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Chapter 2

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Social Anthropology (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 18Chapter 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में सामाजिक मानवशास्त्र और समाजशास्त्र के बीच संबंध की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की गई है। सामाजिक मानवशास्त्र मानव समाजों के सांस्कृतिक, सामाजिक और व्यवहारिक पहलुओं का अध्ययन करता है, जबकि समाजशास्त्र समाज के संरचनात्मक और क्रियात्मक पक्षों पर केंद्रित रहता है। दोनों विषयों की उत्पत्ति, विकास और अध्ययन की पद्धतियों में समानताएँ और भिन्नताएँ हैं। सामाजिक मानवशास्त्र मुख्यतः पारंपरिक, आदिवासी और ग्रामीण समाजों पर केंद्रित रहा है, जबकि समाजशास्त्र का फोकस आधुनिक, औद्योगिक और शहरी समाजों पर अधिक रहा है। दोनों विषय समाज के संगठन, सामाजिक संबंधों, संस्थाओं, मूल्यों और मान्यताओं का विश्लेषण करते हैं। इस अध्याय में इन दोनों विषयों के ऐतिहासिक विकास, अध्ययन क्षेत्र, पद्धतियों और आपसी संबंधों का विस्तार से विवेचन किया गया है।

  • सामाजिक मानवशास्त्र और समाजशास्त्र दोनों समाज के अध्ययन से संबंधित हैं।
  • दोनों विषयों की उत्पत्ति 19वीं सदी में यूरोप में हुई।
  • सामाजिक मानवशास्त्र का मुख्य फोकस पारंपरिक समाजों पर रहा है।
  • समाजशास्त्र आधुनिक समाजों के अध्ययन पर केंद्रित है।
  • दोनों विषयों के अध्ययन की पद्धतियों में अंतर है।
  • इन दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध और अंतःसंबंध हैं।
  • 📌 सामाजिक मानवशास्त्र: मानव समाजों के सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन।
  • 📌 समाजशास्त्र: समाज के संरचनात्मक और क्रियात्मक पक्षों का वैज्ञानिक अध्ययन।

सामाजिक मानवशास्त्र की परिभाषा और क्षेत्र

परिभाषा

सामाजिक मानवशास्त्र की परिभाषा और क्षेत्र

सामाजिक मानवशास्त्र मानव समाजों के सामाजिक संबंधों, संस्थाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन है। इसका मुख्य उद्देश्य मानव समाज के विविध रूपों, उनकी संरचना, कार्यप्रणाली और विकास को समझना है। सामाजिक मानवशास्त्र का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है, जिसमें परिवार, विवाह, कुटुंब, धर्म, अर्थव्यवस्था, राजनीति, कानून, रीति-रिवाज, परंपराएँ, सामाजिक नियंत्रण, सामाजिक परिवर्तन आदि का अध्ययन किया जाता है। यह विषय मुख्यतः आदिवासी, ग्रामीण और पारंपरिक समाजों के अध्ययन पर केंद्रित रहा है, किंतु अब इसका विस्तार शहरी और औद्योगिक समाजों तक भी हो गया है। सामाजिक मानवशास्त्र में तुलनात्मक अध्ययन की पद्धति का विशेष महत्व है, जिससे विभिन्न समाजों के बीच समानताओं और भिन्नताओं का विश्लेषण किया जाता है।

  • सामाजिक मानवशास्त्र समाज के विविध पहलुओं का अध्ययन करता है।
  • इसका मुख्य फोकस पारंपरिक और आदिवासी समाजों पर रहा है।
  • तुलनात्मक अध्ययन इसकी प्रमुख विशेषता है।
  • परिवार, विवाह, धर्म, राजनीति आदि इसके अध्ययन क्षेत्र हैं।
  • अब इसका विस्तार शहरी समाजों तक भी हो गया है।
  • सामाजिक संरचना और सामाजिक परिवर्तन का विश्लेषण भी किया जाता है।
  • 📌 तुलनात्मक अध्ययन: विभिन्न समाजों के बीच समानताओं और भिन्नताओं का विश्लेषण।
  • 📌 सामाजिक संरचना: समाज के विभिन्न घटकों का संगठन।

समाजशास्त्र की परिभाषा और क्षेत्र

परिभाषा

समाजशास्त्र की परिभाषा और क्षेत्र

समाजशास्त्र समाज के संरचनात्मक, क्रियात्मक और परिवर्तनशील पक्षों का वैज्ञानिक अध्ययन है। यह विषय समाज के संगठन, सामाजिक संबंधों, संस्थाओं, सामाजिक प्रक्रियाओं, सामाजिक परिवर्तन, सामाजिक नियंत्रण, सामाजिक स्तरीकरण, सामाजिक गतिशीलता आदि का विश्लेषण करत