NCERTCh 4निःशुल्क

Chapter 4

🎓 Class 12📖 Antra📖 5 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~8 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 17Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 5 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

घनानंद

व्याख्या

घनानंद

घनानंद (सन् 1673-1760) रीतिकाल के प्रमुख कवि हैं, जो रीतिमुक्त या स्वच्छंद काव्यधारा के प्रतिनिधि माने जाते हैं। वे दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह के मीर मुंशी थे। उनकी जीवन-यात्रा में प्रेम की गहरी पीड़ा और वियोग की व्यथा प्रमुख थी। कहा जाता है कि उनका प्रेम सुजान नामक स्त्री से था, जिसके कारण वे बादशाह के दरबार में बे-अदबी कर बैठे। इससे नाराज होकर बादशाह ने उन्हें दरबार से निकाल दिया। सुजान की बेवफ़ाई ने उन्हें और अधिक दुखी कर दिया। अंततः वे वृंदावन चले गए और निंबार्क संप्रदाय में दीक्षित होकर भक्त के रूप में जीवन-निर्वाह करने लगे। परंतु वे सुजान को भूल नहीं पाए और अपनी काव्य रचनाओं में सुजान के नाम का प्रतीकात्मक प्रयोग करते हुए प्रेम की पीड़ा को अभिव्यक्त करते रहे। घनानंद की रचनाओं में प्रेम का अत्यंत गंभीर, निर्मल, आवेगमय और व्याकुल कर देने वाला रूप देखने को मिलता है। इसीलिए उन्हें साक्षात रसमूर्ति कहा गया है। उनकी कविता में भाव की गहराई के साथ-साथ कला की बारीकी भी है। वे लाक्षणिकता, वक्रोक्ति, वाग्विदग्धता और अलंकारों के कुशल प्रयोग में निपुण थे। उनकी भाषा परिष्कृत और साहित्यिक ब्रजभाषा है, जिसमें कोमलता और मधुरता का चरम विकास हुआ है। वे ब्रजभाषा के प्रवीण कवि ही नहीं, बल्कि सर्जनात्मक काव्यभाषा के प्रणेता भी थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में सुजान सागर, विरह लीला, कृपाकंड निबंध, रसकेलि वल्ली आदि शामिल हैं। प्रस्तुत पुस्तक में घनानंद के दो कवित्त दिए गए हैं, जिनमें उन्होंने अपनी प्रेमिका सुजान के दर्शन की अभिलाषा प्रकट की है। वे कहते हैं कि सुजान के दर्शन के लिए ही ये प्राण अब तक अटके हुए हैं।

  • घनानंद रीतिकाल के रीतिमुक्त कवि थे।
  • वे मुहम्मद शाह के मीर मुंशी थे।
  • उनका प्रेम सुजान नामक स्त्री से था।
  • सुजान की बेवफ़ाई और बादशाह की नाराजगी से वे वृंदावन चले गए।
  • उनकी भाषा परिष्कृत ब्रजभाषा है।
  • उनकी कविता में प्रेम की गहरी पीड़ा और व्याकुलता व्यक्त होती है।
  • 📌 रीतिकाल - हिंदी साहित्य का वह काल जिसमें काव्य में शास्त्रीय नियमों का पालन होता है।
  • 📌 मीर मुंशी - बादशाह के दरबार में एक प्रकार का सचिव या अधिकारी।
  • 📌 ब्रजभाषा - हिंदी की एक प्राचीन बोली, जिसका प्रयोग काव्य में हुआ।

कवित्त (1)

व्याख्या

कवित्त (1)

घनानंद का पहला कवित्त प्रेम की व्यथा और वियोग की पीड़ा को अभिव्यक्त करता है। इसमें कवि ने बताया है कि वे बहुत दिनों से अपने प्रियतम सुजान से दूर हैं। उनके मन में प्रेम की गहराई और विरह की वेदना व्याप्त है। कवि कहता है कि आस-पास की अवधि (समय) बहुत लंबी हो गई है, और अरबर (अंधकार) उनके जीवन को घेर चुका है। वे बार-बार मनभावन (सुंदर) के आने की बात कहते हैं, परन्तु वे झूठी बातें हैं, इसलिए वे उदास हैं। कवि के अधर (होठ) सूखे हुए हैं और प्राण (जीवन) पयान (पानी) की तरह आ रहा है। वे चाहते हैं कि उनकी चाहत का संदेश सुजान तक पहुंचे। इस कवित्त में प्रेम की गहन पीड़ा, निराशा और अभिलाषा का सुंदर चित्रण है।

  • कवि ने प्रेमिका से दूर रहने की पीड़ा व्यक्त की है।
  • अंधकार और विरह की भावना कवि के जीवन को घेरती है।
  • कवि बार-बार प्रेमिका के आने की आशा करता है।
  • झूठी बातों से उदासी और निराशा व्यक्त हुई है।
  • प्राण की व्यथा और अधरों की सूखावट प्रेम की तीव्रता दर्शाती है।
  • 📌 अवधि - समय की अवधि।
  • 📌 अरबर - अंधकार, अंधेरा।
  • 📌 मनभावन - प्रिय, सुंदर।

कवित्त (2)

व्याख्या

कवित्त (2)

दूसरे कवित्त में कवि घनानंद ने मौन होकर प्रेमिका के प्रण पालन को देखने की इच्छा व्यक्त की है। वे पूछते हैं कि क्या तुम (सुजान) अपनी आरसी (अँगूठे में पहना जाने वाला शीशा) को देखकर मुझसे बात करोगी? कवि चकित है कि तुमने ऐसा व्यवहार क्यों किया कि मैं डोल

अभ्यास प्रश्नChapter 4

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.सुजान घनानंद की ओर एक बार भी नहीं देखती क्योंकि
A.वह अपनी सखियों से बातें कर रही थी
B.वह नृत्य करने में लीन थी
C.वह लगातार आरसी की ओर देख रही थी
D.वह सो रही थी

उत्तर:

वह लगातार आरसी की ओर देख रही थी

MediumNCERT
Q2.'अब न घिरत घन आनंद निदान को' पंक्ति में कौन से अलंकार की छटा है
A.यमक अलंकार
B.उपमा अलंकार
C.रूपक अलंकार
D.श्लेष अलंकार

उत्तर:

श्लेष अलंकार

MediumNCERT
Q3.कवि घनानंद के प्राण अटके थे
A.सुजान के सन्देश के लिए
B.बादशाह के बुलावे के लिए
C.मित्रों के दिलासे से
D.वैद्य की प्रतीक्षा में

उत्तर:

सुजान के सन्देश के लिए

MediumNCERT
Q4.कौन सी रचना घनांनद द्वारा रचित नहीं है ?
A.विरह लीला
B.विनय पत्रिका
C.सुजान सागर
D.कृपाकंड निबंध

उत्तर:

विनय पत्रिका

MediumNCERT
Q5.घनानंद मूलतः किस भाव के सिद्धहस्त कवि थे ?
A.प्रेम की पीड़ा के
B.वीरता प्रधान कविता के
C.भक्ति रस के
D.प्रकृति सौंदर्य के

उत्तर:

प्रेम की पीड़ा के

MediumNCERT
Q6.घनानंद किस बादशाह के दरबार में मीर मुंशी थे ?
A.मुहम्मद अहमद
B.मुहम्मद गौरी
C.मुहम्मद शाह
D.मुहम्मद तकी

उत्तर:

मुहम्मद शाह

MediumNCERT
Q7.1. बनारस में वसंत का आगमन कैसे होता है और उसका क्या प्रभाव इस शहर पर पड़ता है? 2. ‘खाली कटोरों में वसंत का उतरना’ से क्या आशय है? 3. बनारस की पूर्णता और रिक्तता को कवि ने किस प्रकार दिखाया है? 4. बनारस में धीरे-धीरे क्या-क्या होता है? ‘धीरे-धीरे’ से कवि इस शहर के बारे में क्या कहना चाहता है? 5. धीरे-धीरे होने की सामूहिक लय में क्या-क्या बँधा है? 6. ‘सई साँझ’ में घुसने पर बनारस की किन-किन विशेषताओं का पता चलता है? 7. बनारस शहर के लिए जो मानवीय क्रियाएँ इस कविता में आई हैं, उनका व्यंजनार्थ स्पष्ट कीजिए। 8. शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए— (क) ‘यह धीरे-धीरे होना ………… समूचे शहर को’ (ख) ‘अगर ध्यान से देखो ………… और आधा नहीं है’ (ग) ‘अपनी एक टाँग पर ………… बेखबर’

उत्तर:

1. बनारस में वसंत का आगमन धीरे-धीरे होता है, जैसे प्रकृति में बदलाव होता है। यह आगमन शहर में नई ऊर्जा, जीवन और सौंदर्य का संचार करता है। वसंत के आने से बनारस की गलियाँ, घाट, और वातावरण जीवंत हो उठते हैं, जिससे शहर में उत्साह और उल्लास का माहौल बनता है। 2. ‘खाली कटोरों में वसंत का उतरना’ का आशय है कि जैसे खाली कटोरों में वसंत की ताजगी और जीवन का संचार होता है, वैसे ही शहर के हर कोने में वसंत की खुशबू और प्रभाव फैल जाता है। यह प्रतीकात्मक रूप से जीवन के नए आरंभ और ताजगी को दर्शाता है। 3. कवि ने बनारस की पूर्णता और रिक्तता को इस प्रकार दिखाया है कि शहर में एक ओर जीवन की पूर्णता, समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानों पर शून्यता और खालीपन भी है। यह दोनों भाव मिलकर शहर की जटिलता और विविधता को प्रकट करते हैं। 4. बनारस में धीरे-धीरे प्रकृति और जीवन की विभिन्न क्रियाएँ होती हैं जैसे कि पंछियों का चहचहाना, लोगों का जागना, और वातावरण का बदलना। ‘धीरे-धीरे’ से कवि यह कहना चाहता है कि शहर की सुंदरता और जीवन की प्रक्रिया अचानक नहीं बल्कि क्रमिक और सौम्य होती है, जो एक सामूहिक लय में बंधी होती है। 5. धीरे-धीरे होने की सामूहिक लय में प्रकृति की क्रियाएँ, मानव गतिविधियाँ, और सांस्कृतिक परंपराएँ जुड़ी होती हैं। यह लय शहर के जीवन को एक सामंजस्यपूर्ण और संतुलित रूप देती है। 6. ‘सई साँझ’ में घुसने पर बनारस की विशेषताएँ जैसे कि शांत वातावरण, सांस्कृतिक समृद्धि, और प्राकृतिक सौंदर्य का पता चलता है। यह समय शहर के लिए विश्राम और सौंदर्य का प्रतीक है। 7. कविता में बनारस के लिए जो मानवीय क्रियाएँ आई हैं, वे जैसे जागना, पूजा करना, स्नान करना आदि हैं, जो शहर के जीवन और संस्कृति को जीवंत बनाती हैं। इन क्रियाओं का व्यंजनार्थ यह है कि ये क्रियाएँ शहर की आत्मा और परंपरा को दर्शाती हैं। 8. शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट करना— (क) ‘यह धीरे-धीरे होना ………… समूचे शहर को’ में कवि ने धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रियाओं की सुंदरता और सामूहिकता को दर्शाया है जो पूरे शहर को प्रभावित करती है। (ख) ‘अगर ध्यान से देखो ………… और आधा नहीं है’ में कवि ने सूक्ष्म दृष्टि से शहर की विशेषताओं को समझने की बात कही है, जहाँ आधा नहीं बल्कि पूरा अनुभव होता है। (ग) ‘अपनी एक टाँग पर ………… बेखबर’ में कवि ने शहर की स्थिरता और स्थायीपन को दर्शाया है, जो अपने अस्तित्व में निश्चिंत और स्थिर है।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर कविता के भाव, प्रतीकों और बनारस के सांस्कृतिक व प्राकृतिक पहलुओं के आधार पर दिया गया है। कवि ने बनारस के वसंत आगमन, जीवन की प्रक्रियाओं, और शहर की विशेषताओं को सूक्ष्मता से चित्रित किया है। धीरे-धीरे होने वाली सामूहिक लय, मानवीय क्रियाएँ और शिल्प-सौंदर्य के उदाहरण कविता की गहराई को दर्शाते हैं।

MediumNCERT
Q8.1. बच्चे का उधर-उधर कहना क्या प्रकट करता है? 2. ‘मैं स्वीकार करूँ मैंने पहली बार जाना हिमालय किधर है’—प्रस्तुत पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

1. बच्चे का उधर-उधर कहना उसकी जिज्ञासा, उत्सुकता और अनजान चीजों को जानने की इच्छा को प्रकट करता है। यह उसके मन की बेचैनी और खोज की प्रवृत्ति को दर्शाता है। 2. ‘मैं स्वीकार करूँ मैंने पहली बार जाना हिमालय किधर है’ पंक्ति में कवि अपनी पहली अनुभूति और अनुभव को स्वीकार करता है। इसका भाव यह है कि उसने पहली बार हिमालय की दिशा और महत्व को समझा, जो उसके ज्ञान और दृष्टिकोण में एक नया आयाम जोड़ता है। यह पंक्ति अनुभव और स्वीकृति की भावना को दर्शाती है।

व्याख्या:

पहले प्रश्न में बच्चे के व्यवहार से उसकी मानसिक स्थिति और भावनाओं का विश्लेषण किया गया है। दूसरे प्रश्न में प्रस्तुत पंक्ति के भाव को समझकर कवि के अनुभव और स्वीकृति की भावना को स्पष्ट किया गया है।

MediumNCERT