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State Human Rights Commission and Lokayukt

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State Human Rights Commission and Lokayuktअध्ययन नोट्स

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राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग : स्थापना एवं उद्देश्य

व्याख्या

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग : स्थापना एवं उद्देश्य

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग (Rajasthan State Human Rights Commission) की स्थापना मानवाधिकारों की रक्षा, संरक्षण और संवर्धन हेतु की गई थी। मानवाधिकार आयोग का मुख्य उद्देश्य राज्य में नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना, उनके उल्लंघन की जांच करना तथा संबंधित अधिकारियों को उचित निर्देश देना है। भारत में मानवाधिकारों के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्थापना 1993 में हुई थी, जिसके पश्चात राज्यों में भी आयोग गठित किए गए। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग की स्थापना 18 जनवरी 2000 को राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर की गई थी। आयोग का गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (Protection of Human Rights Act, 1993) की धारा 21 के अंतर्गत हुआ। आयोग का मुख्यालय जयपुर में स्थित है। आयोग का कार्यक्षेत्र राजस्थान राज्य के सभी नागरिकों, सरकारी अधिकारियों, पुलिस, जेल प्रशासन, एवं अन्य संस्थाओं द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों की जांच करना है। आयोग स्वतः संज्ञान (suo-moto) भी ले सकता है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग की स्थापना 18 जनवरी 2000 को हुई। • आयोग की स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 21 के तहत हुई। • आयोग का मुख्यालय जयपुर में है। • आयोग की स्थापना तिथि, मुख्यालय और अधिनियम की धारा अक्सर पूछी जाती है। • स्वतः संज्ञान की परिभाषा व उदाहरण याद रखें।

  • राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग की स्थापना 18 जनवरी 2000 को हुई।
  • आयोग का मुख्यालय जयपुर में स्थित है।
  • आयोग की स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 21 के अंतर्गत हुई।
  • आयोग नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु कार्य करता है।
  • आयोग स्वतः संज्ञान (suo-moto) भी ले सकता है।
  • 📌 मानवाधिकार आयोग: नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा हेतु गठित संस्था
  • 📌 स्वतः संज्ञान (Suo-moto): बिना शिकायत के स्वयं मामले की जांच प्रारंभ करना

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग : संरचना एवं नियुक्ति

अवधारणा

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग : संरचना एवं नियुक्ति

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग में एक अध्यक्ष और दो सदस्य होते हैं। अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। अध्यक्ष के पद पर वे व्यक्ति नियुक्त किए जाते हैं जिन्होंने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया हो। सदस्य के रूप में वे व्यक्ति नियुक्त किए जाते हैं जिनके पास मानवाधिकारों के क्षेत्र में अनुभव हो या जिन्होंने न्यायिक सेवा में कार्य किया हो। आयोग के अध्यक्ष और सदस्य का कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो पहले हो) तक होता है। आयोग के पदों पर नियुक्ति के लिए एक समिति होती है जिसमें मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, राज्यपाल, और विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। आयोग के पदाधिकारी को हटाने की प्रक्रिया भी मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 में निर्धारित है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा होती है। • आयोग में कुल 3 पदाधिकारी (1 अध्यक्ष, 2 सदस्य) होते हैं। • कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक। • अध्यक्ष और सदस्य की योग्यता व कार्यकाल से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। • नियुक्ति प्रक्रिया और समिति के सदस्यों के नाम याद रखें।

  • आयोग में एक अध्यक्ष और दो सदस्य होते हैं।
  • अध्यक्ष उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश होते हैं।
  • सदस्य मानवाधिकार क्षेत्र या न्यायिक सेवा में अनुभवी होते हैं।
  • कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक (जो पहले हो)।
  • नियुक्ति राज्यपाल द्वारा होती है।
  • 📌 अध्यक्ष: आयोग का प्रमुख, उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश
  • 📌 सदस्य: मानवाधिकार क्षेत्र या न्यायिक सेवा में अनुभवी व्यक्ति

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग : कार्य एवं अधिकार

व्याख्या

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग : कार्य एवं अधिकार

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के मुख्य कार्य मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच करना, संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश देना, मानवाधिकारों के संरक्षण हेतु जागरूकता फैलाना, तथा मानवाधिकारों से जुड़े मामलों में रिपोर्ट तैयार करना है। आयोग को यह अधिकार ह