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Chapter 8

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Mechanics (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट
Chapter 7अध्याय 9 / 14Chapter 9

Chapter 8अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

8.1 प्रस्तावना

व्याख्या

8.1 प्रस्तावना

इस अनुभाग में गैलेलियन रूपांतरण की आवश्यकता और इसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समझाया गया है। भौतिकी में, जब हम किसी पिंड की गति का अध्ययन करते हैं, तो हमें यह जानना आवश्यक होता है कि किस सन्दर्भ तंत्र (frame of reference) में उस गति को मापा जा रहा है। गैलेलियो गैलीली ने सबसे पहले यह बताया कि गति का मापन सापेक्ष होता है, अर्थात् यह सन्दर्भ तंत्र पर निर्भर करता है। इस अनुभाग में यह स्पष्ट किया गया है कि न्यूटन के गति के नियम केवल उन सन्दर्भ तंत्रों में लागू होते हैं, जो एकसमान गति से चलते हैं, जिन्हें जड़त्वीय सन्दर्भ तंत्र (inertial frame of reference) कहते हैं। गैलेलियन रूपांतरण उन समीकरणों का समूह है, जो दो जड़त्वीय सन्दर्भ तंत्रों के बीच स्थान और समय के परिवर्तन को दर्शाते हैं। यह खंड आगे के अध्याय की नींव रखता है, जिसमें सापेक्षता के सिद्धांत की आवश्यकता और सीमाएँ स्पष्ट की जाती हैं।

  • गति का मापन सन्दर्भ तंत्र पर निर्भर करता है।
  • न्यूटन के गति के नियम केवल जड़त्वीय सन्दर्भ तंत्र में लागू होते हैं।
  • गैलेलियन रूपांतरण दो जड़त्वीय सन्दर्भ तंत्रों के बीच स्थान और समय के संबंध को दर्शाता है।
  • गैलेलियो ने गति की सापेक्षता का सिद्धांत प्रस्तुत किया।
  • यह खंड आगे के गहरे सिद्धांतों की नींव रखता है।
  • 📌 सन्दर्भ तंत्र: वह तंत्र जिसमें किसी वस्तु की स्थिति और गति मापी जाती है।
  • 📌 जड़त्वीय सन्दर्भ तंत्र: वह तंत्र जो एकसमान गति से चलता है और जिसमें न्यूटन के गति के नियम लागू होते हैं।

8.2 जड़त्वीय और अजड़त्वीय सन्दर्भ तंत्र

अवधारणा

8.2 जड़त्वीय और अजड़त्वीय सन्दर्भ तंत्र

इस खंड में जड़त्वीय (inertial) और अजड़त्वीय (non-inertial) सन्दर्भ तंत्रों के बीच का अंतर स्पष्ट किया गया है। जड़त्वीय सन्दर्भ तंत्र वह है, जिसमें न्यूटन के गति के नियम बिना किसी संशोधन के लागू होते हैं। अर्थात्, यदि कोई वस्तु उस तंत्र में स्थिर है या एकसमान गति से चल रही है, तो उस पर कोई बाहरी बल नहीं लग रहा है। इसके विपरीत, अजड़त्वीय सन्दर्भ तंत्र वह है, जो त्वरित (accelerated) होता है या जिसमें गति की दिशा या परिमाण बदलता रहता है। ऐसे तंत्रों में न्यूटन के गति के नियम सीधे-सीधे लागू नहीं होते, बल्कि उनमें काल्पनिक बल (fictitious force) जोड़ना पड़ता है।

  • जड़त्वीय सन्दर्भ तंत्र में न्यूटन के गति के नियम लागू होते हैं।
  • अजड़त्वीय सन्दर्भ तंत्र में काल्पनिक बल जोड़ना पड़ता है।
  • पृथ्वी को सामान्यतः जड़त्वीय तंत्र माना जाता है, यद्यपि उसमें थोड़ा सा घूर्णन होता है।
  • त्वरणशील तंत्र अजड़त्वीय होते हैं।
  • जड़त्वीय तंत्रों में गति का विश्लेषण सरल होता है।
  • 📌 काल्पनिक बल: वह बल जो केवल अजड़त्वीय तंत्र में अनुभव होता है, जैसे सेंट्रीफ्यूगल बल।
  • 📌 त्वरण: गति में परिवर्तन की दर।

8.3 गैलेलियन रूपांतरण समीकरण

सूत्र

8.3 गैलेलियन रूपांतरण समीकरण

इस खंड में दो जड़त्वीय सन्दर्भ तंत्रों के बीच स्थान और समय के संबंध को गैलेलियन रूपांतरण समीकरणों के माध्यम से समझाया गया है। मान लीजिए, एक सन्दर्भ तंत्र S है और दूसरा S', जो S के सापेक्ष x-अक्ष के अनुदिश वेग v से चल रहा है। यदि किसी घटना की स्थिति औ