Chapter 12
Chapter 12 — अध्ययन नोट्स
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रघुवीर सहाय
व्याख्यारघुवीर सहाय
रघुवीर सहाय का जन्म सन् 1929 में लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अपनी संपूर्ण शिक्षा लखनऊ में ही पूरी की और वर्ष 1951 में अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। पेशे से वे पत्रकार थे। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने 'प्रतीक' नामक पत्रिका में सहायक संपादक के रूप में की। इसके बाद वे आकाशवाणी के समाचार विभाग में कार्यरत रहे। कुछ समय तक वे हैदराबाद से प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'कल्पना' के संपादन से भी जुड़े रहे। इसके अतिरिक्त उन्होंने कई वर्षों तक 'दिनमान' पत्रिका का संपादन किया। रघुवीर सहाय नयी कविता के प्रमुख कवि माने जाते हैं। उनकी कुछ कविताएँ प्रसिद्ध कवि अज्ञेय द्वारा संपादित 'दूसरा सप्तक' में संकलित हैं। कविता के अतिरिक्त उन्होंने रचनात्मक एवं विवेचनात्मक गद्य भी लिखा। उनकी कविताओं में आत्मपरक अनुभवों की अपेक्षा जनजीवन के अनुभवों की रचनात्मक अभिव्यक्ति अधिक देखने को मिलती है। वे अपने काव्य में व्यापक सामाजिक संदर्भों के निरीक्षण, अनुभव और बोध को व्यक्त करते हैं। रघुवीर सहाय ने अपनी पत्रकार-दृष्टि का सर्जनात्मक उपयोग करते हुए कविता रची। उनका मानना था कि अखबारों की खबरों के भीतर छिपी मानवीय पीड़ा को कविता के माध्यम से अभिव्यक्त करना कवि का दायित्व है। इसी दृष्टि से उन्होंने अपनी नयी काव्य-भाषा विकसित की, जिसमें अनावश्यक शब्दों का प्रयोग कम से कम किया गया है। उनकी कविताओं की प्रमुख विशेषता भयाक्रांत अनुभव की आवेगरहित अभिव्यक्ति है। वे मुक्त छंद के साथ-साथ छंदबद्ध काव्य रचना भी करते हैं। जीवन के अनुभवों को व्यक्त करने के लिए वे कविता में कथा या वृत्तांत का उपयोग करते हैं। उनकी प्रमुख काव्य-कृतियों में 'सीढ़ियों पर धूप में', 'आत्महत्या के विरुद्ध', 'हँसो हँसो जल्दी हँसो' और 'लोग भूल गए हैं' शामिल हैं। उनकी लगभग सभी रचनाएँ छह खंडों में प्रकाशित 'रघुवीर सहाय रचनावली' में संकलित हैं। 'लोग भूल गए हैं' काव्य संग्रह के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला।
- रघुवीर सहाय का जन्म लखनऊ में हुआ और उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया।
- वे पत्रकार थे और कई पत्रिकाओं के संपादक रहे।
- उनकी कविताएँ सामाजिक अनुभवों और जनजीवन की अभिव्यक्ति हैं।
- उनकी कविता में पत्रकार-दृष्टि का सर्जनात्मक उपयोग हुआ है।
- वे अनावश्यक शब्दों से बचते हुए सरल और प्रभावी भाषा का प्रयोग करते हैं।
- उनकी प्रमुख काव्य-कृतियाँ और साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्ति।
- 📌 नयी कविता: आधुनिक हिंदी कविता की वह शैली जो पारंपरिक छंदों से हटकर मुक्त छंद और सामाजिक विषयों पर आधारित होती है।
- 📌 पत्रकार-दृष्टि: समाचार और जनजीवन की सूक्ष्म समझ जो कविता में सामाजिक यथार्थ प्रस्तुत करती है।
- 📌 साहित्य अकादमी पुरस्कार: भारत सरकार द्वारा साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार।
वसंत आया
व्याख्यावसंत आया
कविता 'वसंत आया' में रघुवीर सहाय ने आज के मनुष्य और प्रकृति के बीच टूटते हुए संबंध को चित्रित किया है। वे बताते हैं कि वसंत ऋतु का आगमन अब मनुष्य के अनुभव से नहीं बल्कि कैलेंडर के माध्यम से जाना जाता है। प्रकृति में ऋतुओं का परिवर्तन स्वाभाविक रूप से होता रहता है—पत्ते झड़ते हैं, कोपलें फूटती हैं, हवा बहती है, परंतु मनुष्य इन प्राकृतिक घटनाओं को महसूस नहीं करता, वह निरपेक्ष और उदासीन हो गया है। कवि ने आधुनिक जीवनशैली पर व्यंग्य करते हुए यह दिखाया है कि मनुष्य प्रकृति के सौंदर्य और चमत्कारों से कट चुका है। कविता की भाषा में जीवन की विडंबना छिपी है। रघुवीर सहाय ने देशज (तद्भव) शब्दों और क्रियाओं का भरपूर प्रयोग किया है, जैसे 'अशोक', 'मदन महीना', 'पंचमी', 'नंदन-वन' आदि, जो परंपरा में रचे-बसे जीवनानुभवों को दर्शाते हैं। इससे कविता में आधुनिकता के सामने एक चुनौती का भाव उत्पन्न होता है। कविता में कई सुंदर बिंब और प्रतीक भी हैं, जैसे 'बड़े-बड़े पियाराए पत्ते', 'फुटपाथ पर चलते चलते', 'ढाक के जंगल दहकना' आदि, जो प्रकृति के विभिन्न रूपों को जीवंत करते हैं। कवि ने प्रकृति के साथ मनुष्य के टूटते रिश्ते को बहुत ही मार्मिक और सूक्ष्मता से प्रस्तुत किया है।
- वसंत ऋतु का आगमन अब अनुभव के बजाय कैलेंडर से जाना जाता है।
- प्रकृति के स्वाभाविक परिवर्तन होते रहते हैं, पर मनुष्य उनसे कट चुका है।
- कवि ने आधुनिक जीवनशैली पर व्यंग्य किया है।
- कविता में देशज शब्दों और परंपरागत जीवन के अनुभवों का प्रयोग हुआ है।
- प्रकृति के बिंबों और प्रतीकों का सुंदर उपयोग किया गया है।
- कविता में जीवन की विडंबना और मनुष्य की निरपेक्षता व्यक्त हुई है।
- 📌 वसंत ऋतु: वर्ष की वह ऋतु जिसमें प्रकृति में नवजीवन का संचार होता है, फूल खिलते हैं और मौसम सुहावना होता है।
- 📌 देशज शब्द: तद्भव या स्थानीय भाषा से उत्पन्न शब्द जो सरल और सहज होते हैं।
- 📌 बिंब: कविता में किसी वस्तु, व्यक्ति या भाव का चित्रात्मक प्रतिनिधित्व।
तोड़ो
व्याख्यातोड़ो
कविता 'तोड़ो' में रघुवीर सहाय ने सृजन की प्रक्रिया के लिए आवश्यक भूमि की तैयारी का रूपक प्रस्तुत किया है। कवि आह्वान करता है कि पत्थर, चट्टानें, ऊसर और बंजर जमीन को तोड़ो ताकि उसे खेत में बदला जा सके। यह विध्वंस सृजन के लिए आवश्यक है। कवि यहाँ विध्वं
अभ्यास प्रश्न — Chapter 12
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.सृजन क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
संसार के कल्याण के लिए
Q2.‘आधे-आधे गाने’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अधूरी रचनाएँ
Q3.ये चरती- परती तोड़ो- पंक्ति में प्रयुक्त ‘चरती-परती’ का क्या अर्थ है?
उत्तर:
खाली जमीन
Q4.मन में सृजनात्मक भाव किस प्रकार उत्पन्न होंगे?
उत्तर:
ऊब को दूर कर
Q5.कवि ने मानव मन की तुलना किससे की है?
उत्तर:
धरती से
Q6.‘तोड़ो’ किस प्रकार की कविता है?
उत्तर:
आह्वान
Q7.1. संवदिया की क्या विशेषताएँ हैं और गाँववालों के मन में संवदिया की क्या अवधारणा है?
उत्तर:
संवदिया एक ऐसा व्यक्ति होता है जो संदेश पहुँचाने का काम करता है। उसकी विशेषताएँ होती हैं कि वह तेज़, भरोसेमंद और समझदार होता है। गाँववालों के मन में संवदिया को एक महत्वपूर्ण और सम्मानित व्यक्ति के रूप में देखा जाता है क्योंकि वह दूर-दराज के समाचार और संदेश लाता है, जिससे गाँव के लोग जुड़े रहते हैं।
व्याख्या:
संवदिया की भूमिका गाँव में सूचना का संचार करने वाली होती है। उसकी विशेषताएँ जैसे तेज़ दौड़ना, सूझ-बूझ से काम लेना और भरोसेमंद होना, उसे गाँववालों के बीच सम्मान दिलाती हैं। इसलिए गाँववालों की अवधारणा में संवदिया एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
Q8.2. बड़ी हवेली से बुलावा आने पर हरगोबिन के मन में किस प्रकार की आशंका हुई?
उत्तर:
बड़ी हवेली से बुलावा आने पर हरगोबिन के मन में भय और चिंता की आशंका हुई कि कहीं कोई बुरा समाचार या संकट न हो। उसे अपने अतीत और वर्तमान की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और डर महसूस हुआ।
व्याख्या:
बुलावा मिलने पर हरगोबिन का मन अस्थिर हो गया क्योंकि बड़ी हवेली से बुलावा आमतौर पर महत्वपूर्ण या गंभीर कारणों से आता है। इसलिए उसने आशंका जताई कि कुछ अप्रिय घटना हो सकती है।
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