Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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5.1 परिचय
व्याख्या5.1 परिचय
इस अनुभाग में प्रथम कोटि के उच्च घात के अवकल समीकरणों का परिचय दिया गया है। अवकल समीकरण गणित में एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसमें किसी फलन और उसके अवकलन के बीच संबंध स्थापित किया जाता है। प्रथम कोटि का उच्च घात का अवकल समीकरण वह समीकरण होता है जिसमें अवकलन की शक्ति एक से अधिक होती है, लेकिन समीकरण में केवल प्रथम कोटि का अवकलन (dy/dx) ही उपस्थित रहता है। इस प्रकार के समीकरणों का अध्ययन भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में अत्यंत आवश्यक है। इस अध्याय में हम ऐसे समीकरणों को हल करने के विभिन्न विधियों का अध्ययन करेंगे।
- अवकल समीकरणों का उपयोग प्राकृतिक घटनाओं के गणितीय मॉडल में होता है।
- प्रथम कोटि का उच्च घात का अवकल समीकरण में अवकलन की शक्ति एक से अधिक होती है।
- ऐसे समीकरणों का हल निकालना कई क्षेत्रों में आवश्यक है।
- इस अध्याय में विभिन्न हल विधियों का अध्ययन किया जाएगा।
- 📌 अवकल समीकरण: वह समीकरण जिसमें फलन और उसके अवकलन के बीच संबंध होता है।
- 📌 प्रथम कोटि: समीकरण में अवकलन की शक्ति एक होती है।
- 📌 उच्च घात: समीकरण में अवकलन की शक्ति एक से अधिक होती है।
5.2 समीकरण का सामान्य रूप
परिभाषा5.2 समीकरण का सामान्य रूप
इस अनुभाग में प्रथम कोटि के उच्च घात के अवकल समीकरणों के सामान्य स्वरूप को प्रस्तुत किया गया है। ऐसे समीकरणों को सामान्यतः F(x, y, dy/dx) = 0 के रूप में लिखा जाता है, जिसमें F कोई फलन है जो x, y और dy/dx पर निर्भर करता है। यदि समीकरण में (dy/dx) की शक्ति n है, तो समीकरण को उच्च घात का कहा जाता है। उदाहरण के लिए, (dy/dx)² + 2(dy/dx) + 1 = 0 एक द्विघात समीकरण है।
- समीकरण का सामान्य स्वरूप F(x, y, dy/dx) = 0 है।
- यदि (dy/dx) की शक्ति n है, तो समीकरण उच्च घात का है।
- समीकरण में x, y और dy/dx के बीच संबंध होता है।
- ऐसे समीकरणों को हल करने के लिए विशेष विधियाँ अपनाई जाती हैं।
- 📌 सामान्य स्वरूप: समीकरण का वह रूप जिसमें x, y, dy/dx सम्मिलित होते हैं।
- 📌 द्विघात: समीकरण में (dy/dx) की शक्ति 2 होती है।
- 📌 घात: अवकलन की शक्ति।
5.3 समीकरण का हल
अवधारणा5.3 समीकरण का हल
इस अनुभाग में प्रथम कोटि के उच्च घात के अवकल समीकरणों को हल करने की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया गया है। ऐसे समीकरणों को हल करने के लिए समीकरण को (dy/dx) के घातों के अनुसार विभाजित किया जाता है और फिर उपयुक्त विधि जैसे चर परिवर्तन, प्रत्यक्षीकर
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Differential Equation · Vardhman Mahaveer Open University