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Desert and Arid Zone Characteristics

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Desert and Arid Zone Characteristicsअध्ययन नोट्स

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राजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र: परिचय एवं विस्तार

व्याख्या

राजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र: परिचय एवं विस्तार

राजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र, जिसे थार मरुस्थल (Thar Desert) या भारतीय मरुस्थल भी कहा जाता है, भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है। यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के कुल मरुस्थलीय क्षेत्र का लगभग 60% भाग है। थार मरुस्थल का विस्तार पश्चिमी राजस्थान के 12 जिलों में मुख्य रूप से पाया जाता है, जिनमें जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, नागौर, जोधपुर, पाली, जालौर, हनुमानगढ़, सीकर, और झुंझुनूं शामिल हैं। मरुस्थल का कुल क्षेत्रफल लगभग 2,08,110 वर्ग किमी है, जो राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का लगभग 61% है। इस क्षेत्र की सीमाएँ पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांतों से भी लगती हैं। मरुस्थल की जलवायु, वनस्पति, मृदा, जल स्रोत, और जनजीवन की विशेषताएँ इसे अन्य क्षेत्रों से विशिष्ट बनाती हैं। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • थार मरुस्थल का विस्तार पाकिस्तान के सिंध और पंजाब तक है • राजस्थान का 61% क्षेत्र मरुस्थलीय है • भारत के मरुस्थलीय क्षेत्र का 60% राजस्थान में • थार मरुस्थल के जिलों के नाम याद रखें – अक्सर सूचीबद्ध प्रश्न आते हैं • क्षेत्रफल और प्रतिशत से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं

  • थार मरुस्थल का कुल क्षेत्रफल: लगभग 2,08,110 वर्ग किमी
  • राजस्थान के 12 जिले मुख्य रूप से मरुस्थलीय क्षेत्र में आते हैं
  • राजस्थान का 61% भाग मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित
  • भारत के कुल मरुस्थलीय क्षेत्र का 60% राजस्थान में
  • मरुस्थल की पश्चिमी सीमा पाकिस्तान से लगती है
  • 📌 मरुस्थल (Desert): वह क्षेत्र जहाँ वार्षिक वर्षा 25 से 50 सेमी से कम होती है
  • 📌 थार मरुस्थल (Thar Desert): भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा मरुस्थल

मरुस्थलीय क्षेत्र की जलवायु (Climate)

अवधारणा

मरुस्थलीय क्षेत्र की जलवायु (Climate)

राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र की जलवायु अत्यंत शुष्क (Arid) एवं विषम है। यहाँ तापमान का उतार-चढ़ाव अत्यधिक होता है – गर्मियों में तापमान 50°C तक पहुँच जाता है, जबकि सर्दियों में यह 0°C तक गिर सकता है। वर्षा अत्यंत कम (औसतन 100-300 मिमी) होती है, जो मुख्यतः मानसून के महीनों (जून-सितंबर) में ही होती है। वाष्पीकरण (Evaporation) की दर अत्यधिक है, जिससे भूमि की नमी शीघ्र समाप्त हो जाती है। यहाँ की हवाएँ तेज़ और शुष्क होती हैं, जो रेत के तूफान (Sand Storms) लाती हैं। क्षेत्र में दिन और रात के तापमान में अत्यधिक अंतर (Diurnal Range) होता है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • राजस्थान का मरुस्थल भारत का सबसे गर्म क्षेत्र है • चूरू में 50°C तापमान दर्ज (2019) • वर्षा का वितरण अत्यंत असमान • तापमान, वर्षा और वाष्पीकरण के आँकड़े याद रखें • रेत के तूफान से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं

  • गर्मी में अधिकतम तापमान: 50°C (जैसलमेर, बाड़मेर)
  • सर्दी में न्यूनतम तापमान: 0°C (चूरू, बीकानेर)
  • वार्षिक वर्षा: 100-300 मिमी
  • वाष्पीकरण की दर: 2000-2500 मिमी/वर्ष
  • रेत के तूफान प्रायः मई-जून में आते हैं
  • 📌 शुष्क जलवायु (Arid Climate): जहाँ वर्षा बहुत कम होती है
  • 📌 वाष्पीकरण (Evaporation): जल का वाष्प में बदलना

मरुस्थलीय मृदा (Desert Soils)

व्याख्या

मरुस्थलीय मृदा (Desert Soils)

राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र की मृदा मुख्यतः रेतीली (Sandy) होती है, जिसे 'मरुस्थलीय मृदा' या 'रेतीली मृदा' (Desert Soil) कहा जाता है। यह मृदा हल्की, जलधारण क्षमता में कम, जैविक पदार्थों से रहित और क्षारीय प्रवृत्ति की होती है। इसमें जल का अवशोषण और