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Chapter 16

🎓 Class 12📖 Antra📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 15अध्याय 16 / 17Chapter 17

Chapter 16अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

भीष्म साहनी

व्याख्या

भीष्म साहनी

भीष्म साहनी का जन्म 1915 में रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर हुई। उन्होंने उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं का अध्ययन स्कूल में किया। आगे चलकर उन्होंने गवर्नमेंट कालेज, लाहौर से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की और पंजाब विश्वविद्यालय से पी.एच.डी. की उपाधि हासिल की। विभाजन से पहले वे व्यापार के साथ-साथ मानद अध्यापन का कार्य भी करते थे। विभाजन के बाद उन्होंने प्रतिकारिता और इप्टा नाटक मंडली में काम किया तथा मुंबई में बेरोजगार भी रहे। बाद में वे अंबाला के एक कॉलेज और खालसा कॉलेज, अमृतसर में अध्यापन से जुड़े। अंततः दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज में स्थायी रूप से साहित्य का अध्यापन किया। भीष्म साहनी ने लगभग सात वर्ष रूस में विदेशी भाषा प्रकाशन गृह मास्को में अनुवादक के पद पर कार्य किया। वहां उन्होंने रूसी भाषा का अध्ययन किया और लगभग दो दर्जन रूसी पुस्तकों का अनुवाद किया। इसके अतिरिक्त वे लगभग ढाई वर्षों तक 'नई कहानियाँ' पत्रिका के कुशल संपादक भी रहे। वे प्रगतिशील लेखक संघ और अफ्रो-एशियाई लेखक संघ से भी जुड़े रहे। उनकी प्रमुख कृतियों में 'भाग्यरेखा', 'पहला पाठ', 'भटकती राख', 'पटरियाँ', 'वाङ्चू', 'शोभायात्रा', 'निशाचर', 'पाली', 'डायन' (कहानी संग्रह), 'झरोखे', 'कड़ियाँ', 'तमस', 'बसंती', 'मध्यादास की माड़ी', 'कुंतो', 'नीलू नीलिमा नीलोफर' (उपन्यास), 'माधवी', 'हानूश', 'कबिरा खड़ा बजार में', 'मुआवजे' (नाटक), 'गुलेल का खेल' (बालोपयोगी कहानियाँ) आदि शामिल हैं। उनके उपन्यास 'तमस' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हिंदी अकादमी, दिल्ली ने उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें शालाका सम्मान दिया। उनकी भाषा में उर्दू शब्दों का प्रयोग विषय को आत्मीयता प्रदान करता है। उनकी भाषा-शैली में पंजाबी भाषा की सांधी महक भी महसूस की जा सकती है। साहनी जी छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग करके विषय को प्रभावी और रोचक बनाते हैं। संवादों का प्रयोग वर्णन में ताजगी लाता है।

  • भीष्म साहनी का जन्म 1915 में रावलपिंडी में हुआ।
  • उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. और पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
  • रूस में अनुवादक के रूप में कार्य किया और रूसी पुस्तकों का अनुवाद किया।
  • प्रगतिशील लेखक संघ और अफ्रो-एशियाई लेखक संघ से जुड़े रहे।
  • उनकी प्रमुख कृतियों में 'तमस' उपन्यास शामिल है, जिसके लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
  • उनकी भाषा शैली में उर्दू और पंजाबी का प्रभाव स्पष्ट है।
  • 📌 पी.एच.डी.: डॉक्टरेट की उच्चतम शैक्षणिक उपाधि।
  • 📌 प्रगतिशील लेखक संघ: साहित्यिक संगठन जो सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर कार्य करता है।
  • 📌 साहित्य अकादमी पुरस्कार: भारत सरकार द्वारा साहित्य में उत्कृष्टता के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार।

गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफात

व्याख्या

गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफात

यह पाठ भीष्म साहनी की आत्मकथा 'आज के अतीत' का एक अंश है, जिसमें उन्होंने अपने किशोरावस्था से प्रौढ़ावस्था तक के अनुभवों को स्मृति के आधार पर प्रस्तुत किया है। इस संस्मरण में गांधी जी, जवाहरलाल नेहरू और यास्सेर अराफात के साथ बिताए गए क्षणों को प्रभावशाली शब्द चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। लेखक ने सेवाग्राम में गांधी जी के साथ बिताए अनुभवों का वर्णन किया है, जहाँ उन्होंने गांधी जी के सान्निध्य में रहकर उनके सरल और मानवीय स्वभाव को करीब से जाना। इसके बाद काश्मीर में नेहरू जी के साथ उनके स्वागत और बातचीत का उल्लेख है। अंत में ट्यूनिस में यास्सेर अराफात के साथ लेखक के भेंट और बातचीत का वर्णन है, जो अंतरराष्ट्रीय मैत्री और देशभक्ति के भावों को उजागर करता है। यह संस्मरण न केवल लेखक के व्यक्तित्व को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्रीयता, देशप्रेम और अंतरराष्ट्रीय भाईचारे जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करता है। लेखक ने अपने अनुभवों को रोचक, सरस और पठनीय शैली में प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक सहजता से जुड़ पाते हैं।

  • यह पाठ भीष्म साहनी की आत्मकथा 'आज के अतीत' का हिस्सा है।
  • लेखक ने गांधी, नेहरू और अराफात के साथ अपने अनुभव साझा किए हैं।
  • सेवाग्राम में गांधी जी के साथ बिताए गए क्षणों का वर्णन है।
  • काश्मीर में नेहरू जी के स्वागत और बातचीत का उल्लेख है।
  • ट्यूनिस में यास्सेर अराफात के साथ भेंट और संवाद का वर्णन है।
  • राष्ट्रीयता, देशप्रेम और अंतरराष्ट्रीय मैत्री के विषयों को उजागर किया गया है।
  • 📌 आत्मकथा: स्वयं के जीवन के अनुभवों का लेखन।
  • 📌 राष्ट्रीयता: अपने देश के प्रति प्रेम और समर्पण।
  • 📌 अंतरराष्ट्रीय मैत्री: विभिन्न देशों के बीच मित्रता और सहयोग।

सेवाग्राम में गांधी जी के साथ अनुभव

व्याख्या

सेवाग्राम में गांधी जी के साथ अनुभव

लेखक ने अपने भाई बलराज के पास सेवाग्राम जाने का वर्णन किया है, जहाँ वे 'नई तालीम' पत्रिका के सह-संपादक थे। यह 1938 की बात है, जब कांग्रेस का हरिपुरा अधिवेशन हुआ था। लेखक ने वर्धा स्टेशन से सेवाग्राम तक की यात्रा का अनुभव साझा किया, जिसमें कच्ची सड़क

अभ्यास प्रश्नChapter 16

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.‘,गांधी नेहरू,यास्सेर अराफ़ात’ भीष्म साहनी के किस रचना का अंश है?
A.आज के अतीत
B.गुलेल का खेल
C.नीलू,नीलिमा,नीलोफर
D.पहला पाठ

उत्तर:

आज के अतीत

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Q2.‘ हानूश’ किस विधा की रचना है?
A.कहानी
B.कविता
C.उपन्यास
D.नाटक

उत्तर:

उपन्यास

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Q3.भीष्म साहनी के किस उपन्यास को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है?
A.झरोखे
B.तमस
C.बसंती
D.माधवी

उत्तर:

तमस

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Q4.गांधीजी से लेखक की मुलाक़ात कहाँ हुई थी ?
A.सेवाग्राम
B.शिमला
C.कश्मीर
D.वर्धा

उत्तर:

सेवाग्राम

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Q5.बलराज साहनी सेवाग्राम में किस पत्रिका के सह-संपादक थे?
A.नई शिक्षा
B.नई तालीम
C.नई धारा
D.नई रोशनी

उत्तर:

नई तालीम

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Q6.खाने की टेबल पर जवाहरलाल नेहरू ने किसकी कहानी सुनाई थी?
A.प्रेमचंद
B.अंतोन चेखव
C.मोपांशा
D.अनातोले फ्रांस

उत्तर:

अनातोले फ्रांस

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Q7.1. पाठ के आधार पर हर की पौड़ी पर होने वाली गंगा जी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर:

हर की पौड़ी पर गंगा जी की आरती का वर्णन करते हुए कहा जा सकता है कि यह एक अत्यंत पावन और मनोहर दृश्य होता है। आरती के समय दीपों की रोशनी गंगा के जल पर चमकती है, और भक्तजन श्रद्धा से भरे मन से गंगा माता की स्तुति करते हैं। आरती की ध्वनि, घंटियों की झंकार, और भजन की मधुरता वातावरण को आध्यात्मिक बना देती है। यह आरती न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि गंगा के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक भी है।

व्याख्या:

इस प्रश्न में भावपूर्ण वर्णन की अपेक्षा है। इसलिए, पाठ में वर्णित हर की पौड़ी की आरती के दृश्य, वातावरण, श्रद्धालुओं की भावनाएँ, और गंगा के प्रति आस्था को अपने शब्दों में विस्तार से प्रस्तुत करना चाहिए।

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Q8.2. ‘गंगापुत्र के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है’—इस कथन के आधार पर गंगा पुत्रों के जीवन-परिवेश की चर्चा कीजिए।

उत्तर:

गंगा पुत्रों के जीवन-परिवेश में गंगा नदी का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। गंगा मैया उनके लिए न केवल जल का स्रोत है, बल्कि जीवन जीने का आधार भी है। उनकी आजीविका गंगा से जुड़ी हुई है, जैसे मछली पकड़ना, घाटों पर पूजा-अर्चना करना, और तीर्थयात्रियों की सेवा करना। गंगा के किनारे बसे ये लोग नदी के प्रति गहरा सम्मान और श्रद्धा रखते हैं। उनकी संस्कृति, रीति-रिवाज और जीवनशैली गंगा के प्रवाह के साथ जुड़ी हुई है। इसलिए कहा जाता है कि गंगा पुत्रों के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है।

व्याख्या:

इस प्रश्न में गंगा पुत्रों के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझना और गंगा नदी के महत्व को उनके जीवन में स्पष्ट करना आवश्यक है।

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