Chapter 4
Chapter 4 — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
इस अनुभाग में रोजगार के परंपरागत सिद्धांत का संक्षिप्त परिचय दिया गया है। यह सिद्धांत मुख्यतः क्लासिकल अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जिसमें यह माना गया कि अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार की स्थिति स्वाभाविक रूप से प्राप्त हो जाती है। क्लासिकल अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यदि बाजार को स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाए तो संसाधनों का पूर्ण उपयोग संभव है। वेतन, ब्याज और लाभ की दरें स्वतः समायोजित होती हैं जिससे बेरोजगारी अस्थायी होती है। इस सिद्धांत में 'से का नियम' (Say's Law) का विशेष महत्व है, जो कहता है कि 'आपूर्ति अपनी मांग स्वयं उत्पन्न करती है'। इस अध्याय में हम क्लासिकल रोजगार सिद्धांत, से का नियम, इसकी आलोचना, और परंपरागत सिद्धांत की सीमाओं का अध्ययन करेंगे।
- क्लासिकल अर्थशास्त्रियों ने पूर्ण रोजगार की अवधारणा दी।
- बाजार में स्वतः संतुलन स्थापित होता है।
- से का नियम: आपूर्ति अपनी मांग स्वयं उत्पन्न करती है।
- बेरोजगारी को अस्थायी माना गया है।
- सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं मानी गई।
- 📌 पूर्ण रोजगार: जब सभी संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो।
- 📌 क्लासिकल अर्थशास्त्र: 18वीं-19वीं सदी के अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रतिपादित विचार।
रोजगार का परंपरागत (क्लासिकल) सिद्धांत
अवधारणारोजगार का परंपरागत (क्लासिकल) सिद्धांत
क्लासिकल सिद्धांत के अनुसार, रोजगार का निर्धारण बाजार की स्वतः क्रियाशीलता पर निर्भर करता है। क्लासिकल अर्थशास्त्री जैसे एडम स्मिथ, डेविड रिकार्डो, जे.एस. मिल आदि मानते थे कि मजदूरी, ब्याज और लाभ की दरें स्वतः समायोजित होती हैं, जिससे संसाधनों का पूर्ण उपयोग होता है। उनका मानना था कि बेरोजगारी केवल अस्थायी होती है और यदि मजदूरी दरें लचीली हों, तो बेरोजगारी स्वतः समाप्त हो जाती है। क्लासिकल मॉडल के अनुसार, कुल मांग और कुल आपूर्ति के बीच संतुलन से रोजगार का स्तर निर्धारित होता है।
- रोजगार का निर्धारण बाजार की शक्तियों द्वारा होता है।
- मजदूरी, ब्याज, लाभ की दरें स्वतः समायोजित होती हैं।
- पूर्ण रोजगार की स्थिति स्वाभाविक है।
- बेरोजगारी अस्थायी और स्वैच्छिक मानी गई है।
- सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं।
- 📌 स्वैच्छिक बेरोजगारी: जब लोग अपनी इच्छा से काम न करें।
- 📌 मजदूरी लचीलापन: मजदूरी दर में परिवर्तन की क्षमता।
से का नियम (Say's Law of Markets)
परिभाषासे का नियम (Say's Law of Markets)
से का नियम, जिसे 'Say's Law of Markets' कहा जाता है, फ्रांसीसी अर्थशास्त्री जे.बी. से द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इस नियम के अनुसार, 'प्रत्येक आपूर्ति अपनी मांग स्वयं उत्पन्न करती है'। इसका तात्पर्य है कि उत्पादन से आय उत्पन्न होती है, जिससे वस्तु
SLM - Macro Economics (Hindi) के सभी 15 अध्याय
Macro Economics · Vardhman Mahaveer Open University