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Chapter 9

🎓 Class 11📖 Antra📖 5 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~8 मिनट
Chapter 8अध्याय 9 / 16Chapter 10

Chapter 9अध्ययन नोट्स

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कबीर

व्याख्या

कबीर

कबीर का जन्म काशी (वाराणसी) में हुआ था। वे स्वामी रामानंद के शिष्य माने जाते हैं। कबीर ने स्वयं को जुलाहा और काशी का निवासी बताया है। जीवन के अंतिम समय में वे मगहर चले गए जहाँ उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया। कबीर को विधिवत शिक्षा नहीं मिली थी, जैसा कि उन्होंने स्वयं कहा है कि 'मसि कागद छुयो नहीं, कलम गही नहिं हाथ'। इसके बावजूद वे संतों और फ़कीरों की संगति में रहे, जिससे उन्हें गहन आध्यात्मिक ज्ञान और मौलिक चिंतन की प्रतिभा प्राप्त हुई। कबीर निर्गुण भक्ति परंपरा के प्रमुख कवि हैं। उनके काव्य में धर्म के बाह्य आडंबरों का विरोध है तथा राम और रहीम की एकता की स्थापना का प्रयास भी दिखता है। वे जातिगत और धार्मिक भेदभाव का बार-बार खंडन करते हैं और भेदभाव से मुक्त मनुष्य की मनुष्यता को जगाने का प्रयत्न करते हैं। कबीर की रचनाओं में गुरु-भक्ति, ईश्वर-प्रेम, ज्ञान, वैराग्य, सत्संग, साधु-महिमा, आत्म-बोध और जगत-बोध की अभिव्यक्ति है। उनकी कविता अनुभव के ठोस धरातल पर आधारित है, इसलिए वे विश्वसनीय और प्रामाणिक हैं। भाषा में जनसाधारण की सहजता और भावों की गहराई दोनों हैं। वे दार्शनिक चिंतन को सरल और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करते हैं। कबीर ने साखी, सबद और रमैनी की रचनाएँ कीं। उनकी अधिकांश रचनाएँ कबीर ग्रंथावली में संकलित हैं, जबकि बीजक का विशेष महत्व कबीर पंथ में है। कुछ रचनाएँ गुरुग्रंथ साहिब में भी सम्मिलित हैं। पाठ्यपुस्तक में उनके दो पद दिए गए हैं, जिनमें पहला पद हिंदू और मुसलमान दोनों के धर्माचार्यों की आलोचना करता है, जबकि दूसरा पद प्रेम और विरह की अभिव्यक्ति है।

  • कबीर का जन्म काशी में हुआ और वे स्वामी रामानंद के शिष्य थे।
  • उन्होंने विधिवत शिक्षा नहीं पाई, पर संतों की संगति से गहरा ज्ञान प्राप्त किया।
  • कबीर निर्गुण भक्ति परंपरा के महान कवि हैं, जो जाति और धर्म के भेदभाव का विरोध करते हैं।
  • उनके काव्य में गुरु-भक्ति, ईश्वर-प्रेम, ज्ञान, वैराग्य, आत्म-बोध की अभिव्यक्ति है।
  • कबीर की भाषा जनसाधारण की सहज भाषा है, जिसमें दार्शनिक गहराई है।
  • उनकी रचनाएँ साखी, सबद, रमैनी के रूप में हैं और बीजक का विशेष महत्व है।
  • 📌 निर्गुण भक्ति: ऐसी भक्ति जिसमें ईश्वर को निराकार और गुणरहित माना जाता है।
  • 📌 साखी: दोहे या छोटे-छोटे पद जो जीवन के सत्य और ज्ञान को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं।
  • 📌 सबद: भक्ति गीत या पद जो गुरु की वाणी के रूप में गाए जाते हैं।

कबीर के दो पद

व्याख्या

कबीर के दो पद

पाठ्यपुस्तक में कबीर के दो पद प्रस्तुत किए गए हैं। पहला पद सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों की तीव्र आलोचना करता है। इसमें कबीर कहते हैं कि हिंदू अपनी करम-धर्म की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, पर वे बेस्यों के पैर छूने से भी कतराते हैं। मुसलमानों के पीर-औलिया भी मांसाहारी हैं। वे बाहरी दिखावे और आडंबरों को नकारते हुए जाति और धर्म के भेदभाव को चुनौती देते हैं। इस पद में कबीर ने कहा है कि दोनों धर्मों में दिखावे की राह नहीं है, इसलिए सही मार्ग कौन सा है, यह प्रश्न उनके सामने भी है। दूसरा पद प्रेम और विरह की भावना से ओत-प्रोत है। कबीर ने स्वयं को विरहिणी स्त्री के रूप में प्रस्तुत किया है जो अपने बालम (प्रियतम) के लौट आने की आकांक्षा रखती है। इस पद में घरेलू प्रेम, दाम्पत्य स्नेह और प्रेम की तीव्र लालसा व्यक्त की गई है। कबीर कहते हैं कि बालम के बिना जीवन दुखी है, नींद नहीं आती, और मन व्याकुल रहता है। यह पद कबीर की साकार प्रेम की ओर झुकाव को दर्शाता है, जो निर्गुण भक्ति के साथ-साथ सांसारिक प्रेम की अभिव्यक्ति भी है।

  • पहले पद में कबीर ने हिंदू और मुसलमान दोनों के बाह्य आडंबरों और कुरीतियों की आलोचना की है।
  • कबीर ने जाति, धर्म और सामाजिक भेदभाव को नकारा है।
  • दूसरे पद में कबीर ने प्रेम और विरह की भावना को व्यक्त किया है।
  • कवि ने स्वयं को विरहिणी स्त्री के रूप में प्रस्तुत किया है।
  • यह पद दाम्पत्य प्रेम और घर की महत्ता को दर्शाता है।
  • दोनों पदों में कबीर की भाषा सरल और भावपूर्ण है।
  • 📌 बाह्य आडंबर: धार्मिक या सामाजिक दिखावा जो वास्तविकता से परे होता है।
  • 📌 विरहिणी: वह स्त्री जो अपने प्रियतम से दूर हो और उसकी प्रतीक्षा कर रही हो।
  • 📌 बालम: प्रियतम, पति या प्रेमी।

प्रश्न-अभ्यास

व्याख्या

प्रश्न-अभ्यास

इस खंड में पाठ्यपुस्तक ने कबीर के दो पदों से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न दिए हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को पदों की गहन समझ और विश्लेषण करना है। प्रश्नों में कबीर की सामाजिक आलोचना, धार्मिक भेदभाव, प्रेम और विरह की भावना, तथा पदों के भाव-सौंदर्य और शिल

अभ्यास प्रश्नChapter 9

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.संचार की प्रक्रिया में निन्मलिखित में से किसकी भूमिका नहीं होती ?
A.स्रोत
B.सन्देश
C.फीडबैक
D.बिजली

उत्तर:

बिजली

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Q2.संचार प्रक्रिया में संचारक के बाद सबसे अधिक भूमिका किसकी रहती है?
A.स्रोत
B.टी.वी.
C.प्राप्तकर्ता
D.अख़बार

उत्तर:

प्राप्तकर्ता

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Q3.सन्देश किससे पहुँचता है ?
A.माध्यम
B.प्राप्तकर्ता
C.स्रोत
D.इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

माध्यम

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Q4.संचार प्रक्रिया की शुरुआत किससे होती है?
A.संचारक से
B.फीडबैक से
C.सन्देश से
D.माध्यम से

उत्तर:

संचारक से

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Q5.आपकी दृष्टि में व्यक्ति की सामाजिक प्राणी के रूप में सबसे बड़ी भूमिका क्या है जो उसे अन्य प्राणियों से अलग करती है ?
A.पैसा कमाना
B.घर बसाना
C.संचार करने की क्षमता
D.प्रजनन शक्ति

उत्तर:

संचार करने की क्षमता

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Q6.निम्नलिखित माध्यमों में से कौन सा माध्यम ऐसा है, जिसमें सभी माध्यमों के गुण हैं?
A.रेडियो
B.समाचार-पत्र
C.सिनेमा
D.इन्टरनेट

उत्तर:

इन्टरनेट

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Q7.संचार की प्रक्रिया पूर्ण हुई है या नहीं, इसका पता प्रक्रिया के किस भाग से चलता है?
A.फीडबैक
B.संप्रेषक
C.सम्प्रेषण
D.अखबार

उत्तर:

फीडबैक

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Q8.प्रश्न - ‘भारतमाता’ पंडित जवाहरलाल नेहरू की किस कृति से लिया गया है?
A.(क) हिंदुस्तान की कहानी
B.(ख) मेरी कहानी
C.(ग) भारत की बुनियादी एकता
D.(घ) लड़खड़ाती दुनिया

उत्तर:

(क) हिंदुस्तान की कहानी

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