Chapter 10
Chapter 10 — अध्ययन नोट्स
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रामचंद्र शुक्ल
व्याख्यारामचंद्र शुक्ल
रामचंद्र शुक्ल का जन्म सन् 1884 में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के अगोना गाँव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू, अंग्रेजी और फ़ारसी में हुई। विधिवत शिक्षा उन्होंने इंटरमीडिएट तक प्राप्त की, परन्तु स्वाध्याय द्वारा संस्कृत, अंग्रेजी, बांग्ला और हिंदी के प्राचीन तथा नवीन साहित्य का गंभीर अध्ययन किया। उन्होंने मिर्जापुर के मिशन हाई स्कूल में चित्रकला के अध्यापक के रूप में कार्य किया। सन् 1905 में काशी नागरी प्रचारिणी सभा में हिंदी शब्द सागर के सहायक संपादक के पद पर नियुक्त होकर काशी आ गए। बाद में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी के प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष बने। उनका निधन वहीं हुआ। रामचंद्र शुक्ल हिंदी साहित्य के उच्चकोटि के आलोचक, इतिहासकार और साहित्य-चिंतक थे। उन्होंने विज्ञान, दर्शन, इतिहास, भाषा विज्ञान, साहित्य और समाज के विभिन्न पक्षों पर लेखन किया। हिंदी साहित्य के इतिहास को व्यवस्थित करते हुए कवियों और लेखकों की सम्यक समीक्षा की। उनकी गद्य शैली विवेचनात्मक, विचारशील, सूक्ष्म तर्क-योजना वाली और सहदयता पूर्ण थी। वे व्यंग्य और विनोद का प्रयोग करते हुए लेखन को प्रभावशाली बनाते थे। उनका शब्द चयन व्यापक था, जिसमें तत्सम से लेकर उर्दू के प्रचलित शब्द भी शामिल थे। उनके लेखन में विचारों की दृढ़ता, निर्भीकता और आत्मविश्वास स्पष्ट दिखाई देते हैं।
- रामचंद्र शुक्ल का जन्म 1884 में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के अगोना गाँव में हुआ।
- प्रारंभिक शिक्षा उर्दू, अंग्रेजी और फ़ारसी में हुई।
- काशी नागरी प्रचारिणी सभा में हिंदी शब्द सागर के सहायक संपादक बने।
- काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष के पद पर कार्य किया।
- हिंदी साहित्य के इतिहासकार, आलोचक और चिंतक के रूप में प्रसिद्ध।
- उनकी गद्य शैली विचारशील, सूक्ष्म तर्कयुक्त और सहदयता पूर्ण थी।
- 📌 आलोचक: साहित्य की समीक्षा करने वाला व्यक्ति।
- 📌 इतिहासकार: इतिहास का अध्ययन और लेखन करने वाला।
- 📌 विवेचनात्मक गद्य: तर्कपूर्ण और विश्लेषणात्मक लेखन शैली।
प्रेमघन की छाया-स्मृति
व्याख्याप्रेमघन की छाया-स्मृति
यह संस्मरणात्मक निबंध रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखा गया है, जिसमें उन्होंने अपने बचपन के साहित्यिक परिवेश का वर्णन किया है। उनके पिता फ़ारसी के ज्ञाता और पुरानी हिंदी कविता के प्रेमी थे। वे रामचरितमानस और रामचंद्रिका का पाठ परिवार में करते थे। बचपन में ही लेखक के मन में भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम जागृत हुआ। मिर्जापुर आने पर उन्होंने भारतेंदु मंडल के प्रसिद्ध कवि उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' से परिचय प्राप्त किया। लेखक ने प्रेमघन के मकान की पहली झलक का वर्णन किया है, जहाँ बरामदा सघन लताओं से आवृत था और एक मूर्ति खड़ी थी। धीरे-धीरे हिंदी साहित्य के प्रति उनका झुकाव बढ़ा। क्वीन्स कॉलेज में पढ़ते समय हिंदी पुस्तकालय से पुस्तकें पढ़ते और भारतेंदु जी के मकान के नीचे का परिचय गहरी मैत्री में परिणत हुआ। 16 वर्ष की उम्र तक हिंदी प्रेमियों की एक मंडली बन गई, जिसमें काशीप्रसाद जायसवाल, भगवानदास हालना, बदरीनाथ गौंड, उमाशंकर द्विवेदी प्रमुख थे। मंडली में हिंदी लेखकों की चर्चा होती थी। ‘निस्संदेह’ शब्द को लेकर एक रोचक प्रसंग भी है, जहाँ उर्दू भाषी लोग उनकी हिंदी बोली को अनोखा मानते थे। चौधरी साहब का व्यक्तित्व रियासतदार और तबीयतदार था। उनके यहाँ वसंत पंचमी, होली जैसे उत्सव होते थे। उनकी बातचीत में विलक्षण वक्रता और विनोद था। वे नौकरों से भी सहज संवाद करते थे। चौधरी साहब के साथ कई रोचक घटनाएँ और संवाद पाठ में वर्णित हैं।
- लेखक के पिता फ़ारसी के ज्ञाता और पुरानी हिंदी कविता के प्रेमी थे।
- भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रति लेखक के मन में बचपन से गहरी श्रद्धा थी।
- प्रेमघन के मकान की पहली झलक सघन लताओं से आवृत बरामदे की थी।
- हिंदी साहित्य के प्रति लेखक का झुकाव धीरे-धीरे बढ़ा।
- 16 वर्ष की उम्र तक हिंदी प्रेमियों की मंडली बन गई।
- ‘निस्संदेह’ शब्द से हिंदी प्रेमियों की बोली को उर्दू भाषी अनोखा समझते थे।
- चौधरी साहब का व्यक्तित्व रियासतदार, विनोदी और सहज था।
- 📌 संस्मरणात्मक निबंध: लेखक के व्यक्तिगत अनुभवों और स्मृतियों पर आधारित लेख।
- 📌 भारतेंदु मंडल: भारतेंदु हरिश्चंद्र के आस-पास के हिंदी साहित्यकारों का समूह।
- 📌 वक्रता: टेढ़ापन, कुटिलता।
प्रेमघन से पहली मुलाकात और बाल्यकाल के अनुभव
व्याख्याप्रेमघन से पहली मुलाकात और बाल्यकाल के अनुभव
लेखक ने प्रेमघन (उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी) से पहली मुलाकात का वर्णन किया है। वे बाल्यावस्था में प्रेमघन के मकान के सामने पहुँचे थे, जहाँ बरामदा सघन लताओं से ढका था। ऊपर की ओर एक मूर्ति खड़ी थी, जिसके कंधों पर बाल बिखरे थे और एक हाथ खंभे पर टिका था।
अभ्यास प्रश्न — Chapter 10
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.लेखक ने अपने पिता जी की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर:
लेखक ने अपने पिता जी की विशेषताओं में उनकी सरलता, सादगी, और साहित्य के प्रति गहरी रुचि का उल्लेख किया है। वे एक संस्कारी और अनुशासित व्यक्ति थे, जिनका व्यवहार सभी के प्रति सम्मानपूर्ण था। उनकी शिक्षाओं और संस्कारों ने लेखक के व्यक्तित्व और साहित्यिक रुचि को प्रभावित किया।
व्याख्या:
पाठ में लेखक ने पिता जी के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं का वर्णन किया है, जैसे उनकी विनम्रता, ज्ञान की गहराई, और परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारी। ये विशेषताएँ लेखक के जीवन और साहित्यिक दृष्टिकोण को प्रभावित करती हैं।
Q2.बचपन में लेखक के मन में भारतेंदु जी के संबंध में कैसी भावना जगी रहती थी?
उत्तर:
बचपन में लेखक के मन में भारतेंदु जी के प्रति आदर, श्रद्धा और सम्मान की भावना जगी रहती थी। वे उन्हें एक महान साहित्यकार और आदर्श व्यक्तित्व के रूप में देखते थे, जिससे प्रेरणा मिलती थी।
व्याख्या:
पाठ में लेखक ने बताया है कि भारतेंदु जी के प्रति उनकी भावनाएँ बचपन से ही सकारात्मक और आदरपूर्ण थीं, जो बाद में साहित्य के प्रति उनके झुकाव को बढ़ाने में सहायक रहीं।
Q3.उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ की पहली झलक लेखक ने किस प्रकार देखी?
उत्तर:
लेखक ने उपाध्याय बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ की पहली झलक एक प्रभावशाली और आकर्षक व्यक्ति के रूप में देखी। उनकी वाणी में मिठास और व्यक्तित्व में गरिमा थी, जो लेखक को प्रभावित करती थी।
व्याख्या:
पाठ में लेखक ने बताया है कि चौधरी जी के व्यक्तित्व और व्यवहार ने उन्हें पहली बार ही प्रभावित किया, जिससे उनके प्रति सम्मान और लगाव पैदा हुआ।
Q4.लेखक का हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव किस तरह बढ़ता गया?
उत्तर:
लेखक का हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव धीरे-धीरे बढ़ता गया। प्रारंभ में वे केवल रुचि रखते थे, लेकिन समय के साथ साहित्यिक मंडलियों में सम्मिलित होकर, साहित्यकारों से मिलने और साहित्य पढ़ने से उनकी लगन और प्रेम गहरा होता गया।
व्याख्या:
पाठ में लेखक ने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया है कि कैसे विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों और व्यक्तियों से संपर्क ने उनके हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव को प्रबल किया।
Q5.‘निस्संदेह’ शब्द को लेकर लेखक ने किस प्रसंग का जिक्र किया है?
उत्तर:
लेखक ने ‘निस्संदेह’ शब्द के प्रयोग को लेकर एक विशेष प्रसंग का उल्लेख किया है, जिसमें इस शब्द के सही और प्रभावी उपयोग की बात की गई है। उन्होंने बताया कि यह शब्द किसी बात को निश्चित रूप से स्वीकार करने या मानने के लिए प्रयोग किया जाता है।
व्याख्या:
पाठ में लेखक ने ‘निस्संदेह’ शब्द के महत्व और उसके प्रयोग के संदर्भ में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक को शब्द के अर्थ और उपयोग की समझ मिलती है।
Q6.पाठ में कुछ रोचक घटनाओं का उल्लेख है। ऐसी तीन घटनाएँ चुनकर उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
पाठ में वर्णित तीन रोचक घटनाएँ निम्नलिखित हैं: 1. लेखक का भारतेंदु मंडल के साहित्यिक कार्यक्रमों में भाग लेना और वहाँ के साहित्यकारों से मिलना। 2. उपाध्याय बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ से पहली बार परिचय और उनकी व्यक्तित्व की छवि। 3. हिंदी-उर्दू भाषा के विषय में लेखक के विचारों का विकास और भाषा के प्रति उनकी समझ। इन घटनाओं को अपने शब्दों में विस्तार से लिखना चाहिए।
व्याख्या:
पाठ में लेखक ने अपने अनुभवों और संस्मरणों के माध्यम से कई घटनाओं का उल्लेख किया है, जो हिंदी साहित्य के प्रति उनके प्रेम और समझ को दर्शाती हैं।
Q7.“इस पुरातत्व की दृष्टि में प्रेम और कुतूहल का अद्भुत मिश्रण रहता था।” यह कथन किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह कथन लेखक के उस अनुभव के संदर्भ में कहा गया है जब वे साहित्य और इतिहास के अध्ययन में लगे थे। पुरातत्व की दृष्टि से, प्रेम और कुतूहल का मिश्रण इसलिए था क्योंकि इतिहास और साहित्य दोनों में गहरी रुचि और जिज्ञासा थी, जो उन्हें नए-नए तथ्य जानने और समझने के लिए प्रेरित करती थी।
व्याख्या:
पाठ में लेखक ने बताया है कि पुरातत्व के अध्ययन में केवल तथ्य जानना ही नहीं, बल्कि उनके प्रति प्रेम और जिज्ञासा भी आवश्यक होती है, जो अध्ययन को रोचक और सार्थक बनाती है।
Q8.प्रस्तुत संस्मरण में लेखक ने चौधरी साहब के व्यक्तित्व के किन-किन पहलुओं को उजागर किया है?
उत्तर:
लेखक ने चौधरी साहब के व्यक्तित्व के अनेक पहलुओं को उजागर किया है, जिनमें उनकी विनम्रता, ज्ञान की गहराई, साहित्य के प्रति समर्पण, और लोगों के साथ सहज व्यवहार शामिल हैं। वे एक प्रेरणादायक और प्रभावशाली साहित्यकार थे, जिनका व्यक्तित्व सभी को आकर्षित करता था।
व्याख्या:
पाठ में लेखक ने चौधरी साहब के व्यक्तित्व के विभिन्न गुणों का वर्णन किया है, जो उनके साहित्यिक और सामाजिक जीवन को दर्शाते हैं।
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Hindi · Class 12
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