NCERTCh 2निःशुल्क

Chapter 2

🎓 Class 11📖 Antra📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 16Chapter 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

अमरकांत का परिचय

व्याख्या

अमरकांत का परिचय

अमरकांत का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगरा गाँव में हुआ था। उनका असली नाम श्रीराम वर्मा था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बलिया में प्राप्त की और बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए. की डिग्री हासिल की। बचपन से ही उन्हें साहित्य में रुचि थी और किशोरावस्था में ही उन्होंने कहानी लेखन शुरू कर दिया था। अमरकांत ने पत्रकारिता से अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत की। उन्होंने आगरा के दैनिक पत्र 'सैनिक' के संपादकीय विभाग में काम किया और प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े। इसके अलावा वे दैनिक अमृत पत्रिका और दैनिक भारत के संपादकीय विभागों में भी कार्यरत रहे। कुछ समय तक वे 'कहानी' पत्रिका के संपादन से भी जुड़े रहे। अमरकांत नयी कहानी आंदोलन के प्रमुख कहानीकारों में से एक थे। उनकी कहानियों में शहरी और ग्रामीण जीवन की यथार्थ छवि प्रस्तुत की गई है। वे मुख्यतः मध्यवर्ग के जीवन की वास्तविकता और विसंगतियों को अभिव्यक्त करते थे। उनकी कहानियों में अमानवीयता, हृदयहीनता, पाखंड और आडंबर जैसे सामाजिक बुराइयों को उजागर किया गया है। उनकी भाषा सरल, सहज और सजीव है, जिसमें आंचलिक मुहावरों का प्रयोग होता है। उनकी कहानियाँ जीवन की सच्चाई को बिना किसी अतिशयोक्ति के प्रस्तुत करती हैं। अमरकांत की प्रमुख रचनाओं में 'जिंदगी और जोंक', 'देश के लोग', 'मौत का नगर', 'मित्र-मिलन', 'कुहासा' (कहानी संग्रह), 'सूखा पत्ता', 'ग्राम सेविका', 'काले उजले दिन', 'सुखजीवी', 'बीच की दीवार', और उपन्यास 'इन्हीं हथियारों से' शामिल हैं। 'इन्हीं हथियारों से' उपन्यास के लिए उन्हें 2007 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। 2009 में उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। अमरकांत ने बाल साहित्य में भी योगदान दिया है। इस पुस्तक में उनकी कहानी 'दोपहर का भोजन' शामिल है।

  • अमरकांत का जन्म बलिया जिले के नगरा गाँव में हुआ।
  • उनका असली नाम श्रीराम वर्मा था।
  • उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की।
  • पत्रकारिता से साहित्यिक जीवन की शुरुआत की।
  • नयी कहानी आंदोलन के प्रमुख कहानीकार थे।
  • सामाजिक विसंगतियों को यथार्थवादी शैली में प्रस्तुत किया।
  • 📌 प्रगतिशील लेखक संघ: एक साहित्यिक संगठन जो सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर लेखन को प्रोत्साहित करता है।
  • 📌 नयी कहानी आंदोलन: हिंदी साहित्य में एक यथार्थवादी कहानी लेखन की परंपरा।
  • 📌 आंचलिक मुहावरे: क्षेत्रीय भाषा के विशेष अभिव्यक्तियाँ।

कहानी 'दोपहर का भोजन' का परिचय

व्याख्या

कहानी 'दोपहर का भोजन' का परिचय

'दोपहर का भोजन' अमरकांत की एक प्रसिद्ध कहानी है जो गरीबी से जूझ रहे निम्न मध्यवर्गीय परिवार की व्यथा को दर्शाती है। कहानी में सिद्धेश्वरी नामक महिला और उसके परिवार के संघर्ष को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। कहानी की शुरुआत में सिद्धेश्वरी खाना बनाने के बाद थकावट और प्यास से जूझती दिखाई देती है। उसके छोटे बेटे प्रमोद की हालत बहुत दयनीय है, जो भूख और कुपोषण से पीड़ित है। कहानी में परिवार के अन्य सदस्य जैसे रामचंद्र और मोहन भी दिखाए गए हैं, जो गरीबी के बावजूद जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कहानी में सामाजिक असमानता, गरीबी, और परिवार के भीतर के तनाव को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। अमरकांत ने कहानी में भाषा को सरल और सहज रखा है, जिससे पाठक पात्रों की पीड़ा और परिस्थिति को गहराई से समझ पाते हैं। कहानी के माध्यम से लेखक ने गरीबी की विवशता, सामाजिक असमानता और मानवीय संवेदनाओं को उजागर किया है।

  • कहानी गरीबी से जूझते एक परिवार की है।
  • सिद्धेश्वरी परिवार की मुखिया है।
  • प्रमोद नामक छोटा लड़का कुपोषित है।
  • रामचंद्र और मोहन परिवार के अन्य सदस्य हैं।
  • कहानी में सामाजिक असमानता और गरीबी की विवशता दिखायी गई है।
  • भाषा सरल और सहज है।
  • 📌 कुपोषण: पोषण की कमी से शरीर की कमजोरी।
  • 📌 विवशता: मजबूरी या अनिच्छा से किसी कार्य को करना।
  • 📌 सामाजिक असमानता: समाज में आर्थिक और सामाजिक भेद।

कहानी के पात्र और उनका चरित्र चित्रण

व्याख्या

कहानी के पात्र और उनका चरित्र चित्रण

कहानी 'दोपहर का भोजन' के मुख्य पात्र सिद्धेश्वरी, रामचंद्र, मोहन, प्रमोद और मुंशी चंद्रिका प्रसाद हैं। सिद्धेश्वरी परिवार की मुखिया है, जो गरीबी और कुपोषण के बावजूद अपने परिवार को संभाले हुए है। वह अपने बच्चों की चिंता में झूठ बोलकर भी परिवार को जोड़

अभ्यास प्रश्नChapter 2

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.प्रश्न- कबीरदास का जन्म वाराणसी के तालाब के निकट माना जाता है।
A.(क) लहरतारा
B.(ख) सहस्त्रधारा
C.(ग) गोपियां तालाब
D.(घ) कंकाली तालाब

उत्तर:

(क) लहरतारा

MediumNCERT
Q2.प्रश्न- कबीरदास भक्तिकाल की किस काव्य धारा के कवि थे?
A.(क) सगुण काव्य धारा
B.(ख) निर्गुण काव्य धारा
C.(ग) प्रेमाश्रयी काव्य धारा
D.(घ) रीतिबद्ध काव्य धारा

उत्तर:

(ख) निर्गुण काव्य धारा

MediumNCERT
Q3.प्रश्न - कबीरदास की भाषा थी।
A.(क) अवधी
B.(ख) ब्रज
C.(ग) सधुक्कड़ी
D.(घ) भोजपुरी

उत्तर:

(ग) सधुक्कड़ी

MediumNCERT
Q4.प्रश्न - कबीरदास को ‘वाणी का डिक्टेटर’ किसने कहा था?
A.(क) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
B.(ख) डा. राम विलास शर्मा
C.(ग) डा. नगेंद्र
D.(घ) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

उत्तर:

(घ) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

MediumNCERT
Q5.प्रश्न - कबीरदास निर्गुण काव्य धारा की ज्ञानश्रयी शाखा के कवि थे।
A.(क) सामान्य
B.(ख) प्रमुख
C.(ग) ओजस्वी
D.(घ) प्रतिनिधि

उत्तर:

(घ) प्रतिनिधि

MediumNCERT
Q6.प्रश्न - कबीरदास परमात्मा के विषय में क्या कहते है?
A.(क) मंदिर में निवास करते हैं
B.(ख) मस्जिद में निवास करते हैं
C.(ग) राम-रहीम दो रूप हैं
D.(घ) एक है, वह हर प्राणी के ह्रदय में समाया हुआ है

उत्तर:

(घ) एक है, वह हर प्राणी के ह्रदय में समाया हुआ है

MediumNCERT
Q7.प्रश्न - भ्रमित लोगों पर कवि की क्या टिप्पणी है?
A.(क) आत्मा-परमात्मा को एक मानते हुए ईश्वर की उपासना करते हैं
B.(ख) आत्मा-परमात्मा को अलग मानते हुए ईश्वर के वास्तविक रूप से अनभिज्ञ हैं
C.(ग) आत्मा-परमात्मा के रहस्य को समझते हुए ईश्वरोपासना में लीन रहते हैं
D.(घ) आत्मा का निवास मानव में एवं परमात्मा को सृष्टि के कण-कण में मानते हैं

उत्तर:

(ख) आत्मा-परमात्मा को अलग मानते हुए ईश्वर के वास्तविक रूप से अनभिज्ञ हैं

MediumNCERT
Q8.प्रश्न - ‘संतों देखत जग बौराना’ पद में कबीर ने किस पर प्रहार किया ?
A.(क) समाज के बुद्धिजीवियों एवं ज्ञानियों पर
B.(ख) समाज के संत-समाज पर
C.(ग) समाज के ढोंग एवं बाह्याडंबरों पर
D.(घ) समाज के प्रतिष्ठित लोगों पर

उत्तर:

(ग) समाज के ढोंग एवं बाह्याडंबरों पर

MediumNCERT