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Major Industries of Rajasthan

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Major Industries of Rajasthanअध्ययन नोट्स

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राजस्थान में प्रमुख उद्योगों का ऐतिहासिक विकास

व्याख्या

राजस्थान में प्रमुख उद्योगों का ऐतिहासिक विकास

राजस्थान में उद्योगों का विकास ऐतिहासिक दृष्टि से विविध चरणों में हुआ है। प्रारंभ में यहाँ के उद्योग मुख्यतः हस्तशिल्प (Handicraft) और पारंपरिक कुटीर उद्योगों (Cottage Industries) तक सीमित थे, जैसे- वस्त्र, आभूषण, कालीन, कांच, मिट्टी के बर्तन आदि। स्वतंत्रता के बाद राज्य सरकार और केंद्र सरकार की औद्योगिक नीतियों के कारण यहाँ के उद्योगों में विविधता और विस्तार हुआ। 1960 के दशक में खनिज संसाधनों की खोज और दोहन के साथ खनन एवं खनिज आधारित उद्योगों का तीव्र विकास हुआ। इसके अलावा, जयपुर, उदयपुर, कोटा, भीलवाड़ा, पाली आदि नगरों में औद्योगिक क्षेत्रों (Industrial Areas) की स्थापना से औद्योगीकरण को बल मिला। 1991 के आर्थिक उदारीकरण के पश्चात् निजी निवेश में वृद्धि हुई और कई आधुनिक उद्योगों की स्थापना हुई। आज राजस्थान में वस्त्र, सीमेंट, खनन, रसायन, कृषि-आधारित, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग, पेट्रोकेमिकल्स आदि प्रमुख उद्योग हैं। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • राजस्थान औद्योगिक निवेश एवं आधारिक संरचना निगम (RIICO) की स्थापना 1969 में हुई। • राज्य में 2023 तक 340 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए। • राजस्थान औद्योगिक नीति 2019 लागू है। • राजस्थान में औद्योगिक विकास दर 7.5% (2022-23) रही। • RIICO की स्थापना वर्ष 1969 अवश्य याद रखें। • औद्योगिक नीति के नवीनतम वर्ष (2019) का उल्लेख करें।

  • राजस्थान में औद्योगीकरण की शुरुआत 1949 में राज्य के एकीकरण के बाद हुई।
  • 1960 के दशक में खनिज संसाधनों की खोज से खनन उद्योगों का विस्तार हुआ।
  • 1991 के बाद निजी क्षेत्र की भागीदारी से औद्योगिक विकास को गति मिली।
  • राज्य में 340 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र (RIICO द्वारा) स्थापित किए गए हैं।
  • राजस्थान की औद्योगिक नीति 2019 में संशोधित की गई।
  • 📌 हस्तशिल्प (Handicraft): हाथ से बनाए जाने वाले पारंपरिक उत्पाद
  • 📌 औद्योगीकरण (Industrialization): उद्योगों की स्थापना व विस्तार की प्रक्रिया
  • 📌 कुटीर उद्योग (Cottage Industry): पारिवारिक या छोटे स्तर पर संचालित उद्योग

राजस्थान के वस्त्र उद्योग (Textile Industry)

अवधारणा

राजस्थान के वस्त्र उद्योग (Textile Industry)

राजस्थान का वस्त्र उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ कपास, ऊन, रेशम, सूती वस्त्र, डाईंग-प्रिंटिंग (रंगाई-छपाई), बंधेज, लहरिया, साड़ी, दुपट्टा, कालीन, दरियाँ आदि के निर्माण में राज्य अग्रणी है। भीलवाड़ा, पाली, जयपुर, बाड़मेर, जोधपुर, अजमेर, चित्तौड़गढ़, सिरोही आदि प्रमुख वस्त्र उद्योग केंद्र हैं। भीलवाड़ा को 'टेक्सटाइल सिटी ऑफ इंडिया' कहा जाता है। पाली वस्त्र रंगाई-छपाई के लिए प्रसिद्ध है। जयपुर की बंधेज, सांगानेरी प्रिंट, बगरू प्रिंट, कोटा डोरिया साड़ी, बाड़मेर की अज्रक प्रिंट, जोधपुर की मोजड़ी आदि यहाँ की विशिष्टता है। वस्त्र उद्योग में लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • भीलवाड़ा को 'टेक्सटाइल सिटी ऑफ इंडिया' कहा जाता है। • कोटा डोरिया को 2012 में GI टैग मिला। • पाली वस्त्र उद्योग प्रदूषण के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2004 में नोटिस जारी हुआ था। • राजस्थान वस्त्र निर्यात में देश में अग्रणी है। • भीलवाड़ा, पाली, जयपुर — वस्त्र उद्योग के केंद्र याद रखें। • GI टैग प्राप्त उत्पाद अवश्य याद करें।

  • भीलवाड़ा में 400 से अधिक वस्त्र इकाइयाँ कार्यरत हैं।
  • पाली में वस्त्र रंगाई-छपाई (डाईंग-प्रिंटिंग) उद्योग केंद्रित है।
  • जयपुर की सांगानेरी व बगरू प्रिंट विश्वविख्यात है।
  • कोटा डोरिया साड़ी को GI टैग (2012) प्राप्त है।
  • राजस्थान में वस्त्र उद्योग में लगभग 15 लाख लोग कार्यरत हैं।
  • 📌 बंधेज (Bandhej): कपड़े की बांधकर रंगाई की पारंपरिक विधि
  • 📌 सांगानेरी प्रिंट (Sanganeri Print): जयपुर के सांगानेर क्षेत्र की ब्लॉक प्रिंटिंग कला
  • 📌 कोटा डोरिया (Kota Doria): कोटा क्षेत्र की विशिष्ट हल्की साड़ी

राजस्थान के खनन एवं खनिज आधारित उद्योग

व्याख्या

राजस्थान के खनन एवं खनिज आधारित उद्योग

राजस्थान खनिज संपदा के मामले में देश का अग्रणी राज्य है। यहाँ जिंक (Zinc), लेड (Lead), तांबा (Copper), फेल्स्पार, जिप्सम, चूना पत्थर (Limestone), संगमरमर (Marble), ग्रेनाइट, फॉस्फेट, अभ्रक (Mica), टंगस्टन, सिलिका सैंड आदि के विशाल भंडार हैं। राज्य मे