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Chapter 14

🎓 Class 11📖 Antra📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 13अध्याय 14 / 16Chapter 15

Chapter 14अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

अध्याय 'पहाड़ से ऊँचा आदमी' में तेनजिंग नोर्गे के जीवन और उनके साहसिक पर्वतारोहण की कहानी प्रस्तुत की गई है। तेनजिंग नोर्गे का जन्म तिब्बत के खुम्बू क्षेत्र में हुआ था और वे शेरपा जाति से थे, जो हिमालयी क्षेत्र में पर्वतारोहण के लिए प्रसिद्ध है। इस अध्याय में उनके बचपन से लेकर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर विजय प्राप्त करने तक की यात्रा का वर्णन है। तेनजिंग का जीवन कठिनाइयों और चुनौतियों से भरा था, लेकिन उनकी लगन, साहस और मेहनत ने उन्हें विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत एवरेस्ट की चोटी तक पहुँचाया। यह कहानी न केवल पर्वतारोहण की तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों को दर्शाती है, बल्कि मानव साहस, धैर्य और आत्मविश्वास की भी प्रेरणा देती है। पाठ में तेनजिंग के व्यक्तित्व, उनके अनुभव, और उनके विचारों को सरल और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जिससे विद्यार्थी उनके जीवन से प्रेरणा ले सकें।

  • तेनजिंग नोर्गे का जन्म तिब्बत के खुम्बू क्षेत्र में हुआ।
  • वे शेरपा जाति से थे, जो पर्वतारोहण के लिए प्रसिद्ध है।
  • अध्याय में तेनजिंग के जीवन और साहसिक पर्वतारोहण की कहानी है।
  • उनकी यात्रा माउंट एवरेस्ट की चोटी तक पहुँचने की है।
  • यह कहानी साहस, धैर्य और आत्मविश्वास की प्रेरणा देती है।
  • 📌 पर्वतारोहण: ऊँचे पर्वतों पर चढ़ाई करना।
  • 📌 शेरपा: हिमालयी क्षेत्र की एक जाति जो पर्वतारोहण में माहिर होती है।
  • 📌 एवरेस्ट: विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत जिसकी ऊँचाई 8,848 मीटर है।

तेनजिंग नोर्गे का जीवन परिचय

व्याख्या

तेनजिंग नोर्गे का जीवन परिचय

तेनजिंग नोर्गे का जन्म सन् 1911 में तिब्बत के खुम्बू क्षेत्र में हुआ था। वे शेरपा जाति से थे, जो हिमालयी क्षेत्र में पर्वतारोहण के लिए प्रसिद्ध है। उनका बचपन प्राकृतिक कठोरताओं और सीमित संसाधनों के बीच बीता। उन्होंने कम उम्र में ही पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। तेनजिंग का जीवन संघर्षों से भरा था, लेकिन उनकी लगन और साहस ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानने दिया। उन्होंने कई बार कठिन पर्वतारोहण अभियानों में भाग लिया और अनुभव प्राप्त किया। उनका व्यक्तित्व सरल, विनम्र और साहसी था। वे कभी अपनी उपलब्धियों का दिखावा नहीं करते थे। तेनजिंग ने पर्वतारोहण को केवल एक खेल या चुनौती नहीं माना, बल्कि इसे अपने जीवन का उद्देश्य और धर्म माना।

  • तेनजिंग नोर्गे का जन्म 1911 में तिब्बत के खुम्बू क्षेत्र में हुआ।
  • वे शेरपा जाति से थे, जो पर्वतारोहण के लिए प्रसिद्ध है।
  • उनका बचपन प्राकृतिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों में बीता।
  • उन्होंने कम उम्र में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण शुरू किया।
  • उनका व्यक्तित्व सरल, विनम्र और साहसी था।
  • 📌 शेरपा: हिमालयी क्षेत्र की पर्वतारोहण में माहिर जाति।
  • 📌 पर्वतारोहण प्रशिक्षण: पर्वत पर चढ़ाई के लिए आवश्यक कौशल सीखना।

पर्वतारोहण की चुनौतियाँ

व्याख्या

पर्वतारोहण की चुनौतियाँ

पर्वतारोहण एक अत्यंत कठिन और जोखिम भरा कार्य है। इसमें पर्वत की ऊँचाई, बर्फीली सतह, तूफानी मौसम, ऑक्सीजन की कमी, और खतरनाक रास्तों का सामना करना पड़ता है। पर्वतारोहियों को अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं, और हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना करना पड़

अभ्यास प्रश्नChapter 14

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. इस कविता में बादलों के सौंदर्य चित्रण के अतिरिक्त और किन दृश्यों का चित्रण किया गया है?

उत्तर:

इस कविता में बादलों के सौंदर्य चित्रण के अतिरिक्त अन्य प्राकृतिक दृश्यों का भी चित्रण किया गया है जैसे कि निशा काल का चकवा-चकई का क्रंदन, महान सरवर के तीरे शैवालों की हरी दरी, कस्तूरी मृग का अपने पर चिढ़ना आदि। ये सभी दृश्य कविता में प्रकृति की विविधता और उसकी सुंदरता को दर्शाते हैं।

व्याख्या:

कवि ने बादलों के साथ-साथ अन्य प्राकृतिक दृश्यों का भी वर्णन किया है जिससे कविता में प्रकृति की समृद्धि और जीवंतता का अनुभव होता है।

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Q2.2. प्रणय-कलह से कवि का क्या तात्पर्य है?

उत्तर:

प्रणय-कलह का तात्पर्य प्यार-भरी छेड़छाड़ से है। कवि यहाँ प्रेम और स्नेह की वह स्थिति दर्शाता है जिसमें हल्की-फुल्की लड़ाई या झगड़ा होता है, जो प्रेम को और गहरा करता है। यह एक सौम्य और मधुर प्रेमालाप का प्रतीक है।

व्याख्या:

प्रणय-कलह का अर्थ केवल झगड़ा नहीं बल्कि प्रेम में होने वाली मीठी नोक-झोंक है, जो प्रेम को और प्रगाढ़ बनाती है।

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Q3.3. कस्तूरी मृग के अपने पर ही चिढ़ने के क्या कारण हैं?

उत्तर:

कस्तूरी मृग अपने पर इसलिए चिढ़ता है क्योंकि वह अपनी नशीली सुगंध (उन्मादक परिमल) को पहचानता है और उसे पाने की इच्छा रखता है, लेकिन वह उसे प्राप्त नहीं कर पाता। इस असमर्थता के कारण वह अपने पर ही चिढ़ता है।

व्याख्या:

कस्तूरी मृग की यह स्थिति उसकी आत्म-चिंतन और अपनी विशेषताओं को लेकर असंतोष को दर्शाती है, जो कवि ने प्रेम और आत्म-प्रेम के रूप में प्रस्तुत किया है।

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Q4.4. बादलों का वर्णन करते हुए कवि को कालिदास की याद क्यों आती है?

उत्तर:

बादलों का वर्णन करते हुए कवि को कालिदास की याद इसलिए आती है क्योंकि कालिदास ने अपने प्रसिद्ध खंडकाव्य 'मेघदूत' में बादलों का सुंदर और मनोहर चित्रण किया है। कवि को बादलों की छटा देखकर कालिदास की काव्यात्मक छवि और उनकी रचना की स्मृति जागृत होती है।

व्याख्या:

कालिदास के मेघदूत में बादलों को दूत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो प्रेम संदेश लेकर जाते हैं। इसी कारण कवि को बादलों का वर्णन करते हुए कालिदास की याद आती है।

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Q5.5. कवि ने ‘महामेघ को झंझानिल से गरज-गरज भिड़ते देखा है’ क्यों कहा है?

उत्तर:

कवि ने ‘महामेघ को झंझानिल से गरज-गरज भिड़ते देखा है’ इसलिए कहा है क्योंकि वह बादलों के बीच गरजती बिजली और गड़गड़ाहट को एक युद्ध या संघर्ष के रूप में देखता है। यह प्राकृतिक दृश्य बादलों की शक्ति और उनकी गतिशीलता को दर्शाता है।

व्याख्या:

यह पंक्ति बादलों के बीच बिजली चमकने और गरजने की तीव्रता को दर्शाती है, जिससे बादलों का संघर्ष या भिड़ंत प्रतीत होती है।

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Q6.6. ‘बादल को घिरते देखा है’ पंक्ति को बार-बार दोहराए जाने से कविता में क्या सौंदर्य आया है? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:

‘बादल को घिरते देखा है’ पंक्ति के बार-बार दोहराए जाने से कविता में एक लयात्मकता और गहराई आई है। यह दोहराव बादलों के घिरने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली और जीवंत बनाता है, जिससे पाठक के मन में बादलों की छटा और उनकी गति की छवि स्पष्ट होती है।

व्याख्या:

पंक्ति के पुनरावृत्ति से कविता में संगीतात्मकता आती है और भावों की तीव्रता बढ़ती है, जिससे पाठक का ध्यान मुख्य विषय पर केंद्रित रहता है।

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Q7.7. निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए— (क) निशा काल से चिर-अभिशापित / बेबस उस चकवा-चकई का बंद हुआ क्रंदन, फिर उनमें / उस महान सरवर के तीरे शैवालों की हरी दरी पर / प्रणय-कलह छिड़ते देखा है। (ख) अलख नाभि से उठनेवाले / निज के ही उन्मादक परिमल— के पीछे धावित हो—होकर / तरल तरुण कस्तूरी मृग को अपने पर चिढ़ते देखा है।

उत्तर:

(क) इस पद में निशा काल के दौरान चकवा-चकई (एक पक्षी) का क्रंदन बंद हो जाना दर्शाया गया है, जो चिर-अभिशापित यानी सदैव दुखी और अभागा है। फिर उस महान सरवर (झील) के किनारे शैवालों की हरी चादर पर प्रेम की हल्की-फुल्की लड़ाई (प्रणय-कलह) होती देखी गई है, जो जीवन में प्रेम और संघर्ष दोनों के सह-अस्तित्व को दर्शाता है। (ख) इस पद में अलख नाभि से उठनेवाले उन्मादक परिमल (नशीली सुगंध) के पीछे तरल और युवा कस्तूरी मृग को दौड़ते हुए देखा गया है, जो अपने ही सुगंध पर चिढ़ता है। यह आत्म-चिंतन और आत्म-प्रेम की स्थिति को दर्शाता है।

व्याख्या:

दोनों पदों में कवि ने प्रकृति के सूक्ष्म और गहरे भावों को व्यक्त किया है, जहाँ प्रेम, संघर्ष, आत्म-चिंतन और प्रकृति की सुंदरता का समन्वय है।

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Q8.8. संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए— (क) छोटे-छोटे मोती जैसे***कमलों पर गिरते देखा है। (ख) समतल देशों से आ-आकर***हंसों को तिरते देखा है। (ग) ऋतु वसंत का सुप्रभात था***अगल-बगल स्वर्णिम शिखर थे। (घ) ढूँढ़ा बहुत परंतु लगा क्या***जाने दो, वह कवि-कल्पित था।

उत्तर:

(क) "छोटे-छोटे मोती जैसे कमलों पर गिरते देखा है" का अर्थ है कि कवि ने कमलों पर ओस की बूँदों को मोतियों के समान चमकते हुए देखा है, जो प्रकृति की सुंदरता को दर्शाता है। (ख) "समतल देशों से आ-आकर हंसों को तिरते देखा है" का अर्थ है कि कवि ने समतल क्षेत्रों से उड़कर आने वाले हंसों को तैरते हुए देखा है, जो शांति और सौंदर्य का प्रतीक है। (ग) "ऋतु वसंत का सुप्रभात था अगल-बगल स्वर्णिम शिखर थे" का अर्थ है कि वसंत ऋतु का सुंदर सुबह था और आस-पास के पहाड़ स्वर्णिम रंग में नहाए हुए थे, जो प्रकृति की भव्यता को दर्शाता है। (घ) "ढूँढ़ा बहुत परंतु लगा क्या जाने दो, वह कवि-कल्पित था" का अर्थ है कि कवि ने बहुत खोजा लेकिन अंत में समझा कि वह दृश्य या वस्तु केवल उसकी कल्पना का हिस्सा थी, जो काव्यात्मक कल्पना की महत्ता को दर्शाता है।

व्याख्या:

प्रत्येक पंक्ति में कवि ने प्रकृति के विभिन्न रूपों और अपनी कल्पना को व्यक्त किया है, जो कविता की गहराई और सौंदर्य को बढ़ाते हैं।

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