Ch 9निःशुल्क

Chapter 9

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Macro Economics (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट
Chapter 8अध्याय 8 / 15Chapter 11

Chapter 9अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

9.1 परिचय

व्याख्या

9.1 परिचय

इस अनुभाग में गुणक एवं प्रवर्तक सिद्धांत का परिचय दिया गया है। गुणक सिद्धांत (Multiplier Theory) और प्रवर्तक सिद्धांत (Accelerator Theory) दोनों ही आय, उत्पादन और निवेश के बीच संबंध को समझाने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। गुणक सिद्धांत के अनुसार, जब किसी अर्थव्यवस्था में स्वायत्त निवेश या व्यय में वृद्धि होती है, तो कुल आय में उससे कई गुना अधिक वृद्धि होती है। प्रवर्तक सिद्धांत बताता है कि उपभोग में परिवर्तन के कारण निवेश में किस प्रकार परिवर्तन होता है। ये दोनों सिद्धांत आर्थिक चक्र, रोजगार, और आय के निर्धारण में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। इस अध्याय में इन सिद्धांतों की विस्तृत व्याख्या, गणना, उदाहरण, तथा उनके व्यावहारिक प्रभावों को समझाया गया है।

  • गुणक सिद्धांत और प्रवर्तक सिद्धांत का अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण स्थान है।
  • गुणक सिद्धांत आय में कई गुना वृद्धि को दर्शाता है।
  • प्रवर्तक सिद्धांत निवेश में परिवर्तन को उपभोग के परिवर्तन से जोड़ता है।
  • ये सिद्धांत आर्थिक चक्र और रोजगार के निर्धारण में सहायक हैं।
  • दोनों सिद्धांत एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
  • इन सिद्धांतों का व्यावहारिक जीवन में भी प्रभाव है।
  • 📌 गुणक (Multiplier): वह अनुपात, जिससे स्वायत्त निवेश में वृद्धि के कारण कुल आय में होने वाली वृद्धि को मापा जाता है।
  • 📌 प्रवर्तक (Accelerator): वह सिद्धांत, जो उपभोग में परिवर्तन के कारण निवेश में होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है।

9.2 गुणक सिद्धांत

अवधारणा

9.2 गुणक सिद्धांत

गुणक सिद्धांत के अनुसार, जब किसी अर्थव्यवस्था में स्वायत्त निवेश (Autonomous Investment) या व्यय में वृद्धि होती है, तो कुल आय में उससे कई गुना अधिक वृद्धि होती है। यह वृद्धि उपभोग प्रवृत्ति (Marginal Propensity to Consume - MPC) पर निर्भर करती है। गुणक का मान जितना अधिक होगा, आय में वृद्धि उतनी ही अधिक होगी। गुणक सिद्धांत का विकास जॉन मेनार्ड केन्स ने किया था। यह सिद्धांत बताता है कि प्रारंभिक निवेश से उत्पन्न आय का एक भाग उपभोग में व्यय होता है, जिससे आगे और आय उत्पन्न होती है, और यह प्रक्रिया कई चक्रों तक चलती है।

  • गुणक सिद्धांत के अनुसार, निवेश में वृद्धि से आय में कई गुना वृद्धि होती है।
  • यह सिद्धांत उपभोग प्रवृत्ति पर आधारित है।
  • गुणक का मान 1/(1-MPC) होता है।
  • गुणक सिद्धांत के विकासकर्ता केन्स हैं।
  • यह सिद्धांत आर्थिक विकास और रोजगार में सहायक है।
  • गुणक सिद्धांत का व्यावहारिक प्रयोग सार्वजनिक व्यय में किया जाता है।
  • 📌 स्वायत्त निवेश: वह निवेश, जो आय के स्तर से स्वतंत्र होता है।
  • 📌 सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC): आय में एक अतिरिक्त इकाई की वृद्धि से उपभोग में होने वाली वृद्धि।

9.3 गुणक की गणना

सूत्र

9.3 गुणक की गणना

इस अनुभाग में गुणक की गणना की विधि विस्तार से समझाई गई है। गुणक का मान सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) पर निर्भर करता है। गुणक का सूत्र K = 1 ÷ (1 - MPC) है। यदि MPC का मान ज्ञात हो, तो गुणक आसानी से निकाला जा सकता है। गुणक का उपयोग आय में कुल परिवर्तन