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Chapter 4

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Social Anthropology (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 18Chapter 5

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परिवार की उत्पत्ति

व्याख्या

परिवार की उत्पत्ति

परिवार मानव समाज की सबसे प्राचीन एवं मौलिक संस्था है। परिवार की उत्पत्ति के विषय में विभिन्न समाजशास्त्रियों एवं मानवशास्त्रियों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। परिवार की उत्पत्ति के संबंध में मुख्यतः जैविक, आर्थिक, धार्मिक एवं सामाजिक कारणों को उत्तरदायी माना गया है। प्रारंभिक मानव समाज में जब मनुष्य झुंडों में रहता था, तब भी परिवार जैसी संरचना का बीजारोपण हो चुका था। जैसे-जैसे मानव समाज विकसित हुआ, परिवार की संरचना भी जटिल होती गई। परिवार की उत्पत्ति के संबंध में विभिन्न सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें मातृवंशीय एवं पितृवंशीय परिवार की उत्पत्ति प्रमुख है। प्रारंभ में मातृवंशीय परिवार अधिक प्रचलित था, जिसमें वंश, संपत्ति एवं उत्तराधिकार माता के माध्यम से चलता था। जैसे-जैसे कृषि एवं संपत्ति का महत्व बढ़ा, पितृवंशीय परिवार का विकास हुआ। धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों के विकास के साथ विवाह संस्था का उद्भव हुआ, जिससे परिवार की संरचना और अधिक सुदृढ़ हुई।

  • परिवार मानव समाज की सबसे प्राचीन संस्था है।
  • परिवार की उत्पत्ति के जैविक, सामाजिक, आर्थिक व धार्मिक कारण हैं।
  • प्रारंभ में मातृवंशीय परिवार अधिक प्रचलित थे।
  • कृषि व संपत्ति के विकास के साथ पितृवंशीय परिवार का विकास हुआ।
  • विवाह संस्था के विकास ने परिवार को स्थायित्व प्रदान किया।
  • 📌 मातृवंशीय परिवार: वह परिवार जिसमें वंश, संपत्ति व उत्तराधिकार माता के माध्यम से चलता है।
  • 📌 पितृवंशीय परिवार: वह परिवार जिसमें वंश, संपत्ति व उत्तराधिकार पिता के माध्यम से चलता है।

परिवार की परिभाषा एवं विशेषताएँ

परिभाषा

परिवार की परिभाषा एवं विशेषताएँ

परिवार की परिभाषा विभिन्न समाजशास्त्रियों व मानवशास्त्रियों ने दी है। मैकाइवर के अनुसार, 'परिवार वह समूह है जिसमें वयस्क पुरुष, स्त्री और उनके संतानें एक साथ निवास करती हैं।' परिवार की मुख्य विशेषताओं में रक्त संबंध, विवाह संबंध, सहवास, आर्थिक सहयोग, सामाजिक नियंत्रण, भावनात्मक संबंध एवं उत्तराधिकार व्यवस्था शामिल हैं। परिवार सामाजिकरण की प्रथम इकाई है, जहाँ बच्चे सामाजिक मूल्यों, परंपराओं व संस्कारों को सीखते हैं। परिवार का आकार, संरचना व कार्य समाज के अनुसार बदलते रहते हैं।

  • परिवार सामाजिक संस्था है जिसमें रक्त व विवाह संबंध होते हैं।
  • परिवार में सहवास व आर्थिक सहयोग अनिवार्य है।
  • परिवार सामाजिक नियंत्रण व सामाजिकरण का केंद्र है।
  • परिवार में भावनात्मक संबंध गहरे होते हैं।
  • परिवार की संरचना समाज के अनुसार बदलती है।
  • 📌 सामाजिकरण: वह प्रक्रिया जिसमें व्यक्ति समाज के मूल्यों, परंपराओं व संस्कारों को सीखता है।
  • 📌 सहवास: एक ही स्थान पर साथ रहना।

परिवार के प्रकार

अवधारणा

परिवार के प्रकार

परिवार के प्रकार विभिन्न आधारों पर विभाजित किए जा सकते हैं, जैसे संरचना, निवास, वंश, विवाह आदि। संरचना के आधार पर परिवार दो प्रकार के होते हैं: संयुक्त परिवार और एकल परिवार। निवास के आधार पर पितृनिवासी (पति के घर), मातृनिवासी (पत्नी के घर) और नियो-लो