Chapter 13
Chapter 13 — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
इस अनुभाग में भारत की जनजातियों की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का परिचय दिया गया है। भारत में जनजातियाँ देश की कुल जनसंख्या का लगभग 8.6% हिस्सा हैं। ये मुख्यतः देश के पूर्वोत्तर, मध्य, पूर्वी और दक्षिणी भागों में निवास करती हैं। जनजातियाँ अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं, भाषा, रीति-रिवाजों और जीवनशैली के लिए जानी जाती हैं। भारतीय संविधान ने इन्हें 'अनुसूचित जनजाति' (Scheduled Tribes) के रूप में मान्यता दी है। इनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति, ऐतिहासिक शोषण, मुख्यधारा से अलगाव, और विकास के प्रयासों की आवश्यकता को इस खंड में रेखांकित किया गया है।
- भारत में 700 से अधिक मान्यता प्राप्त जनजातियाँ हैं।
- जनजातियाँ मुख्यतः वनों, पहाड़ों और दुर्गम क्षेत्रों में निवास करती हैं।
- इनकी अपनी विशिष्ट भाषाएँ, धर्म और रीति-रिवाज होते हैं।
- संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजातियों की सूची बनाई गई।
- जनजातियों का पारंपरिक आजीविका साधन कृषि, शिकार, वनोपज संग्रह आदि है।
- 📌 जनजाति: एक सामाजिक समूह जो पारंपरिक रीति-रिवाजों, भाषा और संस्कृति के आधार पर पहचाना जाता है।
- 📌 अनुसूचित जनजाति: वे जनजातियाँ जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत विशेष दर्जा प्राप्त है।
भारत की जनजातियों की विशेषताएँ
अवधारणाभारत की जनजातियों की विशेषताएँ
इस खंड में भारत की जनजातियों की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक विशेषताओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। जनजातियाँ सामान्यतः एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में निवास करती हैं, उनकी अपनी भाषा, धर्म, रीति-रिवाज और पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था होती है। वे सामूहिकता, समानता और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता के लिए जानी जाती हैं। इनमें बाहरी हस्तक्षेप कम होता है और ये अपने पारंपरिक ज्ञान तथा जीवनशैली को संरक्षित रखती हैं।
- जनजातियाँ प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहती हैं।
- इनकी सामाजिक संरचना सामूहिकता और समानता पर आधारित होती है।
- पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था जैसे मुखिया, पंचायत आदि प्रचलित हैं।
- अधिकांश जनजातियों की अपनी मातृभाषा होती है।
- इनकी धार्मिक मान्यताएँ प्रकृति पूजा पर आधारित होती हैं।
- 📌 सामूहिकता: समूह में मिल-जुलकर रहने और कार्य करने की प्रवृत्ति।
- 📌 प्राकृतिक संसाधन: वन, जल, भूमि आदि जिन पर जनजातियाँ निर्भर रहती हैं।
जनजातीय समाज की संरचना
व्याख्याजनजातीय समाज की संरचना
इस अनुभाग में जनजातीय समाज की पारिवारिक, आर्थिक, धार्मिक और राजनीतिक संरचना का विस्तार से वर्णन किया गया है। जनजातीय समाज में परिवार सामान्यतः संयुक्त या विस्तारित होता है। आर्थिक संरचना कृषि, वनोपज संग्रह, शिकार, मछली पालन आदि पर आधारित होती है। धार
SLM - Social Anthropology (Hindi) के सभी 18 अध्याय
Social Anthropology · Vardhman Mahaveer Open University
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