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Rajasthan and Environment/Ecology

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Rajasthan and Environment/Ecologyअध्ययन नोट्स

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राजस्थान का भौतिक स्वरूप (Physical Features of Rajasthan)

व्याख्या

राजस्थान का भौतिक स्वरूप (Physical Features of Rajasthan)

राजस्थान का भौतिक स्वरूप विविधतापूर्ण है, जिसमें मरुस्थल, पठार, पर्वत, मैदान एवं जलोढ़ क्षेत्र सम्मिलित हैं। राज्य का पश्चिमी भाग थार मरुस्थल (Thar Desert) के अंतर्गत आता है, जो भारत का सबसे बड़ा मरुस्थल है। अरावली पर्वतमाला (Aravalli Range) राज्य को दो भागों में बाँटती है—पूर्वी एवं पश्चिमी राजस्थान। अरावली की सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर (Mount Abu) है, जिसकी ऊँचाई 1722 मीटर है। पूर्वी राजस्थान में उपजाऊ मैदान, जबकि दक्षिणी भाग में मेवाड़ का पठार (Mewar Plateau) स्थित है। राज्य के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में हाड़ौती का पठार (Hadoti Plateau) है, जो चंबल नदी के बेसिन में फैला है। राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी भाग में रेतीले टिब्बे (Sand Dunes) पाए जाते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'धोरी' कहा जाता है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • अरावली पर्वतमाला की औसत ऊँचाई 350-900 मीटर के बीच। • थार मरुस्थल में वार्षिक वर्षा 100-500 मिमी। • राजस्थान का कुल क्षेत्रफल—3,42,239 वर्ग किमी (भारत का सबसे बड़ा राज्य)। • अरावली पर्वतमाला राज्य को दो भागों में बाँटती है—यह प्रश्न अक्सर पूँछा जाता है। • गुरु शिखर की ऊँचाई और स्थान याद रखें। • थार मरुस्थल किन जिलों में फैला है, यह जानना आवश्यक है।

  • अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है—लंबाई लगभग 692 किमी।
  • गुरु शिखर (माउंट आबू, सिरोही) राजस्थान की सबसे ऊँची चोटी—1722 मीटर।
  • थार मरुस्थल (Thar Desert) का विस्तार लगभग 2.08 लाख वर्ग किमी।
  • हाड़ौती का पठार कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़ जिलों में फैला है।
  • मरुस्थलीय क्षेत्र में 'धोरी' (sand dunes) प्रमुख स्थलाकृति है।
  • 📌 अरावली पर्वतमाला: भारत की प्राचीन पर्वतमाला, दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में फैली।
  • 📌 थार मरुस्थल: भारत का सबसे बड़ा मरुस्थल, राजस्थान के पश्चिमी भाग में।
  • 📌 गुरु शिखर: अरावली की सर्वोच्च चोटी।

राजस्थान की जलवायु (Climate of Rajasthan)

व्याख्या

राजस्थान की जलवायु (Climate of Rajasthan)

राजस्थान की जलवायु (Climate) अत्यंत विविधतापूर्ण एवं मुख्यतः शुष्क (Arid) है। राज्य का अधिकांश भाग मरुस्थलीय है, जहाँ वर्षा अत्यल्प (100-500 मिमी) होती है। राज्य में तीन प्रमुख ऋतुएँ होती हैं—ग्रीष्म (मार्च-जून), वर्षा (जुलाई-सितंबर) एवं शीत (अक्टूबर-फरवरी)। ग्रीष्म ऋतु में तापमान 45-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है, विशेषकर जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर में। शीत ऋतु में चूरू, सीकर, झुंझुनूं आदि जिलों में न्यूनतम तापमान शून्य के आसपास चला जाता है। राजस्थान में मानसून मुख्यतः दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के कारण आता है, लेकिन अरावली पर्वतमाला के कारण वर्षा का वितरण असमान है। पश्चिमी राजस्थान में वर्षा न्यूनतम, जबकि दक्षिण-पूर्वी जिलों (जैसे झालावाड़, कोटा, बांसवाड़ा) में अधिकतम होती है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • राजस्थान का 61% क्षेत्र शुष्क जलवायु के अंतर्गत आता है। • अरावली पर्वतमाला के पश्चिमी भाग में वर्षा न्यूनतम। • राज्य का 9% क्षेत्र अर्ध-शुष्क जलवायु में। • राज्य का सबसे गर्म स्थान—फालौदी, सबसे ठंडा—चूरू, यह बार-बार पूछा जाता है। • अरावली के पूर्व और पश्चिम में वर्षा वितरण याद रखें। • मानसून के आगमन और वापसी की तिथियाँ ध्यान रखें।

  • राज्य का औसत वार्षिक वर्षा—531 मिमी।
  • ज्यादा वर्षा वाला जिला—बांसवाड़ा (1000 मिमी से अधिक)।
  • सबसे कम वर्षा—जैसलमेर (100 मिमी से भी कम)।
  • ग्रीष्म में अधिकतम तापमान—फालौदी (50.7°C, 2016 में रिकॉर्ड)।
  • शीत में न्यूनतम तापमान—चूरू (-4.4°C, 2011 में रिकॉर्ड)।
  • 📌 शुष्क जलवायु: वह जलवायु जिसमें वर्षा अत्यल्प हो।
  • 📌 मानसून: दक्षिण-पश्चिमी हवाओं द्वारा लाया गया वर्षा ऋतु।
  • 📌 अर्ध-शुष्क: जहाँ वर्षा 500-900 मिमी के बीच हो।

राजस्थान की नदियाँ एवं जलस्रोत (Rivers and Water Resources)

व्याख्या

राजस्थान की नदियाँ एवं जलस्रोत (Rivers and Water Resources)

राजस्थान में नदियों का जाल सघन नहीं है, क्योंकि अधिकांश क्षेत्र शुष्क एवं मरुस्थलीय है। यहाँ की प्रमुख नदियाँ दो वर्गों में बाँटी जाती हैं—स्थायी (Perennial) एवं अस्थायी (Seasonal)। चंबल, बनास, माही, कालीसिंध, परवन, पार्वती आदि स्थायी नदियाँ हैं, जबक