Chapter 10
Chapter 10 — अध्ययन नोट्स
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10.1 द्वितीय कोटि के रैखिक अवकल समीकरण का परिचय
व्याख्या10.1 द्वितीय कोटि के रैखिक अवकल समीकरण का परिचय
इस अनुभाग में द्वितीय कोटि के रैखिक अवकल समीकरण का परिचय दिया गया है। द्वितीय कोटि के रैखिक अवकल समीकरण वे समीकरण होते हैं जिनमें अवकलज का अधिकतम क्रम दो होता है तथा सभी पद रैखिक होते हैं। सामान्य रूप में, ऐसे समीकरण को निम्न प्रकार लिखा जाता है: A(x) × d²y/dx² + B(x) × dy/dx + C(x) × y = F(x) यहाँ A(x), B(x), C(x) तथा F(x) x का फलन हैं, तथा y स्वतंत्र चर x का फलन है। यदि F(x) = 0 हो, तो समीकरण समगामी (homogeneous) कहलाता है, अन्यथा असमगामी (non-homogeneous)। द्वितीय कोटि के रैखिक अवकल समीकरण भौतिकी, अभियांत्रिकी, जीवविज्ञान, अर्थशास्त्र आदि में विविध प्राकृतिक घटनाओं के गणितीय मॉडल के रूप में प्रयुक्त होते हैं। उदाहरण के लिए, दोलन, विद्युत परिपथ, जनसंख्या वृद्धि, ताप का संचरण आदि। इस अनुभाग में द्वितीय कोटि के रैखिक अवकल समीकरण की विशेषताओं, सामान्य रूप, तथा इसके महत्व को विस्तार से समझाया गया है।
- द्वितीय कोटि के रैखिक अवकल समीकरण में अधिकतम अवकलज का क्रम दो होता है।
- समीकरण के सभी पद y, dy/dx, d²y/dx² के सापेक्ष रैखिक होते हैं।
- सामान्य रूप: A(x) × d²y/dx² + B(x) × dy/dx + C(x) × y = F(x)
- F(x) = 0 होने पर समीकरण समगामी कहलाता है।
- ऐसे समीकरणों का उपयोग भौतिकी, अभियांत्रिकी आदि में होता है।
- इनका हल दो भागों में विभाजित होता है: समगामी हल और विशेष हल।
- 📌 रैखिक अवकल समीकरण: जिसमें चर एवं उसके अवकलज रैखिक रूप में उपस्थित हों।
- 📌 द्वितीय कोटि: अधिकतम अवकलज का क्रम दो।
- 📌 समगामी: F(x) = 0 होने पर।
10.2 द्वितीय कोटि के रैखिक अवकल समीकरण का सामान्य रूप
अवधारणा10.2 द्वितीय कोटि के रैखिक अवकल समीकरण का सामान्य रूप
इस अनुभाग में द्वितीय कोटि के रैखिक अवकल समीकरण के सामान्य रूप को विस्तार से समझाया गया है। समीकरण को मानकीकृत करने के लिए इसे निम्न रूप में लिखा जाता है: d²y/dx² + P(x) × dy/dx + Q(x) × y = R(x) जहाँ P(x) = B(x)/A(x), Q(x) = C(x)/A(x), और R(x) = F(x)/A(x)। समीकरण के इस रूप में A(x) ≠ 0 होना चाहिए। यह मानकीकृत रूप हल की विभिन्न विधियों के लिए उपयुक्त है। यदि समीकरण पहले से इस रूप में नहीं है, तो दोनों पक्षों को A(x) से विभाजित कर इसे इस रूप में लाया जाता है। यह रूप समीकरण के गुणों को समझने, हल की विधि चुनने तथा हल की प्रक्रिया को सरल बनाने में सहायक है।
- सामान्य रूप: d²y/dx² + P(x) × dy/dx + Q(x) × y = R(x)
- P(x), Q(x), R(x) x के फलन हैं।
- A(x) ≠ 0 होना आवश्यक है।
- समीकरण को सामान्य रूप में लाने के लिए दोनों पक्षों को A(x) से विभाजित किया जाता है।
- यह रूप हल की विधियों के लिए आधार है।
- 📌 सामान्य रूप: समीकरण का मानकीकृत रूप, जिससे हल की विधि सरल होती है।
- 📌 P(x), Q(x), R(x): x के फलन, जो समीकरण के गुण निर्धारित करते हैं।
10.3 द्वितीय कोटि के समगामी रैखिक अवकल समीकरण
परिभाषा10.3 द्वितीय कोटि के समगामी रैखिक अवकल समीकरण
इस अनुभाग में समगामी द्वितीय कोटि के रैखिक अवकल समीकरण की परिभाषा, गुणधर्म एवं उदाहरण दिए गए हैं। जब R(x) = 0 हो, तो समीकरण को समगामी कहा जाता है। इसका सामान्य रूप है: d²y/dx² + P(x) × dy/dx + Q(x) × y = 0 समगामी समीकरण का हल दो स्वतंत्र हलों के रैख
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