Chapter 12
Chapter 12 — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
यह अनुभाग तत्त्वनिष्ठता के सिद्धांत अध्याय का आरंभिक भाग है, जिसमें तत्त्वनिष्ठता (Ethics) की अवधारणा, उसकी आवश्यकता और राजनीति विज्ञान में उसकी भूमिका को स्पष्ट किया गया है। तत्त्वनिष्ठता का अर्थ है—नैतिक मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों के प्रति निष्ठावान रहना। राजनीति विज्ञान में तत्त्वनिष्ठता का महत्व इसलिए है क्योंकि यह समाज में न्याय, समानता, स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा करने में सहायक होती है। इस खंड में तत्त्वनिष्ठता के ऐतिहासिक विकास, उसके प्रमुख विचारकों तथा उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला गया है। तत्त्वनिष्ठता केवल व्यक्तिगत गुण नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक जीवन में भी अत्यंत आवश्यक है। यह समाज के नियमों, कानूनों और नीतियों की नींव है। बिना तत्त्वनिष्ठता के, कोई भी समाज या शासन व्यवस्था स्थिर और न्यायपूर्ण नहीं रह सकती। इस खंड में यह भी बताया गया है कि तत्त्वनिष्ठता का पालन केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में भी किया जाना चाहिए।
- तत्त्वनिष्ठता का अर्थ नैतिक मूल्यों के प्रति निष्ठा है।
- राजनीति विज्ञान में तत्त्वनिष्ठता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह समाज में न्याय, समानता और स्वतंत्रता की रक्षा करती है।
- तत्त्वनिष्ठता का पालन व्यक्तिगत और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर आवश्यक है।
- तत्त्वनिष्ठता के बिना कोई भी समाज स्थिर नहीं रह सकता।
- 📌 तत्त्वनिष्ठता: नैतिक मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों के प्रति निष्ठा।
- 📌 नैतिकता: सही और गलत के बीच भेद करने की क्षमता।
तत्त्वनिष्ठता के सिद्धांत
अवधारणातत्त्वनिष्ठता के सिद्धांत
इस अनुभाग में तत्त्वनिष्ठता के प्रमुख सिद्धांतों की चर्चा की गई है। तत्त्वनिष्ठता के सिद्धांत वे आधार हैं, जिनके माध्यम से हम यह निर्धारित करते हैं कि कोई कार्य नैतिक है या अनैतिक। मुख्यतः तीन प्रमुख सिद्धांतों का उल्लेख किया गया है: कर्तव्य सिद्धांत (Deontological Theory), परिणामवाद (Consequentialism), और सद्गुण सिद्धांत (Virtue Theory)। कर्तव्य सिद्धांत के अनुसार, किसी कार्य की नैतिकता उसके परिणाम पर नहीं, बल्कि उस कार्य के पीछे छिपे कर्तव्य पर निर्भर करती है। परिणामवाद के अनुसार, किसी कार्य की नैतिकता उसके परिणामों से निर्धारित होती है—यदि परिणाम अच्छे हैं तो कार्य नैतिक है। सद्गुण सिद्धांत के अनुसार, नैतिकता व्यक्ति के चरित्र और सद्गुणों पर निर्भर करती है। इन सिद्धांतों के माध्यम से समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना होती है और व्यक्ति को सही-गलत का निर्णय करने में सहायता मिलती है।
- तत्त्वनिष्ठता के तीन प्रमुख सिद्धांत हैं: कर्तव्य सिद्धांत, परिणामवाद, और सद्गुण सिद्धांत।
- कर्तव्य सिद्धांत कार्य के पीछे छिपे कर्तव्य पर बल देता है।
- परिणामवाद कार्य के परिणामों को प्राथमिकता देता है।
- सद्गुण सिद्धांत व्यक्ति के चरित्र और गुणों पर आधारित है।
- इन सिद्धांतों से नैतिक निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
- 📌 कर्तव्य सिद्धांत: कार्य की नैतिकता कर्तव्य पर आधारित।
- 📌 परिणामवाद: कार्य की नैतिकता परिणामों पर आधारित।
- 📌 सद्गुण सिद्धांत: नैतिकता व्यक्ति के गुणों पर आधारित।
कर्तव्य सिद्धांत
व्याख्याकर्तव्य सिद्धांत
इस खंड में कर्तव्य सिद्धांत (Deontological Theory) की गहराई से व्याख्या की गई है। कर्तव्य सिद्धांत के अनुसार, किसी कार्य की नैतिकता उसके परिणामों पर नहीं, बल्कि उस कार्य के पीछे छिपे कर्तव्य या नियम पर निर्भर करती है। इमैनुएल कांट (Immanuel Kant) इस
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Foundation of Political Science · Vardhman Mahaveer Open University
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