Chapter 13
Chapter 13 — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
इस खंड में न्यायवाद (Justification) और अराजकतावाद (Anarchism) के मूल विचारों का परिचय प्रस्तुत किया गया है। न्यायवाद वह विचारधारा है जो समाज में न्याय की स्थापना को सर्वोपरि मानती है और राज्य की आवश्यकता को न्याय के संदर्भ में देखती है। इसके विपरीत, अराजकतावाद राज्य की अनावश्यकता और हानिकारकता पर बल देता है। इस अध्याय में दोनों विचारधाराओं की उत्पत्ति, विकास, प्रमुख सिद्धांतकारों के विचार और इनके समाज पर प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। न्यायवाद और अराजकतावाद दोनों ही राजनीतिक सिद्धांत के महत्वपूर्ण अंग हैं, जो समाज, राज्य और व्यक्ति के संबंधों को समझने में सहायता करते हैं।
- न्यायवाद और अराजकतावाद राजनीतिक सिद्धांत के दो प्रमुख विचार हैं।
- न्यायवाद समाज में न्याय की स्थापना को केंद्र में रखता है।
- अराजकतावाद राज्य की आवश्यकता को नकारता है।
- दोनों विचारधाराएँ समाज, राज्य और व्यक्ति के संबंधों को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखती हैं।
- इन विचारों का अध्ययन राजनीतिक विज्ञान की समझ को गहरा करता है।
- 📌 न्यायवाद: वह विचारधारा जो समाज में न्याय की स्थापना को सर्वोपरि मानती है।
- 📌 अराजकतावाद: वह विचारधारा जो राज्य की अनावश्यकता और हानिकारकता पर बल देती है।
न्यायवाद की अवधारणा
अवधारणान्यायवाद की अवधारणा
न्यायवाद का तात्पर्य उस विचारधारा से है जिसमें राज्य का मुख्य उद्देश्य समाज में न्याय की स्थापना करना है। न्यायवाद के अनुसार, राज्य का अस्तित्व तभी उचित है जब वह अपने नागरिकों के लिए न्याय सुनिश्चित करे। न्याय का अर्थ केवल विधिक न्याय नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय भी है। प्लेटो, अरस्तू, रूसो, लॉक, कांट, रॉल्स आदि विचारकों ने न्याय की विभिन्न व्याख्याएँ प्रस्तुत की हैं। प्लेटो के अनुसार, न्याय प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्यों का पालन करना है। अरस्तू ने न्याय को समानता और अनुपात के सिद्धांत से जोड़ा। आधुनिक युग में जॉन रॉल्स ने न्याय को 'न्याय का सिद्धांत' (Theory of Justice) के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें समान अवसर और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण पर बल दिया गया। न्यायवाद राज्य की भूमिका को सकारात्मक मानता है और मानता है कि राज्य के बिना समाज में न्याय की स्थापना संभव नहीं है।
- न्यायवाद राज्य के अस्तित्व को न्याय की स्थापना से जोड़ता है।
- न्याय का अर्थ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय है।
- प्लेटो, अरस्तू, रॉल्स आदि ने न्याय की विभिन्न व्याख्याएँ दी हैं।
- आधुनिक न्यायवाद समान अवसर और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण पर बल देता है।
- राज्य की सकारात्मक भूमिका को स्वीकार किया गया है।
- 📌 न्याय: प्रत्येक को उसका उचित अधिकार देना।
- 📌 समानता: सभी को समान अवसर और अधिकार देना।
न्यायवाद के प्रकार
व्याख्यान्यायवाद के प्रकार
न्यायवाद के मुख्यतः तीन प्रकार माने जाते हैं: विधिक न्यायवाद, सामाजिक न्यायवाद और आर्थिक न्यायवाद। विधिक न्यायवाद का अर्थ है कि राज्य के सभी नागरिकों के लिए समान कानून और उसके समक्ष समानता हो। सामाजिक न्यायवाद समाज में सभी वर्गों के लिए समान अवसर और
SLM - Foundation of Political Science (Hindi) के सभी 16 अध्याय
Foundation of Political Science · Vardhman Mahaveer Open University
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