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Chapter 14

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Social Anthropology (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 13अध्याय 14 / 18Chapter 15

Chapter 14अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस खंड में राजस्थान में निवास करने वाली जनजातियों का संक्षिप्त परिचय दिया गया है। राजस्थान भारत का एक प्रमुख राज्य है, जहाँ विविध सांस्कृतिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक विशेषताएँ पाई जाती हैं। यहाँ की जनजातियाँ राज्य की सामाजिक संरचना में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। जनजातियों का अध्ययन सामाजिक मानवशास्त्र के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इससे न केवल उनकी जनसंख्या, भौगोलिक वितरण, बल्कि उनकी सांस्कृतिक विशेषताओं का भी ज्ञान होता है। राजस्थान में जनजातियों की उपस्थिति प्राचीन काल से रही है और आज भी वे अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। इस अध्याय में हम राजस्थान की प्रमुख जनजातियों, उनकी जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति, सामाजिक संरचना, आर्थिक जीवन, सांस्कृतिक परंपराएँ, और उनके समक्ष आने वाली समस्याओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

  • राजस्थान में अनेक जनजातियाँ निवास करती हैं।
  • जनजातियों का अध्ययन सामाजिक मानवशास्त्र के लिए आवश्यक है।
  • जनजातियाँ राज्य की सांस्कृतिक विविधता का अभिन्न अंग हैं।
  • राजस्थान की जनजातियाँ ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
  • जनजातियों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विशेषताएँ विशिष्ट हैं।
  • 📌 जनजाति: एक ऐसी सामाजिक इकाई, जिसकी अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषा और परंपराएँ होती हैं।
  • 📌 सामाजिक मानवशास्त्र: मानव समाजों के अध्ययन की वह शाखा, जो उनकी संरचना, संस्कृति और विकास का विश्लेषण करती है।

राजस्थान की जनजातीय जनसंख्या

व्याख्या

राजस्थान की जनजातीय जनसंख्या

इस खंड में राजस्थान की जनजातीय जनसंख्या का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। भारत की जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों की भागीदारी लगभग 13.48% है। राजस्थान में कुल 12 प्रमुख अनुसूचित जनजातियाँ अधिसूचित हैं, जिनमें भील, मीणा, गरासिया, सहरिया, डामोर, काथोडी, सहरिया, सांसी, बंजारा, पारधी, गाडिया लोहार, और राबारी प्रमुख हैं। इनमें भील और मीणा सबसे बड़ी जनसंख्या वाली जनजातियाँ हैं। जनसंख्या वितरण के अनुसार, राजस्थान के दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी जिलों में जनजातीय जनसंख्या का घनत्व अधिक है। जनजातियों की जनसंख्या में वृद्धि, उनके सामाजिक-आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के स्तर का भी प्रभाव पड़ता है।

  • राजस्थान में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या 13.48% है।
  • भील और मीणा सबसे बड़ी जनसंख्या वाली जनजातियाँ हैं।
  • दक्षिणी राजस्थान में जनजातीय जनसंख्या का घनत्व अधिक है।
  • जनसंख्या वितरण सामाजिक-आर्थिक कारकों से प्रभावित है।
  • राज्य में कुल 12 प्रमुख अनुसूचित जनजातियाँ अधिसूचित हैं।
  • 📌 अनुसूचित जनजाति: वे जनजातियाँ जिन्हें संविधान की अनुसूची में शामिल किया गया है।
  • 📌 जनगणना: किसी क्षेत्र की कुल जनसंख्या का सरकारी सर्वेक्षण।

राजस्थान में जनजातियों का भौगोलिक वितरण

व्याख्या

राजस्थान में जनजातियों का भौगोलिक वितरण

इस खंड में राजस्थान में निवास करने वाली जनजातियों के भौगोलिक वितरण का विस्तार से वर्णन किया गया है। राजस्थान का दक्षिणी भाग, विशेषकर अरावली पर्वतमाला के क्षेत्र, जनजातीय निवास के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। यहाँ की जलवायु, वनस्पति, और भौगोलिक संरचना ज