Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
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अमरकांत का परिचय
व्याख्याअमरकांत का परिचय
अमरकांत का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगरा गाँव में हुआ था। उनका असली नाम श्रीराम वर्मा था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बलिया में प्राप्त की और बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए. की डिग्री हासिल की। बचपन से ही उन्हें साहित्य में रुचि थी और किशोरावस्था में ही उन्होंने कहानी लेखन शुरू कर दिया था। अमरकांत ने पत्रकारिता से अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत की। उन्होंने आगरा के दैनिक पत्र 'सैनिक' के संपादकीय विभाग में काम किया और प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े। इसके अलावा वे दैनिक अमृत पत्रिका और दैनिक भारत के संपादकीय विभागों में भी कार्यरत रहे। कुछ समय तक वे 'कहानी' पत्रिका के संपादन से भी जुड़े रहे। अमरकांत नयी कहानी आंदोलन के प्रमुख कहानीकारों में से एक थे। उनकी कहानियों में शहरी और ग्रामीण जीवन की यथार्थ छवि प्रस्तुत की गई है। वे मुख्यतः मध्यवर्ग के जीवन की वास्तविकता और विसंगतियों को अभिव्यक्त करते थे। उनकी कहानियों में अमानवीयता, हृदयहीनता, पाखंड और आडंबर जैसे सामाजिक बुराइयों को उजागर किया गया है। उनकी भाषा सरल, सहज और सजीव है, जिसमें आंचलिक मुहावरों का प्रयोग होता है। उनकी कहानियाँ जीवन की सच्चाई को बिना किसी अतिशयोक्ति के प्रस्तुत करती हैं। अमरकांत की प्रमुख रचनाओं में 'जिंदगी और जोंक', 'देश के लोग', 'मौत का नगर', 'मित्र-मिलन', 'कुहासा' (कहानी संग्रह), 'सूखा पत्ता', 'ग्राम सेविका', 'काले उजले दिन', 'सुखजीवी', 'बीच की दीवार', और उपन्यास 'इन्हीं हथियारों से' शामिल हैं। 'इन्हीं हथियारों से' उपन्यास के लिए उन्हें 2007 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। 2009 में उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। अमरकांत ने बाल साहित्य में भी योगदान दिया है। इस पुस्तक में उनकी कहानी 'दोपहर का भोजन' शामिल है।
- अमरकांत का जन्म बलिया जिले के नगरा गाँव में हुआ।
- उनका असली नाम श्रीराम वर्मा था।
- उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की।
- पत्रकारिता से साहित्यिक जीवन की शुरुआत की।
- नयी कहानी आंदोलन के प्रमुख कहानीकार थे।
- सामाजिक विसंगतियों को यथार्थवादी शैली में प्रस्तुत किया।
- 📌 प्रगतिशील लेखक संघ: एक साहित्यिक संगठन जो सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर लेखन को प्रोत्साहित करता है।
- 📌 नयी कहानी आंदोलन: हिंदी साहित्य में एक यथार्थवादी कहानी लेखन की परंपरा।
- 📌 आंचलिक मुहावरे: क्षेत्रीय भाषा के विशेष अभिव्यक्तियाँ।
कहानी 'दोपहर का भोजन' का परिचय
व्याख्याकहानी 'दोपहर का भोजन' का परिचय
'दोपहर का भोजन' अमरकांत की एक प्रसिद्ध कहानी है जो गरीबी से जूझ रहे निम्न मध्यवर्गीय परिवार की व्यथा को दर्शाती है। कहानी में सिद्धेश्वरी नामक महिला और उसके परिवार के संघर्ष को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। कहानी की शुरुआत में सिद्धेश्वरी खाना बनाने के बाद थकावट और प्यास से जूझती दिखाई देती है। उसके छोटे बेटे प्रमोद की हालत बहुत दयनीय है, जो भूख और कुपोषण से पीड़ित है। कहानी में परिवार के अन्य सदस्य जैसे रामचंद्र और मोहन भी दिखाए गए हैं, जो गरीबी के बावजूद जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कहानी में सामाजिक असमानता, गरीबी, और परिवार के भीतर के तनाव को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। अमरकांत ने कहानी में भाषा को सरल और सहज रखा है, जिससे पाठक पात्रों की पीड़ा और परिस्थिति को गहराई से समझ पाते हैं। कहानी के माध्यम से लेखक ने गरीबी की विवशता, सामाजिक असमानता और मानवीय संवेदनाओं को उजागर किया है।
- कहानी गरीबी से जूझते एक परिवार की है।
- सिद्धेश्वरी परिवार की मुखिया है।
- प्रमोद नामक छोटा लड़का कुपोषित है।
- रामचंद्र और मोहन परिवार के अन्य सदस्य हैं।
- कहानी में सामाजिक असमानता और गरीबी की विवशता दिखायी गई है।
- भाषा सरल और सहज है।
- 📌 कुपोषण: पोषण की कमी से शरीर की कमजोरी।
- 📌 विवशता: मजबूरी या अनिच्छा से किसी कार्य को करना।
- 📌 सामाजिक असमानता: समाज में आर्थिक और सामाजिक भेद।
कहानी के पात्र और उनका चरित्र चित्रण
व्याख्याकहानी के पात्र और उनका चरित्र चित्रण
कहानी 'दोपहर का भोजन' के मुख्य पात्र सिद्धेश्वरी, रामचंद्र, मोहन, प्रमोद और मुंशी चंद्रिका प्रसाद हैं। सिद्धेश्वरी परिवार की मुखिया है, जो गरीबी और कुपोषण के बावजूद अपने परिवार को संभाले हुए है। वह अपने बच्चों की चिंता में झूठ बोलकर भी परिवार को जोड़
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.प्रश्न- कबीरदास का जन्म वाराणसी के तालाब के निकट माना जाता है।
उत्तर:
(क) लहरतारा
Q2.प्रश्न- कबीरदास भक्तिकाल की किस काव्य धारा के कवि थे?
उत्तर:
(ख) निर्गुण काव्य धारा
Q3.प्रश्न - कबीरदास की भाषा थी।
उत्तर:
(ग) सधुक्कड़ी
Q4.प्रश्न - कबीरदास को ‘वाणी का डिक्टेटर’ किसने कहा था?
उत्तर:
(घ) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
Q5.प्रश्न - कबीरदास निर्गुण काव्य धारा की ज्ञानश्रयी शाखा के कवि थे।
उत्तर:
(घ) प्रतिनिधि
Q6.प्रश्न - कबीरदास परमात्मा के विषय में क्या कहते है?
उत्तर:
(घ) एक है, वह हर प्राणी के ह्रदय में समाया हुआ है
Q7.प्रश्न - भ्रमित लोगों पर कवि की क्या टिप्पणी है?
उत्तर:
(ख) आत्मा-परमात्मा को अलग मानते हुए ईश्वर के वास्तविक रूप से अनभिज्ञ हैं
Q8.प्रश्न - ‘संतों देखत जग बौराना’ पद में कबीर ने किस पर प्रहार किया ?
उत्तर:
(ग) समाज के ढोंग एवं बाह्याडंबरों पर
Antra के सभी 16 अध्याय
Hindi · Class 11
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