Personality
Personality — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
व्यक्तित्व की अवधारणा
अवधारणाव्यक्तित्व की अवधारणा
व्यक्तित्व (Personality) का अर्थ उस व्यक्ति की समग्र विशेषताओं, गुणों, व्यवहार, सोचने के तरीके, भावनाओं और अभिव्यक्तियों से है, जो उसे अन्य व्यक्तियों से भिन्न बनाते हैं। संगठनात्मक व्यवहार के संदर्भ में, व्यक्तित्व का अध्ययन इसलिए किया जाता है क्योंकि यह यह निर्धारित करता है कि व्यक्ति कार्यस्थल पर कैसे व्यवहार करेगा, किस प्रकार के कार्यों को प्राथमिकता देगा, और समूह में किस तरह से समायोजित होगा। व्यक्तित्व केवल बाहरी रूप-रंग या शारीरिक बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यक्ति के आंतरिक गुण, जैसे – सोचने का तरीका, दृष्टिकोण, मूल्य, प्रेरणा, और भावनात्मक संतुलन भी शामिल हैं। व्यक्तित्व का अध्ययन मनोविज्ञान और संगठनात्मक व्यवहार दोनों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संगठन में कर्मचारियों के चयन, प्रशिक्षण, नेतृत्व, प्रेरणा, और टीम निर्माण में सहायक होता है। व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को समझना, संगठन को यह निर्णय लेने में मदद करता है कि कौन-सा व्यक्ति किस प्रकार के कार्य के लिए उपयुक्त है। व्यक्तित्व के निर्धारक (Determinants of Personality) – 1. जैविक (Biological): आनुवांशिकता, शारीरिक बनावट, तंत्रिका तंत्र आदि। 2. सामाजिक (Social): परिवार, मित्र, समाज, संस्कृति आदि। 3. सांस्कृतिक (Cultural): परंपराएँ, मूल्य, विश्वास आदि। 4. परिस्थितिजन्य (Situational): विशेष परिस्थितियों में व्यक्ति का व्यवहार। इस प्रकार, व्यक्तित्व एक जटिल और बहुआयामी संकल्पना है, जिसमें व्यक्ति के जन्म से लेकर उसके सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यक्तिगत अनुभवों का योग होता है।
- व्यक्तित्व व्यक्ति की समग्र विशेषताओं का समूह है।
- यह व्यक्ति के व्यवहार, सोच, भावनाओं और दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- व्यक्तित्व के निर्धारक – जैविक, सामाजिक, सांस्कृतिक, परिस्थितिजन्य।
- संगठन में व्यक्तित्व का अध्ययन कर्मचारियों के चयन और विकास के लिए आवश्यक है।
- व्यक्तित्व स्थायी होते हुए भी परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।
- 📌 व्यक्तित्व: व्यक्ति की समग्र विशेषताओं का समूह।
- 📌 निर्धारक: वे कारक जो किसी चीज़ को प्रभावित करते हैं।
व्यक्तित्व के सिद्धांत
व्याख्याव्यक्तित्व के सिद्धांत
व्यक्तित्व के अध्ययन के लिए कई सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें से प्रमुख हैं: (1) मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत (Psychoanalytic Theory), (2) विशेषता सिद्धांत (Trait Theory), (3) मानववादी सिद्धांत (Humanistic Theory), और (4) सामाजिक अधिगम सिद्धांत (Social Learning Theory)। 1. मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत (सिग्मंड फ्रायड): फ्रायड के अनुसार, व्यक्तित्व तीन भागों – इड (Id), ईगो (Ego), और सुपरईगो (Superego) – से मिलकर बनता है। इड व्यक्ति की जैविक इच्छाएँ और तात्कालिक संतुष्टि की चाह दर्शाता है। ईगो तर्कसंगतता और वास्तविकता के अनुसार निर्णय लेता है। सुपरईगो नैतिकता और सामाजिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है। 2. विशेषता सिद्धांत (Trait Theory): इस सिद्धांत के अनुसार, व्यक्तित्व कुछ स्थायी विशेषताओं (Traits) का समूह है, जो व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित करती हैं। ऑलपोर्ट, कैटल और आइज़ेंक ने विभिन्न विशेषताओं की पहचान की। उदाहरण के लिए, आइज़ेंक के अनुसार, व्यक्तित्व के तीन आयाम हैं – बहिर्मुखता (Extroversion), तंत्रिकात्व (Neuroticism), और मनोविकृति (Psychoticism)। 3. मानववादी सिद्धांत (Humanistic Theory): मास्लो और रोजर्स के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति में आत्मविकास (Self-actualization) की प्रवृत्ति होती है। यह सिद्धांत व्यक्ति की सकारात्मक क्षमताओं और व्यक्तिगत विकास पर बल देता है। 4. सामाजिक अधिगम सिद्धांत (Social Learning Theory): बैंडुरा के अनुसार, व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके पर्यावरण, सामाजिक अनुभवों और अनुकरण (Imitation) के माध्यम से विकसित होता है। इन सिद्धांतों के माध्यम से हम समझ सकते हैं कि व्यक्तित्व का विकास कैसे होता है और विभिन्न व्यक्तियों में अंतर क्यों होता है।
- व्यक्तित्व के अध्ययन के लिए कई सिद्धांत हैं।
- फ्रायड ने इड, ईगो, सुपरईगो की अवधारणा दी।
- विशेषता सिद्धांत में स्थायी गुणों पर बल है।
- मानववादी सिद्धांत में आत्मविकास की प्रवृत्ति प्रमुख है।
- सामाजिक अधिगम सिद्धांत में पर्यावरण और अनुकरण का महत्व है।
- 📌 इड: व्यक्ति की जैविक इच्छाएँ।
- 📌 ईगो: तर्कसंगतता का प्रतिनिधि।
- 📌 सुपरईगो: नैतिकता का प्रतिनिधि।
व्यक्तित्व के निर्धारक
व्याख्याव्यक्तित्व के निर्धारक
व्यक्तित्व के निर्धारक वे कारक हैं, जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के निर्माण और विकास में भूमिका निभाते हैं। इन्हें मुख्यतः चार भागों में विभाजित किया गया है – 1. जैविक निर्धारक (Biological Determinants): इनमें आनुवांशिकता (Heredity), शारीरिक बनावट, तंत्
SLM - Organizational Behaviour (Hindi) के सभी 20 अध्याय
Organizational Behaviour · Vardhman Mahaveer Open University
5 और अध्याय — सभी देखें →