Ch 11निःशुल्क

Chapter 11

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Foundation of Political Science (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट
Chapter 10अध्याय 11 / 16Chapter 12

Chapter 11अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में विधि का शासन (Rule of Law) और संविधानवाद (Constitutionalism) की अवधारणा का परिचय दिया गया है। विधि का शासन का तात्पर्य है कि राज्य में शासन विधि के अनुसार ही चलेगा, न कि किसी व्यक्ति या समूह की मनमानी से। संविधानवाद का अर्थ है कि राज्य की शक्ति सीमित हो और वह संविधान के अधीन हो। दोनों ही अवधारणाएँ आधुनिक लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के मूल स्तंभ हैं। इस भाग में बताया गया है कि कैसे विधि का शासन व्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और न्याय की रक्षा करता है। साथ ही, संविधानवाद यह सुनिश्चित करता है कि सरकार की सभी क्रियाएँ संविधान के अनुरूप हों। यह अनुभाग विधि का शासन और संविधानवाद के ऐतिहासिक विकास, उनके महत्व और भारतीय संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता को स्पष्ट करता है।

  • विधि का शासन का अर्थ है – कानून के अनुसार शासन।
  • संविधानवाद का उद्देश्य सरकार की शक्ति को सीमित करना है।
  • दोनों अवधारणाएँ नागरिक अधिकारों की रक्षा करती हैं।
  • भारतीय संविधान में विधि का शासन और संविधानवाद दोनों के तत्व निहित हैं।
  • इन सिद्धांतों का विकास ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों में हुआ।
  • इनका पालन लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
  • 📌 विधि का शासन: राज्य में कानून सर्वोच्च है, न कि व्यक्ति।
  • 📌 संविधानवाद: सरकार की शक्ति संविधान द्वारा सीमित और नियंत्रित होती है।

विधि का शासन: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

व्याख्या

विधि का शासन: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इस अनुभाग में विधि का शासन की ऐतिहासिक उत्पत्ति और विकास का वर्णन किया गया है। विधि का शासन की अवधारणा सबसे पहले इंग्लैंड में विकसित हुई, जहाँ एडवर्ड कोक और बाद में ए. वी. डाइस़ी ने इसे स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया। डाइस़ी के अनुसार, विधि का शासन के तीन मुख्य तत्व हैं: (1) कानून की सर्वोच्चता, (2) सभी व्यक्तियों की कानून के समक्ष समानता, (3) संविधान व्यक्तिगत अधिकारों का परिणाम है। ब्रिटेन में मैग्ना कार्टा (1215) के माध्यम से राजा की शक्ति को सीमित किया गया और कानून को सर्वोच्चता दी गई। फ्रांस, अमेरिका और अन्य देशों में भी विधि का शासन धीरे-धीरे विकसित हुआ। भारत में भी ब्रिटिश शासन के दौरान विधि का शासन की अवधारणा आई और स्वतंत्रता के बाद इसे संविधान में समाहित किया गया।

  • विधि का शासन की अवधारणा इंग्लैंड में विकसित हुई।
  • ए. वी. डाइस़ी ने इसके तीन मुख्य तत्व बताए।
  • मैग्ना कार्टा (1215) विधि का शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
  • फ्रांस और अमेरिका में भी यह सिद्धांत अपनाया गया।
  • भारत में विधि का शासन संविधान का मूल तत्व है।
  • यह नागरिक स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देता है।
  • 📌 ए. वी. डाइस़ी: विधि का शासन के प्रमुख विचारक।
  • 📌 मैग्ना कार्टा: 1215 में इंग्लैंड में जारी चार्टर, जिसने राजा की शक्ति सीमित की।

विधि का शासन के प्रमुख तत्व

अवधारणा

विधि का शासन के प्रमुख तत्व

इस अनुभाग में विधि का शासन के मुख्य तत्वों का विस्तार से विश्लेषण किया गया है। डाइस़ी के अनुसार, विधि का शासन के तीन प्रमुख तत्व हैं: (1) कानून की सर्वोच्चता – कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, (2) कानून के समक्ष समानता – सभी नागरिक, चाहे वे सामान