Ch 5निःशुल्क

Soils of Rajasthan

🎓 Rajasthan General Knowledge📖 राजस्थान का भूगोल📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट

Soils of Rajasthanअध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

राजस्थान की मिट्टियों का परिचय एवं वर्गीकरण

व्याख्या

राजस्थान की मिट्टियों का परिचय एवं वर्गीकरण

राजस्थान की भौगोलिक विविधता के कारण यहाँ विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं, जो राज्य की कृषि, जलवायु, एवं पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती हैं। राज्य की कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 3.42 लाख वर्ग किमी है, जिसमें मिट्टियों का वितरण जलवायु, भू-संरचना, एवं प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है। राजस्थान की मिट्टियों का वर्गीकरण प्रमुखतः भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा किया गया है। राज्य में मुख्यतः आठ प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं: रेतीली (Marusthali), लाल-पीली, काली (कछारी), बलुई दोमट, लवणीय (सलाइन), बलुई, जलोढ़ (Alluvial), एवं पठारी मिट्टी। प्रत्येक मिट्टी की अपनी विशेषताएँ, कृषि उपयुक्तता, एवं भौगोलिक वितरण है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • राजस्थान की कुल कृषि योग्य भूमि का 70% से अधिक भाग रेतीली मिट्टी में आता है। • राज्य की मिट्टियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण 1956 में प्रारंभ हुआ। • राजस्थान में मिट्टियों का सर्वाधिक विस्तार पश्चिमी मरुस्थलीय भाग में है। • मिट्टियों के प्रकार, वितरण एवं विशेषताओं को जिलावार याद करें। • ICAR एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा निर्धारित वर्गीकरण पर विशेष ध्यान दें।

  • राज्य में कुल 8 प्रमुख प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं।
  • राजस्थान का लगभग 61% क्षेत्र रेतीली (Marusthali) मिट्टी से आच्छादित है।
  • राजस्थान की मिट्टियों का वर्गीकरण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार किया गया।
  • राजस्थान की मिट्टियाँ मुख्यतः जलवायु, स्थलाकृति एवं अपक्षय पर आधारित हैं।
  • राज्य के पूर्वी भाग में जलोढ़ एवं काली मिट्टी प्रमुख है।
  • 📌 मिट्टी (Soil): पृथ्वी की सतह की वह ऊपरी परत जिसमें खनिज, जैविक पदार्थ, जल, वायु एवं जीवाणु होते हैं।
  • 📌 वर्गीकरण (Classification): किसी वस्तु या तत्व को उसके गुणों के आधार पर समूहों में बाँटना।

रेतीली मिट्टी (Marusthali Soil)

अवधारणा

रेतीली मिट्टी (Marusthali Soil)

रेतीली मिट्टी राजस्थान के पश्चिमी भाग में विस्तृत रूप से पाई जाती है, जिसे मरुस्थलीय मिट्टी भी कहते हैं। यह मिट्टी मुख्यतः जैसलमेर, बीकानेर, चूरू, नागौर, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, एवं जोधपुर जिलों में फैली है। इसकी संरचना में 85-90% रेत, 5-10% सिल्ट एवं 2-3% द्रव्यांश होते हैं। यह मिट्टी जलधारण क्षमता में अत्यंत कम होती है, जिससे यहाँ सिंचाई के बिना कृषि कठिन होती है। यह मिट्टी क्षारीय (Alkaline) प्रकृति की भी हो सकती है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) के कारण इस क्षेत्र में कृषि विकास हुआ है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • राजस्थान का थार मरुस्थल भारत का सबसे बड़ा मरुस्थल है। • IGNP के तहत 1974 से सिंचाई प्रारंभ हुई। • रेतीली मिट्टी में बाजरा, ग्वार, मोठ, मूंग की खेती होती है। • रेतीली मिट्टी के वितरण एवं फसलें बार-बार पूछी जाती हैं। • IGNP का प्रभाव एवं संबंधित जिले याद रखें।

  • राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का लगभग 61% भाग रेतीली मिट्टी से आच्छादित।
  • 85-90% रेत, 5-10% सिल्ट, 2-3% द्रव्यांश।
  • जैसलमेर, बीकानेर, चूरू, बाड़मेर, नागौर में प्रमुखता से पाई जाती है।
  • जलधारण क्षमता कम, पोषक तत्वों की कमी।
  • IGNP के कारण कृषि योग्य भूमि में वृद्धि।
  • 📌 रेतीली मिट्टी (Sandy Soil): वह मिट्टी जिसमें रेत की मात्रा अत्यधिक होती है।
  • 📌 मरुस्थल (Desert): अत्यल्प वर्षा एवं शुष्क जलवायु वाला क्षेत्र।

लाल-पीली मिट्टी (Red-Yellow Soil)

अवधारणा

लाल-पीली मिट्टी (Red-Yellow Soil)

लाल-पीली मिट्टी राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी एवं दक्षिणी जिलों में पाई जाती है। इसका रंग लौह ऑक्साइड (Iron Oxide) की उपस्थिति के कारण लाल एवं पीला होता है। यह मिट्टी मुख्यतः अरावली पर्वतमाला के दक्षिणी एवं पूर्वी ढलानों, कोटा, बूंदी, झालावाड़, उदयपुर, ड