Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
मुद्रा का मूल्य : अर्थ एवं मापन
व्याख्यामुद्रा का मूल्य : अर्थ एवं मापन
मुद्रा का मूल्य वह शक्ति है जिसके द्वारा मुद्रा एक निश्चित मात्रा में वस्तुओं एवं सेवाओं का विनिमय कर सकती है। यह मुद्रा की क्रयशक्ति के रूप में भी जाना जाता है। मुद्रा का मूल्य वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य स्तर के विपरीत होता है, अर्थात् जब वस्तुओं के मूल्य बढ़ते हैं तो मुद्रा का मूल्य घटता है और जब वस्तुओं के मूल्य घटते हैं तो मुद्रा का मूल्य बढ़ता है। मुद्रा के मूल्य का मापन मुख्यतः दो विधियों से किया जाता है – (1) क्रयशक्ति विधि, जिसमें मुद्रा की क्रयशक्ति को प्रत्यक्ष रूप से मापा जाता है, और (2) सूचकांक संख्या विधि, जिसमें वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य स्तर के आधार पर मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन का आकलन किया जाता है। मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन का अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जैसे कि उपभोक्ताओं की क्रयशक्ति, बचत, निवेश, और आर्थिक स्थिरता। मुद्रा के मूल्य के मापन के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आदि का प्रयोग किया जाता है।
- मुद्रा का मूल्य उसकी क्रयशक्ति को दर्शाता है।
- मुद्रा का मूल्य और वस्तुओं के मूल्य स्तर में विपरीत संबंध होता है।
- मुद्रा के मूल्य का मापन क्रयशक्ति और सूचकांक विधियों से होता है।
- मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन से आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ता है।
- मुद्रा के मूल्य के मापन के लिए CPI, WPI आदि सूचकांक प्रयुक्त होते हैं।
- 📌 मुद्रा का मूल्य: मुद्रा की क्रयशक्ति।
- 📌 मूल्य स्तर: वस्तुओं एवं सेवाओं के औसत मूल्य।
- 📌 सूचकांक संख्या: मूल्य स्तर में परिवर्तन मापने का सांख्यिकीय उपाय।
मुद्रा स्फीति : अर्थ, प्रकार एवं कारण
अवधारणामुद्रा स्फीति : अर्थ, प्रकार एवं कारण
मुद्रा स्फीति वह स्थिति है जब किसी देश में वस्तुओं एवं सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में निरंतर और तीव्र गति से वृद्धि होती है। मुद्रा स्फीति के कारण मुद्रा की क्रयशक्ति घट जाती है। मुद्रा स्फीति के मुख्य प्रकार हैं: माँग-खींच स्फीति (Demand-pull inflation), लागत-धक्का स्फीति (Cost-push inflation), और संरचनात्मक स्फीति। माँग-खींच स्फीति तब होती है जब कुल माँग कुल आपूर्ति से अधिक हो जाती है। लागत-धक्का स्फीति तब होती है जब उत्पादन लागतों में वृद्धि के कारण वस्तुओं के मूल्य बढ़ते हैं। मुद्रा स्फीति के कारणों में मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि, सरकारी खर्च में वृद्धि, करों में कमी, उत्पादन में कमी, काले धन की वृद्धि आदि शामिल हैं। मुद्रा स्फीति के प्रभाव व्यापक होते हैं, जैसे कि निर्धनों की क्रयशक्ति में गिरावट, बचत में कमी, निवेश में अस्थिरता, और आर्थिक असमानता में वृद्धि।
- मुद्रा स्फीति में मूल्य स्तर निरंतर बढ़ता है।
- माँग-खींच और लागत-धक्का स्फीति इसके प्रमुख प्रकार हैं।
- मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि स्फीति का मुख्य कारण है।
- स्फीति से निर्धनों की क्रयशक्ति घटती है।
- स्फीति से आर्थिक असमानता बढ़ती है।
- 📌 मुद्रा स्फीति: मूल्य स्तर में निरंतर वृद्धि।
- 📌 माँग-खींच स्फीति: अधिक माँग के कारण मूल्य वृद्धि।
- 📌 लागत-धक्का स्फीति: लागत बढ़ने से मूल्य वृद्धि।
मुद्रा स्फीति के प्रभाव
व्याख्यामुद्रा स्फीति के प्रभाव
मुद्रा स्फीति के प्रभाव समाज के विभिन्न वर्गों, आर्थिक गतिविधियों और देश की समग्र आर्थिक स्थिति पर पड़ते हैं। स्फीति से निर्धनों की क्रयशक्ति में गिरावट आती है क्योंकि उनकी आय स्थिर रहती है, जबकि वस्तुओं के मूल्य बढ़ जाते हैं। ऋणदाताओं की हानि होती ह
SLM - Money, Banking & Public Finance (Hindi) के सभी 16 अध्याय
Money, Banking & Public Finance · Vardhman Mahaveer Open University
1 और अध्याय — सभी देखें →