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Chapter 16

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Money, Banking & Public Finance (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 15अध्याय 15 / 16Chapter 17

Chapter 16अध्ययन नोट्स

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16.1 सार्वजनिक ऋण: अर्थ एवं परिभाषा

परिभाषा

16.1 सार्वजनिक ऋण: अर्थ एवं परिभाषा

सार्वजनिक ऋण वह ऋण है जिसे सरकार अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जनता, बैंकों या अन्य संस्थाओं से उधार लेती है। यह सरकार द्वारा राजस्व और व्यय के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए लिया जाता है। सार्वजनिक ऋण को 'सरकारी ऋण' भी कहा जाता है। जब सरकार के पास पर्याप्त आय नहीं होती, तब वह आंतरिक या बाह्य स्रोतों से ऋण लेती है। सार्वजनिक ऋण के अंतर्गत केंद्र, राज्य तथा स्थानीय निकायों द्वारा लिया गया ऋण सम्मिलित होता है। यह ऋण अस्थायी (शॉर्ट टर्म) या दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) हो सकता है। सार्वजनिक ऋण की परिभाषा विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने दी है, जैसे कि डॉ. डल्टन के अनुसार, 'सार्वजनिक ऋण वह ऋण है जिसे सरकार जनता से लेती है, न कि वह ऋण जो एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को देता है।' यह ऋण सरकार की वित्तीय नीति का महत्वपूर्ण अंग है।

  • सार्वजनिक ऋण सरकार द्वारा लिया गया ऋण है।
  • यह ऋण आंतरिक या बाह्य स्रोतों से लिया जा सकता है।
  • सार्वजनिक ऋण अस्थायी या दीर्घकालिक हो सकता है।
  • यह सरकार की वित्तीय नीति का अभिन्न हिस्सा है।
  • सार्वजनिक ऋण का उद्देश्य राजस्व-व्यय अंतर को पूरा करना है।
  • 📌 सार्वजनिक ऋण: सरकार द्वारा जनता या संस्थाओं से लिया गया ऋण।
  • 📌 आंतरिक ऋण: देश के भीतर से लिया गया ऋण।
  • 📌 बाह्य ऋण: विदेशी स्रोतों से लिया गया ऋण।

16.2 सार्वजनिक ऋण के प्रकार

अवधारणा

16.2 सार्वजनिक ऋण के प्रकार

सार्वजनिक ऋण को विभिन्न आधारों पर विभाजित किया जाता है। मुख्यतः इसे आंतरिक एवं बाह्य ऋण, उत्पादक एवं अप्रत्याशित ऋण, अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक ऋण, और स्वैच्छिक एवं अनिवार्य ऋण के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। आंतरिक ऋण वह है जिसे सरकार देश के भीतर के स्रोतों से लेती है, जैसे कि भारतीय रिजर्व बैंक, वाणिज्यिक बैंक, वित्तीय संस्थाएं, या जनता। बाह्य ऋण वह है जिसे सरकार विदेशी सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं (जैसे विश्व बैंक, IMF) से लेती है। उत्पादक ऋण वह है जिसका उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसे कार्यों में किया जाता है, जबकि अप्रत्याशित ऋण का उपयोग उपभोग या प्रशासनिक खर्चों के लिए होता है। अल्पकालिक ऋण एक वर्ष से कम अवधि के लिए होता है, जबकि दीर्घकालिक ऋण एक वर्ष से अधिक के लिए होता है। स्वैच्छिक ऋण वह है जिसे जनता अपनी इच्छा से देती है, जबकि अनिवार्य ऋण कर के रूप में लिया जाता है।

  • आंतरिक ऋण देश के भीतर से लिया जाता है।
  • बाह्य ऋण विदेशी स्रोतों से लिया जाता है।
  • उत्पादक ऋण उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए होता है।
  • अल्पकालिक ऋण एक वर्ष से कम के लिए होता है।
  • स्वैच्छिक ऋण जनता की इच्छा पर निर्भर करता है।
  • 📌 उत्पादक ऋण: उत्पादन क्षमता बढ़ाने हेतु लिया गया ऋण।
  • 📌 अप्रत्याशित ऋण: उपभोग या प्रशासनिक खर्च हेतु लिया गया ऋण।
  • 📌 स्वैच्छिक ऋण: जनता की इच्छा से दिया गया ऋण।

16.3 भारत में आंतरिक सार्वजनिक ऋण

व्याख्या

16.3 भारत में आंतरिक सार्वजनिक ऋण

भारत में आंतरिक सार्वजनिक ऋण वह ऋण है जिसे केंद्र या राज्य सरकारें देश के भीतर के स्रोतों से लेती हैं। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक, वाणिज्यिक बैंक, वित्तीय संस्थाएं, बीमा कंपनियां, और आम जनता शामिल हैं। आंतरिक ऋण के प्रमुख साधन हैं: सरकारी प्रतिभूतियां