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Chapter 15

🎓 Class 12📖 Antra📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 14अध्याय 15 / 17Chapter 16

Chapter 15अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

निर्मल वर्मा

व्याख्या

निर्मल वर्मा

निर्मल वर्मा हिंदी साहित्य के नयी कहानी आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर माने जाते हैं। उनका जन्म सन् 1929 में हिमाचल प्रदेश के शिमला में हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास में एम.ए. किया और अध्यापन कार्य में लगे। सन् 1959 में चेकोस्लावाकिया के प्राच्य-विद्या संस्थान प्राग के निमंत्रण पर वहाँ गए और चेक उपन्यासों तथा कहानियों का हिंदी अनुवाद किया। निर्मल वर्मा को हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा पर भी अधिकार प्राप्त था। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स के लिए यूरोप की सांस्कृतिक एवं राजनीतिक समस्याओं पर कई लेख और रिपोर्ट लिखे, जो उनके निबंध संग्रहों में संकलित हैं। सन् 1970 में वे भारत लौट आए और स्वतंत्र लेखन करने लगे। उनका मुख्य योगदान हिंदी कथा-साहित्य में है। उन्होंने कई कहानी-संग्रह लिखे जैसे 'परिंदे', 'जलती झाड़ी', 'तीन एकांत', 'पिछली गरमियों में', 'कच्चे और काला पानी', 'बीच बहस में', 'सूखा' आदि। उनके उपन्यासों में 'वे दिन', 'लाल टीन की छत', 'एक चिथड़ा सुख', 'अंतिम अरण्य' उल्लेखनीय हैं। 'रात का रिपोर्टर' उपन्यास पर सीरियल भी बनाया गया। उनके यात्रा-संस्मरण संग्रह 'हर बारिश में', 'चीड़ों पर चाँदनी', 'धुंध से उठती धुन' प्रसिद्ध हैं। निबंध संग्रहों में 'शब्द और स्मृति' तथा 'कला का जोखिम' और 'ढलान से उतरते हुए' शामिल हैं। सन् 1985 में उन्हें 'कच्चे और काला पानी' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उनकी भाषा-शैली में एक अनोखी कसावट है, जो विचारों की गहराई को उद्धरणों से रोचक बनाती है। उनकी वाक्य-रचना मिश्र और संयुक्त वाक्यों की प्रधानता लिए हुए है। वे उर्दू और अंग्रेजी के शब्दों का स्वाभाविक प्रयोग करते हैं, जिससे उनकी भाषा में नवीन प्रयोग झलकते हैं।

  • निर्मल वर्मा का जन्म 1929 में शिमला में हुआ।
  • उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. किया।
  • सन् 1959 में चेकोस्लावाकिया गए और चेक साहित्य का हिंदी अनुवाद किया।
  • हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रवीण।
  • नयी कहानी आंदोलन के प्रमुख लेखक।
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार 1985 में मिला।
  • 📌 नयी कहानी आंदोलन: हिंदी साहित्य में नया प्रयोग और यथार्थवादी कहानियाँ।
  • 📌 साहित्य अकादमी पुरस्कार: भारत सरकार द्वारा साहित्य में उत्कृष्टता के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार।

जहाँ कोई वापसी नहीं (भूमिका)

व्याख्या

जहाँ कोई वापसी नहीं (भूमिका)

यह यात्रा-वृत्तांत निर्मल वर्मा के संग्रह 'धुंध से उठती धुन' से लिया गया है। इसमें लेखक ने पर्यावरण-संबंधी गंभीर चिंताओं के साथ-साथ विकास के नाम पर हो रहे पर्यावरण विनाश और उससे उत्पन्न विस्थापन की मानव पीड़ा को उजागर किया है। लेखक का मानना है कि अंधाधुंध विकास और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन आवश्यक है, अन्यथा विकास विस्थापन और पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म देता रहेगा। औद्योगिक विकास के कारण प्राकृतिक सौंदर्य का विनाश हो रहा है, जिसका मार्मिक चित्रण इस पाठ में है। पाठ विस्थापितों की समस्याओं का हृदयस्पर्शी चित्र प्रस्तुत करता है। यह सत्य उद्घाटित करता है कि आधुनिक औद्योगीकरण की आँधी में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि उसका परिवेश, संस्कृति और आवास-स्थल भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं। इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलती है कि विकास के लिए पर्यावरण और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। विस्थापन की समस्या केवल एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और सांस्कृतिक संकट भी है।

  • लेखक ने पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की आवश्यकता बताई है।
  • विकास के नाम पर पर्यावरण विनाश और विस्थापन की समस्या है।
  • औद्योगिक विकास से प्राकृतिक सौंदर्य नष्ट हो रहा है।
  • विस्थापन से मनुष्य के साथ उसकी संस्कृति और आवास भी प्रभावित होते हैं।
  • पाठ में विस्थापितों की पीड़ा का मार्मिक चित्रण है।
  • 📌 विस्थापन: अपने निवास स्थान से बलपूर्वक हटाना या उजाड़ना।
  • 📌 पर्यावरण विनाश: प्राकृतिक संसाधनों और सौंदर्य का नष्ट होना।

सिंगरौली – 1983

व्याख्या

सिंगरौली – 1983

यह खंड लेखक की सिंगरौली क्षेत्र की यात्रा का वर्णन करता है, जो जुलाई के अंत में धान रोपाई के मौसम में हुई थी। नवागाँव क्षेत्र की आबादी पचास हजार से अधिक है, जिसमें अठारह छोटे-छोटे गाँव बसे हैं। इनमें अमझर नामक गाँव आम के पेड़ों से घिरा हुआ था, लेकिन

अभ्यास प्रश्नChapter 15

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.'भरत-राम का प्रेम' में किसकी मनोदशा का वर्णन किया गया है
A.राम की
B.भरत की
C.कैकई की
D.कौशल्या की

उत्तर:

भरत की

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Q2.भरत राम के वनगमन के लिए किसको दोषी मानते हैं ?
A.कैकई को
B.दशरथ को
C.मंथरा को
D.स्वयं को

उत्तर:

स्वयं को

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Q3.राम भरत को जानबूझकर क्यों जिता देते थे
A.क्योंकि भरत राम के प्रिय अनुज थे
B.क्योंकि राम खेलना नहीं जानते थे
C.क्योंकि राम भरत से डर जाते थे
D.क्योंकि भरत राम से ऐसा करने को कहते थे

उत्तर:

क्योंकि भरत राम के प्रिय अनुज थे

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Q4.'नीरज नयन नेह' में कौन सा अलंकार है
A.उत्प्रेक्षा
B.उपमा
C.श्लेष
D.अनुप्रास

उत्तर:

अनुप्रास

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Q5.रामचरित मानस की रचना किस भाषा में की गई ?
A.ब्रज
B.अवधी
C.मैथिली
D.खड़ी बोली

उत्तर:

अवधी

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Q6.'भरत-राम का प्रेम' रामचरित मानस के किस कांड में से उद्धृत है?
A.लंका कांड
B.बाल कांड
C.अयोध्या कांड
D.सुंदर कांड

उत्तर:

अयोध्या कांड

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Q7.1. अमझर से आप क्या समझते हैं? अमझर गाँव में सूनापन क्यों है?

उत्तर:

अमझर एक गाँव का नाम है जो इस पाठ में विस्थापन और पर्यावरणीय समस्याओं के संदर्भ में उल्लेखित है। अमझर गाँव में सूनापन इसलिए है क्योंकि वहाँ के लोग विस्थापित हो चुके हैं या विस्थापन के कारण गाँव का सामाजिक और प्राकृतिक वातावरण प्रभावित हुआ है। गाँव की आबादी कम हो गई है, जिससे वहाँ का जीवन शून्य और सुनसान हो गया है।

व्याख्या:

अमझर गाँव का उल्लेख पाठ में विस्थापन की समस्या को समझाने के लिए किया गया है। विस्थापन के कारण लोग अपने गाँव छोड़ देते हैं, जिससे गाँव में सूनापन और खालीपन आ जाता है। यह सामाजिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टिकोण से एक गंभीर समस्या है।

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Q8.2. आधुनिक भारत के ‘नए शरणार्थी’ किन्हें कहा गया है?

उत्तर:

आधुनिक भारत के ‘नए शरणार्थी’ वे लोग हैं जो विभिन्न कारणों से अपने मूल निवास स्थान से विस्थापित होकर नए स्थानों पर शरण लेते हैं। इनमें मुख्यतः वे लोग शामिल हैं जो औद्योगीकरण, पर्यावरणीय संकट, विकास परियोजनाओं, और सामाजिक-आर्थिक कारणों से अपने गाँव या शहर छोड़कर अन्यत्र जाते हैं। ये शरणार्थी पारंपरिक शरणार्थियों से भिन्न होते हैं क्योंकि उनका विस्थापन विकास और औद्योगीकरण से जुड़ा होता है।

व्याख्या:

पाठ में ‘नए शरणार्थी’ शब्द का प्रयोग उन लोगों के लिए किया गया है जो आधुनिक विकास और औद्योगीकरण के कारण विस्थापित हुए हैं। ये शरणार्थी आर्थिक और सामाजिक कारणों से अपने घर छोड़ते हैं, जिससे उनकी जीवनशैली और सामाजिक संरचना प्रभावित होती है।

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