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Governor and Rajasthan Raj Bhavan

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Governor and Rajasthan Raj Bhavanअध्ययन नोट्स

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राज्यपाल का संवैधानिक पद एवं भूमिका

अवधारणा

राज्यपाल का संवैधानिक पद एवं भूमिका

राज्यपाल (Governor) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 से 162 के अंतर्गत राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति (President) द्वारा की जाती है और वह राज्य में केंद्र सरकार का प्रतिनिधि होता है। राज्यपाल की भूमिका मुख्यतः औपचारिक (Ceremonial) होती है, परंतु संविधान में प्रदत्त विशेषाधिकारों के कारण वह महत्वपूर्ण संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन भी करता है। राज्यपाल राज्य सरकार के सभी कार्यों का संचालन उसके नाम पर करता है, तथा विधानसभा (Legislative Assembly) और मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) के मध्य संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। राज्यपाल को विशेष परिस्थितियों में विवेकाधिकार (Discretionary Powers) भी प्राप्त हैं, जैसे राष्ट्रपति शासन (President's Rule) की अनुशंसा करना, विधानसभा भंग करना आदि। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • राज्यपाल का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 153-162 में है। • राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। • राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, परंतु वे राष्ट्रपति की इच्छा पर पद पर रहते हैं। • राज्यपाल की न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए। • राज्यपाल संबंधी प्रश्नों में अनुच्छेद 153-162 बार-बार पूछे जाते हैं। • राज्यपाल की नियुक्ति, कार्यकाल, योग्यता, शक्तियाँ—इन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न आते हैं।

  • राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है (अनुच्छेद 155)।
  • राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, परंतु वे राष्ट्रपति की इच्छा पर पद पर बने रहते हैं।
  • राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है (Constitutional Head)।
  • राज्यपाल के पास कार्यपालिका, विधायिका एवं न्यायिक शक्तियाँ होती हैं।
  • राज्यपाल केंद्र सरकार का राज्य में प्रतिनिधि होता है।
  • 📌 राज्यपाल (Governor): राज्य का संवैधानिक प्रमुख
  • 📌 कार्यपालिका (Executive): शासन का कार्यान्वयन अंग
  • 📌 विवेकाधिकार (Discretionary Powers): राज्यपाल के विशेषाधिकार

राज्यपाल की नियुक्ति, योग्यता एवं शपथ

व्याख्या

राज्यपाल की नियुक्ति, योग्यता एवं शपथ

राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जो केंद्र सरकार की सलाह पर होती है। संविधान के अनुच्छेद 155 में नियुक्ति का प्रावधान है। राज्यपाल बनने के लिए व्यक्ति को भारतीय नागरिक (Indian Citizen) होना चाहिए, उसकी न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए, और वह संसद या राज्य विधानसभा का सदस्य नहीं होना चाहिए। राज्यपाल को कोई लाभ का पद (Office of Profit) धारण नहीं करना चाहिए। राज्यपाल पद की शपथ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of High Court) द्वारा दिलाई जाती है। शपथ में राज्यपाल संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा की प्रतिज्ञा करता है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • राज्यपाल की न्यूनतम आयु 35 वर्ष है। • राज्यपाल की शपथ अनुच्छेद 159 के अंतर्गत होती है। • राज्यपाल को लाभ का पद धारण करने की अनुमति नहीं है। • शपथ संबंधी अनुच्छेद 159 से प्रश्न पूछे जाते हैं। • योग्यता व नियुक्ति के प्रावधानों पर आधारित प्रश्न बार-बार आते हैं।

  • राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 155 के तहत होती है।
  • योग्यता: भारतीय नागरिक, न्यूनतम आयु 35 वर्ष, लाभ का पद न हो।
  • शपथ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है (अनुच्छेद 159)।
  • राज्यपाल को संसद या राज्य विधानसभा का सदस्य नहीं होना चाहिए।
  • राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, परंतु वे राष्ट्रपति की इच्छा पर पद पर बने रहते हैं।
  • 📌 लाभ का पद (Office of Profit): ऐसा पद जिससे वेतन, भत्ता या अन्य आर्थिक लाभ प्राप्त होता हो।
  • 📌 शपथ (Oath): संवैधानिक पद ग्रहण करते समय ली जाने वाली प्रतिज्ञा।

राज्यपाल की शक्तियाँ एवं कार्य

व्याख्या

राज्यपाल की शक्तियाँ एवं कार्य

राज्यपाल के पास कार्यपालिका, विधायिका, न्यायिक, वित्तीय एवं आपातकालीन (Emergency) शक्तियाँ होती हैं। कार्यपालिका शक्तियों के अंतर्गत राज्यपाल राज्य के प्रशासन का संचालन अपने नाम पर करता है, मंत्रिपरिषद की नियुक्ति करता है, मुख्य सचिव एवं अन्य उच्च अध