रदान होता था। लेकिन इस प्रणाली में कई कठिनाइयाँ थीं, जैसे कि दो पक्षों की आवश्यकताओं का मेल (Double Coincidence of Wants) होना। इन समस्याओं के समाधान के लिए मुद्रा का विकास हुआ। प्रारंभ में विभिन्न वस्तुएँ जैसे धातु, गाय, नमक आदि मुद्रा के रूप में प्रयोग की जाती थीं। आधुनिक काल में मुद्रा के रूप में कागजी नोट, सिक्के और बैंक द्वारा जारी चेक आदि का प्रयोग होता है।

  • मुद्रा वह वस्तु है जिसे समाज विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार करता है।
  • मुद्रा का विकास वस्तु विनिमय प्रणाली की कठिनाइयों के कारण हुआ।
  • प्राचीन काल में वस्तु मुद्रा, धातु मुद्रा आदि का प्रयोग होता था।
  • आधुनिक मुद्रा में कागजी नोट, सिक्के, बैंक चेक आदि शामिल हैं।
  • मुद्रा के बिना आर्थिक लेन-देन में कई कठिनाइयाँ होती थीं।
  • मुद्रा ने आर्थिक गतिविधियों को सरल और सुगम बनाया।
  • 📌 मुद्रा: विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकृत वस्तु।
  • 📌 वस्तु विनिमय प्रणाली: वस्तुओं का वस्तुओं के साथ आदान-प्रदान।

1.2 मुद्रा के प्रकार

अवधारणा

1.2 मुद्रा के प्रकार

मुद्रा के प्रकारों का वर्गीकरण उसके स्वरूप और स्वीकृति के आधार पर किया जाता है। मुख्य रूप से मुद्रा दो प्रकार की होती है: (1) वस्तु मुद्रा (Commodity Money) और (2) प्रतिनिधि मुद्रा (Representative Money)। वस्तु मुद्रा वे वस्तुएँ हैं जिनका स्वयं का मूल्य होता है, जैसे सोना, चाँदी, तांबा आदि। प्रतिनिधि मुद्रा वह मुद्रा है जो किसी मूल्यवान वस्तु का प्रतिनिधित्व करती है, जैसे कागजी नोट, जो सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं और जिनका कोई आंतरिक मूल्य नहीं होता, लेकिन वे विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, मुद्रा को चलन मुद्रा (Currency Money) और जमा मुद्रा (Deposit Money) में भी बाँटा जाता है। चलन मुद्रा में कागजी नोट और सिक्के आते हैं, जबकि जमा मुद्रा में बैंक द्वारा जारी चेक, ड्राफ्ट आदि आते हैं।

  • मुद्रा के प्रकार: वस्तु मुद्रा और प्रतिनिधि मुद्रा।
  • वस्तु मुद्रा में सोना, चाँदी, नमक आदि का प्रयोग होता था।
  • प्रतिनिधि मुद्रा में कागजी नोट, सिक्के आदि आते हैं।
  • चलन मुद्रा: नोट और सिक्के, जो सीधे लेन-देन में प्रयोग होते हैं।
  • जमा मुद्रा: बैंक द्वारा जारी चेक, जो खाते में जमा धन का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • मुद्रा के प्रकार आर्थिक विकास के साथ बदलते रहे हैं।
  • 📌 वस्तु मुद्रा: स्वयं मूल्यवान वस्तु, जैसे सोना, चाँदी।
  • 📌 प्रतिनिधि मुद्रा: सरकार द्वारा जारी, आंतरिक मूल्य नहीं।
  • 📌 चलन मुद्रा: नोट और सिक्के।

1.3 मुद्रा के कार्य

व्याख्या

1.3 मुद्रा के कार्य

मुद्रा के मुख्य चार कार्य होते हैं: (1) विनिमय का माध्यम (Medium of Exchange), (2) मूल्य माप का साधन (Measure of Value), (3) संचय का साधन (Store of Value), (4) स्थगित भुगतान का साधन (Standard of Deferred Payment)। विनिमय का माध्यम के रूप में मुद्रा न