Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
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6.1 नातेदारी की अवधारणा
परिभाषा6.1 नातेदारी की अवधारणा
नातेदारी सामाजिक मानवशास्त्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो समाज में व्यक्तियों के बीच संबंधों की संरचना और संगठन को समझने में सहायता करती है। नातेदारी वह प्रणाली है जिसके माध्यम से समाज में रक्त संबंध (जैविक), विवाह संबंध (सांस्कृतिक) और गोत्र संबंध (सांस्कृतिक) को परिभाषित किया जाता है। नातेदारी के अंतर्गत परिवार, वंश, गोत्र, और विवाह के नियम आते हैं। यह समाज के संगठन, सामाजिक नियंत्रण, उत्तराधिकार, और संपत्ति के वितरण में मुख्य भूमिका निभाती है। नातेदारी के संबंधों का अध्ययन सामाजिक मानवशास्त्रियों द्वारा समाज की संरचना, सामाजिक परिवर्तन, और सांस्कृतिक विविधता को समझने के लिए किया जाता है।
- नातेदारी सामाजिक संबंधों की संरचना को दर्शाती है।
- रक्त, विवाह और गोत्र संबंध नातेदारी के मुख्य आधार हैं।
- नातेदारी समाज में संगठन और नियंत्रण का साधन है।
- उत्तराधिकार और संपत्ति वितरण में नातेदारी की भूमिका महत्वपूर्ण है।
- मानवशास्त्र में नातेदारी का अध्ययन समाज की विविधता को समझने के लिए किया जाता है।
- 📌 नातेदारी: समाज में व्यक्तियों के बीच संबंधों की प्रणाली।
- 📌 रक्त संबंध: जैविक संबंध, जैसे माता-पिता और संतान।
- 📌 विवाह संबंध: सांस्कृतिक संबंध, जैसे पति-पत्नी।
6.2 नातेदारी के प्रकार
अवधारणा6.2 नातेदारी के प्रकार
नातेदारी के प्रकारों को समझना सामाजिक मानवशास्त्र का प्रमुख उद्देश्य है। नातेदारी मुख्यतः तीन प्रकार की होती है: रक्त संबंध (Consanguineous), विवाह संबंध (Affinal), और गोत्र संबंध (Clan/Lineage)। रक्त संबंध वे हैं जो जैविक रूप से उत्पन्न होते हैं, जैसे माता-पिता और संतान। विवाह संबंध वे हैं जो विवाह के माध्यम से बनते हैं, जैसे पति-पत्नी, सास-ससुर आदि। गोत्र संबंध सामाजिक और सांस्कृतिक आधार पर बनते हैं, जैसे कुल, वंश, या गोत्र। नातेदारी के प्रकार समाज की विविधता, सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक नियमों को दर्शाते हैं।
- नातेदारी मुख्यतः तीन प्रकार की होती है: रक्त, विवाह, और गोत्र संबंध।
- रक्त संबंध जैविक आधार पर बनते हैं।
- विवाह संबंध सांस्कृतिक आधार पर बनते हैं।
- गोत्र संबंध वंश या कुल के आधार पर बनते हैं।
- प्रत्येक प्रकार समाज में अलग-अलग भूमिका निभाता है।
- 📌 रक्त संबंध: जैविक संबंध, जैसे भाई-बहन।
- 📌 विवाह संबंध: विवाह से बने संबंध, जैसे सास-ससुर।
- 📌 गोत्र संबंध: वंश या कुल के आधार पर संबंध।
6.3 नातेदारी की संरचना
व्याख्या6.3 नातेदारी की संरचना
नातेदारी की संरचना समाज में संबंधों के संगठन को दर्शाती है। इसमें परिवार, वंश, गोत्र, और विवाह के नियम शामिल होते हैं। नातेदारी की संरचना दो मुख्य रूपों में होती है: एकरेखीय (Unilineal) और द्विरेखीय (Bilineal)। एकरेखीय संरचना में संबंध पिता या माता क
SLM - Social Anthropology (Hindi) के सभी 18 अध्याय
Social Anthropology · Vardhman Mahaveer Open University
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