Chapter 7
Chapter 7 — अध्ययन नोट्स
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7.1 संस्कृति : अर्थ और परिभाषाएँ
परिभाषा7.1 संस्कृति : अर्थ और परिभाषाएँ
इस अनुभाग में संस्कृति की अवधारणा, उसके अर्थ और विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई परिभाषाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। संस्कृति वह सामाजिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से मानव समाज अपने अनुभव, ज्ञान, विश्वास, मूल्य, रीति-रिवाज, कला, साहित्य, विज्ञान, तकनीकी, और जीवन के अन्य पहलुओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित करता है। संस्कृति का अर्थ केवल सभ्यता या बाह्य व्यवहार नहीं है, बल्कि इसमें समाज के विचार, भावनाएँ, आदर्श, और सामाजिक संरचनाएँ भी शामिल होती हैं। टेलर के अनुसार, "संस्कृति वह जटिल संपूर्ण है जिसमें ज्ञान, विश्वास, कला, नैतिकता, विधि, रीति-रिवाज तथा मनुष्य द्वारा समाज के सदस्य के रूप में अर्जित अन्य क्षमताएँ और आदतें सम्मिलित होती हैं।" संस्कृति की परिभाषाएँ समाजशास्त्र, मानवशास्त्र, और अन्य सामाजिक विज्ञानों में भिन्न-भिन्न रूप में प्रस्तुत की गई हैं, लेकिन सभी में यह स्वीकार किया गया है कि संस्कृति मानव समाज की जीवन पद्धति है।
- संस्कृति मानव समाज की जीवन पद्धति है।
- संस्कृति में ज्ञान, विश्वास, कला, नैतिकता, विधि, रीति-रिवाज आदि शामिल हैं।
- संस्कृति सामाजिक प्रक्रिया के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित होती है।
- संस्कृति बाह्य और आंतरिक दोनों पहलुओं को समाहित करती है।
- संस्कृति की परिभाषाएँ विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई हैं।
- संस्कृति समाज के आदर्शों और मूल्यों को संरक्षित करती है।
- 📌 संस्कृति: मानव समाज की जीवन पद्धति जिसमें ज्ञान, विश्वास, कला, नैतिकता आदि शामिल हैं।
- 📌 परिभाषा: किसी अवधारणा का सटीक और संक्षिप्त विवरण।
7.2 संस्कृति के संवर्धन के सिद्धांत
अवधारणा7.2 संस्कृति के संवर्धन के सिद्धांत
इस अनुभाग में संस्कृति के संवर्धन के प्रमुख सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन किया गया है। संवर्धन का अर्थ है संस्कृति का संरक्षण, विकास और परिवर्तन। संस्कृति के संवर्धन के लिए मुख्यतः तीन सिद्धांत माने गए हैं: 1. संचरण (Transmission), 2. अनुकूलन (Adaptation), 3. नवाचार (Innovation)। संचरण के माध्यम से संस्कृति की परंपराएँ, मूल्य और ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होते हैं। अनुकूलन के सिद्धांत के अनुसार, संस्कृति समय के साथ बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालती है। नवाचार के सिद्धांत में संस्कृति में नए विचार, तकनीकी, और व्यवहार शामिल होते हैं, जिससे संस्कृति का विकास होता है। इन सिद्धांतों के माध्यम से संस्कृति जीवित और गतिशील रहती है।
- संस्कृति का संवर्धन संचरण, अनुकूलन और नवाचार के माध्यम से होता है।
- संचरण में संस्कृति की परंपराएँ और मूल्य पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित होते हैं।
- अनुकूलन के सिद्धांत में संस्कृति बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालती है।
- नवाचार के सिद्धांत में संस्कृति में नए विचार और तकनीकी शामिल होते हैं।
- संस्कृति का संवर्धन समाज की स्थिरता और विकास के लिए आवश्यक है।
- संवर्धन के सिद्धांत संस्कृति को जीवित और गतिशील बनाए रखते हैं।
- 📌 संवर्धन: संस्कृति का संरक्षण, विकास और परिवर्तन।
- 📌 संचरण: संस्कृति का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरण।
- 📌 अनुकूलन: बदलती परिस्थितियों के अनुसार संस्कृति का ढलना।
7.3 संस्कृति के उपादान : परिभाषा और वर्गीकरण
परिभाषा7.3 संस्कृति के उपादान : परिभाषा और वर्गीकरण
इस अनुभाग में संस्कृति के उपादानों की परिभाषा और उनका वर्गीकरण प्रस्तुत किया गया है। उपादान का अर्थ है वे तत्व या घटक जो संस्कृति को बनाते हैं। संस्कृति के उपादान मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं: 1. भौतिक उपादान (Material Elements), 2. अमूर्त उपादान (
SLM - Social Anthropology (Hindi) के सभी 18 अध्याय
Social Anthropology · Vardhman Mahaveer Open University
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