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Rivers and Lakes of Rajasthan

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Rivers and Lakes of Rajasthanअध्ययन नोट्स

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राजस्थान की प्रमुख नदियाँ — परिचय एवं वर्गीकरण

व्याख्या

राजस्थान की प्रमुख नदियाँ — परिचय एवं वर्गीकरण

राजस्थान भौगोलिक दृष्टि से एक अर्द्ध शुष्क प्रदेश है, जहाँ जल संसाधनों की उपलब्धता सीमित है। यहाँ की नदियाँ मुख्यतः दो प्रकार की हैं — स्थायी (Perennial) और अस्थायी (Seasonal)। राजस्थान की अधिकांश नदियाँ वर्षा ऋतु में बहती हैं, जबकि कुछ नदियाँ सालभर जल प्रवाह बनाए रखती हैं। राज्य की नदियों का उद्गम स्थल मुख्यतः अरावली पर्वतमाला है, जो प्रदेश को दो जल विभाजक क्षेत्रों में बाँटती है — पूर्वी एवं पश्चिमी। पूर्वी राजस्थान की नदियाँ बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) की ओर प्रवाहित होती हैं, जबकि पश्चिमी राजस्थान की नदियाँ अंतर्देशीय (Inland Drainage) हैं, जो थार मरुस्थल (Thar Desert) में लुप्त हो जाती हैं। राजस्थान की प्रमुख नदियों में बनास, चम्बल, बाणगंगा, लूणी, सुकरी, कांतली, साबरमती आदि शामिल हैं। इन नदियों का राज्य की कृषि, सिंचाई, जल आपूर्ति एवं सांस्कृतिक जीवन में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • अरावली पर्वतमाला राजस्थान की नदियों का जल विभाजक है। • चम्बल नदी राजस्थान की सबसे लंबी नदी है — 360 किमी। • लूणी नदी पश्चिमी राजस्थान की सबसे बड़ी नदी है। • अरावली पर्वतमाला से पूर्व की नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं — अक्सर पूछा जाता है। • लूणी नदी का नाम व प्रवाह क्षेत्र याद रखें।

  • राजस्थान की कुल 13 मुख्य नदियाँ हैं।
  • अरावली पर्वतमाला, नदियों का प्रमुख जल विभाजक (Water Divide) है।
  • पूर्वी राजस्थान की नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, पश्चिमी की नदियाँ थार मरुस्थल में लुप्त होती हैं।
  • राजस्थान की सबसे लंबी नदी चम्बल (Chambal) है — 360 किमी राज्य में।
  • लूणी (Luni) पश्चिमी राजस्थान की सबसे बड़ी नदी है।
  • 📌 स्थायी नदी (Perennial River): वर्षभर जल प्रवाहित करने वाली नदी।
  • 📌 अस्थायी नदी (Seasonal River): केवल वर्षा ऋतु में जल प्रवाहित करने वाली नदी।
  • 📌 जल विभाजक (Water Divide): वह स्थल जहाँ से जल दो भिन्न दिशाओं में प्रवाहित होता है।

चम्बल नदी — उद्गम, प्रवाह एवं परियोजनाएँ

व्याख्या

चम्बल नदी — उद्गम, प्रवाह एवं परियोजनाएँ

चम्बल नदी राजस्थान की सबसे लंबी एवं महत्त्वपूर्ण नदी है, जिसका उद्गम मध्य प्रदेश के मऊ (Vindhyachal) जिले के जनपाव पर्वत से होता है। यह कोटा, बारां, बूंदी, सवाई माधोपुर, धौलपुर जिलों से होकर बहती है और उत्तर प्रदेश में यमुना नदी में मिल जाती है। चम्बल नदी की कुल लंबाई 960 किमी है, जिसमें से 360 किमी राजस्थान में प्रवाहित होती है। चम्बल नदी के किनारे कई प्रसिद्ध परियोजनाएँ एवं बाँध बने हैं, जैसे गांधी सागर बाँध (1959), राणा प्रताप सागर बाँध (1970), जवाहर सागर बाँध (1972) एवं कोटा बैराज (Kota Barrage, 1954)। चम्बल घाटी परियोजना (Chambal Valley Project) राजस्थान-मध्यप्रदेश की संयुक्त परियोजना है, जिससे सिंचाई, जल आपूर्ति एवं विद्युत उत्पादन होता है। चम्बल नदी की घाटी में गहरी खड्डें (Ravines) पाई जाती हैं, जो 'बीहड़' के नाम से जानी जाती हैं। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • चम्बल नदी राजस्थान की सबसे लंबी नदी है। • चम्बल घाटी परियोजना भारत की पहली बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं में से एक है। • कोटा बैराज 1954 में बना था। • चम्बल के सभी बाँधों के नाम, वर्ष व स्थान याद रखें। • बीहड़ किस नदी के किनारे पाई जाती हैं — अक्सर पूछा जाता है।

  • चम्बल नदी का उद्गम — जनपाव पर्वत, मऊ, मध्य प्रदेश।
  • राजस्थान में 360 किमी प्रवाह — कोटा, बारां, बूंदी, सवाई माधोपुर, धौलपुर।
  • गांधी सागर बाँध (1959), राणा प्रताप सागर बाँध (1970), जवाहर सागर बाँध (1972), कोटा बैराज (1954)।
  • चम्बल घाटी परियोजना — सिंचाई, जल आपूर्ति, विद्युत उत्पादन।
  • चम्बल घाटी में प्रसिद्ध बीहड़ (Ravines) पाई जाती हैं।
  • 📌 बैराज (Barrage): नदी पर बना बाँध, जिससे जल का प्रवाह नियंत्रित किया जाता है।
  • 📌 बीहड़ (Ravines): गहरी व संकरी घाटियाँ, चम्बल क्षेत्र में पाई जाती हैं।

लूणी नदी — पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा

व्याख्या

लूणी नदी — पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा

लूणी नदी पश्चिमी राजस्थान की सबसे बड़ी नदी है, जिसे 'मरुस्थल की जीवनरेखा' भी कहा जाता है। इसका उद्गम अजमेर जिले के नाग पहाड़ (Pushkar) से होता है। लूणी नदी का प्रवाह दक्षिण-पश्चिम दिशा में होता है, और यह नागौर, जोधपुर, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर जिलों से