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Chapter 4

🎓 Class 11📖 Antra📖 8 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~12 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 16Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

रांगेय राघव का परिचय

व्याख्या

रांगेय राघव का परिचय

इस खंड में हिंदी साहित्य के प्रमुख कथाकार रांगेय राघव का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया गया है। रांगेय राघव का जन्म आगरा में हुआ था। उनका वास्तविक नाम तिरुमल्ले नंबाकम वीर राघव आचार्य था, परंतु वे रांगेय राघव नाम से विख्यात हुए। उनके पूर्वज दक्षिण आरकाट से जयपुर के राजदरबार में निमंत्रण पर आए थे और बाद में आगरा में बस गए। रांगेय राघव ने आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. और पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। वे मात्र 39 वर्ष की आयु में ही निधन हो गए। रांगेय राघव ने हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, उपन्यास, कविता और आलोचना में रचनाएँ कीं। उनकी कहानियाँ समाज के शोषित और पीड़ित वर्ग के जीवन की मार्मिक झलक प्रस्तुत करती हैं। उनकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और भावनात्मक है, जो पाठकों को गहरे भावों से जोड़ती है। उनकी प्रमुख कहानियों में 'रामराज्य का वैभव', 'देवदासी', 'समुद्र के फेन' आदि शामिल हैं। उपन्यासों में 'घरौंदा', 'विषाद-मठ', 'मुर्दों का टीला' आदि उल्लेखनीय हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ की सजीव अभिव्यक्ति मिलती है, विशेषकर दिव्यांगों और शोषितों के प्रति संवेदनशीलता। वे अपने साहित्य के माध्यम से समाज में व्याप्त अन्याय और असमानता के खिलाफ आवाज उठाते हैं। 1961 में राजस्थान साहित्य अकादमी ने उन्हें साहित्य सेवा के लिए सम्मानित किया। उनकी रचनाओं का संग्रह दस खंडों में 'रांगेय राघव ग्रंथावली' के नाम से प्रकाशित हो चुका है।

  • रांगेय राघव का जन्म आगरा में हुआ और उनका मूल नाम तिरुमल्ले नंबाकम वीर राघव आचार्य था।
  • उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. और पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
  • उनकी साहित्यिक रचनाएँ कहानी, उपन्यास, कविता और आलोचना में हैं।
  • उनकी कहानियाँ समाज के शोषित और पीड़ित वर्ग के जीवन की मार्मिक अभिव्यक्ति हैं।
  • सरल और प्रवाहपूर्ण भाषा उनकी रचनाओं की विशेषता है।
  • 1961 में राजस्थान साहित्य अकादमी ने उन्हें सम्मानित किया।
  • 📌 एम.ए. – मास्टर ऑफ आर्ट्स, स्नातकोत्तर डिग्री
  • 📌 पी.एच.डी. – डॉक्टरेट डिग्री
  • 📌 दिव्यांग – शारीरिक या मानसिक रूप से असमर्थ व्यक्ति

कहानी 'गूँगे' का सारांश

सारांश

कहानी 'गूँगे' का सारांश

यह खंड 'गूँगे' कहानी का विस्तृत सारांश प्रस्तुत करता है, जो रांगेय राघव द्वारा रचित है। कहानी एक गूँगे किशोर के जीवन की मार्मिक कथा है, जो जन्म से वज्र बहरा है। वह अपने परिवार में उपेक्षित और शोषित है। उसकी माँ ने उसे छोड़ दिया था और पिता की मृत्यु के बाद वह अनाथाश्रम में पला। कहानी में गूँगे की असहायता, उसके संघर्ष और समाज की संवेदनहीनता को चित्रित किया गया है। कहानी में गूँगे की भाषा और संवाद की असमर्थता के कारण उसके मनोभावों को समझना कठिन होता है, लेकिन उसकी भावनाएँ और पीड़ा पाठकों तक गहराई से पहुँचती हैं। गूँगा मेहनत करता है, भीख नहीं माँगता, परंतु समाज उसे भिखारी समझता है। उसकी ममता और स्वाभिमान की झलक कहानी के कई प्रसंगों में मिलती है। गूँगा जब भी किसी अन्याय या अपमान का सामना करता है, तो वह चुप रहता है, पर उसकी आँखों में आँसू और हृदय में पीड़ा होती है। कहानी के अंत में गूँगे की पीड़ा और समाज की उदासीनता का भाव गहरा होता है। लेखक ने दिव्यांगों के प्रति समाज की संवेदनशीलता और करुणा की आवश्यकता पर बल दिया है।

  • कहानी का मुख्य पात्र जन्म से वज्र बहरा गूँगा किशोर है।
  • गूँगा अपने परिवार में उपेक्षित और शोषित है।
  • वह मेहनत करता है, भीख नहीं माँगता, लेकिन समाज उसे भिखारी समझता है।
  • कहानी में गूँगे की असमर्थता और उसके मनोभावों का मार्मिक चित्रण है।
  • लेखक ने दिव्यांगों के प्रति समाज की संवेदनशीलता पर जोर दिया है।
  • गूँगा समाज की उदासीनता और अन्याय के खिलाफ चुप्पी साधता है।
  • 📌 वज्र बहरा – पूरी तरह सुनाई न देने वाला व्यक्ति
  • 📌 अनाथाश्रम – ऐसे स्थान जहाँ अनाथ बच्चों की देखभाल होती है
  • 📌 संवेदनशीलता – दूसरों के दुख-दर्द को समझने और महसूस करने की क्षमता

मुख्य पात्रों का विश्लेषण

अवधारणा

मुख्य पात्रों का विश्लेषण

इस खंड में कहानी 'गूँगे' के मुख्य पात्रों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। कहानी के तीन प्रमुख पात्र हैं – गूँगा, चमेली और बसंता। गूँगा एक दिव्यांग किशोर है, जो जन्म से वज्र बहरा है। उसकी भाषा और संवाद की असमर्थता के बावजूद उसकी भावनाएँ गहरी और

अभ्यास प्रश्नChapter 4

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.लेखक के अनुसार अच्छा शासन क्या होता है?
A.शासक और प्रजा के सहयोग से चलने वाली व्यवस्था ।
B.शासक के मनचाहे व्यवहार से चलने वाली व्यवस्था ।
C.प्रजा को मनमानी करने का हक देने पर ।
D.कुछ गिने-चुने लोगों का बोलबाला होने पर ।

उत्तर:

शासक और प्रजा के सहयोग से चलने वाली व्यवस्था ।

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Q2.बालमुकुन्द गुप्त द्वारा रचित पाठ विदाई संभाषण उनकी किस प्रसिद्ध रचना का एक अंश है?
A.खेल तमाशा
B.शिवशंभु के चिट्ठे
C.भारतमित्र
D.चिट्ठे और खत

उत्तर:

शिवशंभु के चिट्ठे

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Q3.लार्ड कर्जन भारत की शिक्षित जनता के साथ कैसा व्यवहार करते थे ?
A.उनकी सलाह लेते थे ।
B.उनका आदर-सम्मान करते थे ।
C.उन्हें अपने काम-काज का ब्यौरा देते थे ।
D.उन से बात ही नहीं करते थे।

उत्तर:

उन से बात ही नहीं करते थे।

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Q4.लार्ड कर्जन के शासन-काल के नाटक का अंत कैसा था ?
A.घोर सुखांत
B.घोर हास्यापद
C.घोर दुखांत
D.घोर लीलामयी

उत्तर:

घोर दुखांत

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Q5.लेखक के अनुसार बिछड़न-समय में वैर-भाव छूटकर किस रस का आविर्भाव होता है ?
A.शांत रस
B.वीभत्स रस
C.करूण रस
D.हास्य रस

उत्तर:

शांत रस

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Q6._____ ______ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद न करने की प्रार्थना पर आपने ज़रा भी ध्यान नहीं दिया।
A.बीस लाख
B.आठ करोड़
C.दस करोड
D.साठ लाख

उत्तर:

आठ करोड़

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Q7.शिवशंभु की कथा के अनुसार कमजोर गाय किसका प्रतीक है ?
A.अंग्रेज़ों का
B.सुल्तान का
C.कैसर का
D.निरीह और भोली-भाली भारतीय जनता का

उत्तर:

निरीह और भोली-भाली भारतीय जनता का

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Q8.लार्ड कर्जन की जिद्द पाठ के अनुसार किससे बढ़कर थी ?
A.महाराज और उनके भाई
B.शक्तिशाली गाय
C.नादिरशाह
D.शिवशंभु

उत्तर:

नादिरशाह

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