Decision-Making Process: the dynamics, variety and techniques of both individual
Decision-Making Process: the dynamics, variety and techniques of both individual — अध्ययन नोट्स
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परिचय: निर्णय-निर्माण प्रक्रिया का महत्व
व्याख्यापरिचय: निर्णय-निर्माण प्रक्रिया का महत्व
इस अनुभाग में निर्णय-निर्माण प्रक्रिया के महत्व को विस्तार से समझाया गया है। निर्णय-निर्माण प्रत्येक संगठन में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है, क्योंकि यह संगठन के लक्ष्यों की प्राप्ति, संसाधनों के उपयोग और कार्यों के निष्पादन को प्रभावित करता है। निर्णय-निर्माण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति या समूह विभिन्न विकल्पों में से सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन करते हैं। संगठनात्मक व्यवहार में निर्णय-निर्माण का अध्ययन इसलिए आवश्यक है क्योंकि यह प्रबंधकों को जटिल परिस्थितियों में सही विकल्प चुनने में सहायता करता है। निर्णय-निर्माण न केवल संगठन के लिए, बल्कि व्यक्तिगत विकास के लिए भी आवश्यक है। इसमें तर्क, विश्लेषण, अनुभव और भविष्य की संभावनाओं का आकलन शामिल होता है।
- निर्णय-निर्माण संगठनात्मक व्यवहार का मुख्य घटक है।
- यह संगठन के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक होता है।
- प्रबंधकों के लिए निर्णय-निर्माण आवश्यक कौशल है।
- निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में तर्क और विश्लेषण का प्रयोग होता है।
- यह व्यक्तिगत और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है।
- निर्णय-निर्माण से संसाधनों का प्रभावी उपयोग संभव होता है।
- 📌 निर्णय-निर्माण: विकल्पों में से सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन करने की प्रक्रिया।
- 📌 संगठनात्मक व्यवहार: संगठन में व्यक्तियों और समूहों के व्यवहार का अध्ययन।
निर्णय-निर्माण के चरण
अवधारणानिर्णय-निर्माण के चरण
निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में कई चरण होते हैं, जिनका पालन करके व्यक्ति या समूह सही निर्णय तक पहुँचते हैं। ये चरण निम्नलिखित हैं: (1) समस्या की पहचान, (2) जानकारी एकत्र करना, (3) विकल्पों का निर्माण, (4) विकल्पों का मूल्यांकन, (5) विकल्प का चयन, (6) कार्यान्वयन, (7) परिणामों का मूल्यांकन। प्रत्येक चरण में विशिष्ट गतिविधियाँ होती हैं, जैसे समस्या की स्पष्ट पहचान, आवश्यक जानकारी जुटाना, संभावित विकल्पों की सूची बनाना, उनके लाभ-हानि का विश्लेषण करना, सबसे उपयुक्त विकल्प चुनना, उसे लागू करना और अंत में परिणामों का मूल्यांकन करना।
- निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में सात मुख्य चरण होते हैं।
- समस्या की पहचान सबसे पहला और महत्वपूर्ण चरण है।
- विकल्पों का निर्माण और मूल्यांकन विश्लेषणात्मक सोच की मांग करता है।
- चयनित विकल्प का कार्यान्वयन संगठनात्मक संसाधनों पर निर्भर करता है।
- परिणामों का मूल्यांकन सुधार के लिए आवश्यक है।
- प्रत्येक चरण में तर्क और अनुभव का उपयोग होता है।
- 📌 समस्या की पहचान: उस स्थिति का निर्धारण जिसमें सुधार या परिवर्तन की आवश्यकता हो।
- 📌 विकल्पों का मूल्यांकन: विभिन्न विकल्पों के लाभ-हानि का विश्लेषण।
व्यक्तिगत निर्णय-निर्माण की गतिशीलता
व्याख्याव्यक्तिगत निर्णय-निर्माण की गतिशीलता
व्यक्तिगत निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में व्यक्ति की सोच, अनुभव, मूल्य, विश्वास और भावनाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रत्येक व्यक्ति की निर्णय-निर्माण शैली अलग होती है, जो उसके व्यक्तित्व, शिक्षा, सामाजिक परिवेश और मानसिक स्थिति पर निर्भर करती ह
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