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Chapter 5

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Social Anthropology (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट
Chapter 4अध्याय 5 / 18Chapter 6

Chapter 5अध्ययन नोट्स

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5.1 विवाह की अवधारणा

अवधारणा

5.1 विवाह की अवधारणा

विवाह सामाजिक मानव जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थान है, जो समाज में परिवार की स्थापना और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। एनसीईआरटी के अनुसार, विवाह वह सामाजिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से दो व्यक्ति—एक पुरुष और एक महिला—सामाजिक, धार्मिक, और कानूनी मान्यता प्राप्त संबंध में बंधते हैं। विवाह न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि समाज की संरचना, संस्कृति और परंपराओं को भी आकार देता है। विवाह की अवधारणा विभिन्न समाजों में अलग-अलग रूपों में पाई जाती है, किंतु इसका मूल उद्देश्य यौन संबंधों को नियंत्रित करना, संतानों की उत्पत्ति और उनकी सामाजिक मान्यता सुनिश्चित करना तथा सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना है। विवाह की प्रक्रिया में कई सामाजिक, धार्मिक और कानूनी नियमों का पालन किया जाता है, जिससे यह एक संस्थागत स्वरूप ग्रहण करता है। विवाह की अवधारणा में सामाजिक स्वीकृति, पारिवारिक संबंधों की स्थापना, और उत्तरदायित्वों का निर्धारण शामिल होता है।

  • विवाह सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण संस्थान है।
  • विवाह के माध्यम से परिवार की स्थापना होती है।
  • विवाह यौन संबंधों को सामाजिक मान्यता देता है।
  • विवाह संतानों की उत्पत्ति और सामाजिक मान्यता सुनिश्चित करता है।
  • विवाह सामाजिक, धार्मिक और कानूनी नियमों के अंतर्गत होता है।
  • विवाह सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्धारण करता है।
  • 📌 विवाह: दो व्यक्तियों के बीच सामाजिक, धार्मिक और कानूनी मान्यता प्राप्त संबंध।
  • 📌 संस्थान: समाज में स्थापित नियमों और परंपराओं का समूह।

5.2 विवाह के प्रकार

व्याख्या

5.2 विवाह के प्रकार

विवाह के प्रकार समाज की विविधता और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार भिन्न-भिन्न होते हैं। एनसीईआरटी के अनुसार, विवाह मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं: मोनोगैमी (एकपत्नी विवाह), पोलिगैमी (बहुपत्नी विवाह), और पोलिएंड्री (बहुपति विवाह)। मोनोगैमी वह प्रकार है जिसमें एक पुरुष और एक महिला के बीच विवाह संबंध स्थापित होता है। यह प्रकार अधिकांश समाजों में प्रचलित है और सामाजिक स्थिरता के लिए उपयुक्त माना जाता है। पोलिगैमी में एक पुरुष अनेक महिलाओं से विवाह करता है, यह प्रथा कुछ समाजों में विशेष परिस्थितियों में पाई जाती है। पोलिएंड्री में एक महिला अनेक पुरुषों से विवाह करती है, यह प्रथा दुर्लभ है और मुख्यतः हिमालयी क्षेत्रों में देखी जाती है। विवाह के प्रकारों का निर्धारण सामाजिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक कारकों पर निर्भर करता है।

  • विवाह के तीन मुख्य प्रकार: मोनोगैमी, पोलिगैमी, पोलिएंड्री।
  • मोनोगैमी अधिकांश समाजों में प्रचलित है।
  • पोलिगैमी में एक पुरुष अनेक महिलाओं से विवाह करता है।
  • पोलिएंड्री में एक महिला अनेक पुरुषों से विवाह करती है।
  • विवाह के प्रकार सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारकों पर निर्भर करते हैं।
  • विवाह के प्रकार समाज की विविधता को दर्शाते हैं।
  • 📌 मोनोगैमी: एक पुरुष और एक महिला के बीच विवाह संबंध।
  • 📌 पोलिगैमी: एक पुरुष अनेक महिलाओं से विवाह करता है।
  • 📌 पोलिएंड्री: एक महिला अनेक पुरुषों से विवाह करती है।

5.3 विवाह के नियम और निषेध

अवधारणा

5.3 विवाह के नियम और निषेध

विवाह के नियम और निषेध समाज की संरचना और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार निर्धारित होते हैं। एनसीईआरटी के अनुसार, विवाह के नियमों में एंडोगैमी (समूह के भीतर विवाह), एक्सोगैमी (समूह के बाहर विवाह), गोत्र निषेध, रक्त संबंध निषेध, और आयु संबंधी नियम शामिल