Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
इस अध्याय की शुरुआत व्यवहारवाद एवं उत्तर व्यवहारवाद की अवधारणा के परिचय से होती है। व्यवहारवाद (Behaviouralism) 20वीं सदी के मध्य में राजनीतिक विज्ञान में एक नई प्रवृत्ति के रूप में उभरा, जिसमें वैज्ञानिक विधियों, तर्क और अनुभवजन्य अनुसंधान पर जोर दिया गया। यह परंपरागत राजनीतिक अध्ययन की आलोचना करता है और राजनीति को एक विज्ञान के रूप में देखने की बात करता है। उत्तर व्यवहारवाद (Post-Behaviouralism) व्यवहारवाद की सीमाओं को पहचानते हुए, सामाजिक प्रासंगिकता, मूल्यों और मानव कल्याण को केंद्र में रखता है। इस अध्याय में दोनों प्रवृत्तियों के विकास, विशेषताओं, आलोचनाओं और महत्व को विस्तार से समझाया गया है।
- व्यवहारवाद राजनीतिक विज्ञान में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की शुरुआत है।
- उत्तर व्यवहारवाद ने व्यवहारवाद की सीमाओं को उजागर किया।
- दोनों प्रवृत्तियों ने राजनीतिक अध्ययन की दिशा बदली।
- परंपरागत अध्ययन से आधुनिक अध्ययन की ओर संक्रमण हुआ।
- इस अध्याय में दोनों प्रवृत्तियों की तुलना की गई है।
- 📌 व्यवहारवाद: राजनीतिक अध्ययन में वैज्ञानिक विधि का प्रयोग।
- 📌 उत्तर व्यवहारवाद: सामाजिक प्रासंगिकता और मूल्यों पर आधारित अध्ययन।
व्यवहारवाद : ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
व्याख्याव्यवहारवाद : ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
व्यवहारवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में यह बताया गया है कि यह प्रवृत्ति अमेरिका में 1920 के दशक में प्रारंभ हुई और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इसका व्यापक प्रभाव पड़ा। राजनीतिक विज्ञान के अध्ययन में परंपरागत विधियों की आलोचना करते हुए, व्यवहारवादियों ने अनुभवजन्य, वैज्ञानिक और सांख्यिकीय विधियों को अपनाया। चार्ल्स मेरियम, डेविड ईस्टन, हेरोल्ड लासवेल आदि प्रमुख व्यवहारवादी विचारक थे। व्यवहारवाद का विकास सामाजिक विज्ञानों में वैज्ञानिकता लाने के प्रयास से जुड़ा था।
- व्यवहारवाद का उद्भव अमेरिका में हुआ।
- चार्ल्स मेरियम, डेविड ईस्टन आदि प्रमुख विचारक।
- अनुभवजन्य और सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग।
- परंपरागत अध्ययन की आलोचना।
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद व्यापक प्रभाव।
- 📌 अनुभवजन्य: प्रत्यक्ष अनुभव और आंकड़ों पर आधारित।
- 📌 सांख्यिकीय विधि: आंकड़ों का गणितीय विश्लेषण।
व्यवहारवाद की प्रमुख विशेषताएँ
अवधारणाव्यवहारवाद की प्रमुख विशेषताएँ
व्यवहारवाद की प्रमुख विशेषताओं में वैज्ञानिकता, अनुभवजन्यता, सांख्यिकीय विधि, मूल्य-निरपेक्षता, और राजनीति को एक विज्ञान के रूप में देखने का दृष्टिकोण शामिल है। व्यवहारवादियों ने राजनीतिक संस्थाओं के बजाय राजनीतिक व्यवहार, क्रियाकलापों और प्रक्रियाओं
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Foundation of Political Science · Vardhman Mahaveer Open University
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